कांवड़ यात्रा से पहले मुजफ्फरनगर में बवाल; पुलिस से बोले- 5 मिनट में वर्दी उतरवा दूंगा

मुजफ्फरनगर: पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 30 जुलाई से शुरू होने वाली कांवड़ यात्रा से पहले ही मुजफ्फरनगर में तनावपूर्ण स्थिति देखने को मिली। हरिद्वार से गंगाजल लेकर गाजियाबाद लौट रहे कांवड़ियों के एक जत्थे का शिव चौक पर पुलिस से विवाद हो गया।

देखते ही देखते कहासुनी ने तूल पकड़ लिया और मौके पर मौजूद कुछ पत्रकारों के साथ भी मारपीट की घटना सामने आई। पत्रकारों का आरोप है कि पुलिस के सामने उनके साथ अभद्रता और हमला हुआ, लेकिन किसी भी आरोपी के खिलाफ तत्काल मुकदमा दर्ज नहीं किया गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शिव चौक पर कांवड़ियों का जत्था डीजे वाहन के साथ पहुंचा था। डीजे की ऊंचाई अधिक होने के बावजूद कुछ युवक उसके ऊपर खड़े होकर शिव भक्ति गीतों पर नृत्य कर रहे थे। सुरक्षा की दृष्टि से खतरा देखते हुए ड्यूटी पर तैनात इंस्पेक्टर बृजेश शर्मा ने उन्हें नीचे उतरने के लिए कहा। इसी बात को लेकर विवाद शुरू हो गया।

इंस्पेक्ट पर लगाए गंभीर आरोप
आरोप है कि नीचे उतरने की बात को लेकर कुछ कांवड़ियों की इंस्पेक्टर से तीखी नोकझोंक हुई और उसको वर्दी उतरवाने तक की धमकी दे डाली। मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार, एक कांवड़िए ने कहा कि अगर वर्दी का इतना गुरूर है तो बता दो, पांच मिनट में उतरवा देंगे। कांवड़ियों का यह भी कहना था कि वे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने की मनोकामना लेकर गंगाजल ला रहे हैं। उन्होंने इंस्पेक्टर पर सरकार और मुख्यमंत्री के प्रति विरोधी मानसिकता रखने का आरोप भी लगाया।

धरने पर बैठे कांवड़िये
विवाद उस समय और बढ़ गया जब कांवड़ियों ने आरोप लगाया कि इंस्पेक्टर ने उनकी कांवड़ को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की और अभद्र भाषा का प्रयोग किया। इसी बात से नाराज कावड़िए शिव चौक पर ही धरना देकर बैठ गए। मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने उन्हें समझा-बुझा कर शांत कर उन्हें आगे रवाना किया।

दौड़ा-दौड़ा कर पीटा
हंगामे के दौरान कवरेज कर रहे कई पत्रकार भी विवाद की चपेट में आ गए। पत्रकारों का आरोप है कि उन्हें कवरेज से न केवल रोकने की कोशिश की गई, बल्कि उन्हे दौड़ा-दौड़ा कर पीटा भी गया। कावड़ियों द्वारा पिटाई किए जाने पर एक मीडिया कर्मी की उंगली टूट गई, जबकि दूसरे के सिर में चोट आई। घटना के बाद पत्रकारों ने संबंधित थाने में तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की, लेकिन समाचार लिखे जाने तक किसी भी आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं किया गया था। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस ने कानून के तहत कार्रवाई करने के बजाय केवल समझौते का रास्ता अपनाया, जिससे गलत संदेश गया।

अधिकारियों ने कोई बयान जारी नहीं किया
घटना में मौजूद कुछ स्वयंभू सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर भी मौजूद बताए गए। स्थानीय लोगों का दावा है कि ऐसे लोग कांवड़ यात्रा के दौरान धार्मिक आस्था के साथ-साथ सोशल मीडिया प्रचार पर अधिक ध्यान देते हैं और रील बनाने के लिए भीड़ को उकसाने का काम करते हैं। इस पूरे मामले में पुलिस अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। कई बार अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन किसी ने भी घटना पर प्रतिक्रिया देने से परहेज किया।

घटना ने कई सवाल खड़े किए
जानकारों की माने तो कांवड़ यात्रा शुरू होने से पहले चल रही अधिकारियों को बैठक में सुरक्षा और शांति पूर्वक कावड़ यात्रा निकाने की योजना में ऐसी घटना ने सुरक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था वाले बनाए जा रहे प्लान पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।