देहरादून। उत्तराखंड में राहुल गांधी की युवाओं से सीधी चर्चा हो या सीएम पुष्कर सिंह धामी का युवा अग्निवीरों से संवाद। विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश की राजनीति युवाओं के इर्द-गिर्द घूमने लगी है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ने युवाओं को अपने पाले में लाने की कवायद तेज कर दी है। इसके पीछे वजह प्रदेश के 17 लाख युवा मतदाता हैं, जिनके हाथों में आगामी विधानसभा चुनाव की बाजी है।
उत्तराखंड में 17 लाख युवा मतदाता
राज्य के कुल मतदाताओं में युवा मतदाताओं की हिस्सेदारी लगभग 21 प्रतिशत है। इसमें भी 20-29 वर्ष के युवा ही अकेले 20 प्रतिशत हैं। युवाओं की हिस्सेदारी के इसी गणित के चलते दोनों दलों ने अपनी रणनीति बदली है। अब राजनीतिक सभाओं में युवाओं की भाषा, मुद्दे और युवाओं का भविष्य सबसे प्रमुख विषय बन गए हैं। कांग्रेस हो या भाजपा, दोनों को पता है कि जिस दल ने युवाओं का भरोसा जीत लिया, उसके लिए सत्ता की राह आसान होगी।
कांग्रेस ने इसकी शुरुआत राहुल गांधी के छात्रों की गूंज कार्यक्रम से की है। पार्टी का मानना है कि पेपर लीक, सरकारी नौकरियों, बेरोजगारी और पलायन जैसे विषय छेड़कर युवाओं का राजनीतिक समर्थन हासिल किया जा सकता है। इसलिए उसने रैलियों के बजाय सीधे छात्रों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं से संवाद का रास्ता चुना है।
भाजपा युवाओं के लिए किए गए कार्यों को गिनाकर न सिर्फ युवा मतदाता को साध रही है बल्कि कांग्रेस को करारा जवाब भी दे रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी युवा अग्निवीर संवाद हो या जन संवाद हो, भर्ती में पारदर्शिता, सख्त नकल विरोधी कानून, नकल माफिया पर कार्रवाई और बिना पर्ची-बिना खर्ची के 34 हजार सरकारी नौकरियों को सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि के रूप में सामने रख रहे हैं।
साथ ही कांग्रेस शासनकाल की भर्ती अनियमितताओं का जिक्र कर विपक्ष के हमलों की धार कमजोर करने का प्रयास किया। सीएम ने संदेश दिया कि भाजपा केवल जुबानी राजनीति नहीं करती, बल्कि युवाओं के सपने भी पूरे करती है।
युवा मतदाताओं का विश्वास जीतने की लड़ाई
उन्होंने स्टार्टअप, कौशल विकास, स्वरोजगार, डिजिटल अवसर, अग्निवीर योजना और महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में किए गए कार्य गिनाकर अपने प्रयासों को युवा मन में स्थापित करने का प्रयास किया। कांग्रेस और भाजपा की जेद्दोजेहद से साफ है कि उत्तराखंड की राजनीति में वर्ष 2027 का विधानसभा चुनाव युवा मतदाताओं का विश्वास जीतने की लड़ाई बनता जा रहा है। जिस दल पर युवा मन विश्वास करेगा, चुनावी बाजी उसी के हाथ में होगी।