राजस्थान के गुजरात से सटे सिरोही और जालौर जिला हो या पाकिस्तान बॉर्डर से सटे बाड़मेर के इलाके हो हजारों की संख्या में 15 से ज्यादा स्कूलों में बच्चे स्कूल में तालाबंदी कर आंदोलन कर रहे हैं. बच्चे यही चाहते हैं कि उनको पढ़ाने के लिए सरकार टीचर दे. बाड़मेर के रामसर के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में टीचरों की कमी पर छात्र विरोध कर रहे हैं. टीचरों के अभाव में पढ़ाई प्रभावित हो रही है. उनका कहना है कि स्थायी नियुक्ति तक अंतरिम व्यवस्था के तहत तत्काल कम से कम दो टीचर की मांग रहे हैं. यही हाल जालोर के मेंगलवा गांव के पीएम श्री राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय का भी है. टीचरों की कमी को लेकर छात्र-छात्राओं का विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.
आखिर कहां चले गए टीचर?
लोगों के मन में एक ही सवाल बार-बार उठ रहा है कि आखिर ये टीचर कहां चले गए हैं. जयपुर जिले के मेंदवास सरकारी स्कूल में पहुंचे जहां, दो टीचरों की पोस्टिंग की गई है. एक से लेकर पांचवीं तक के स्कूल में मैडम नीतू यादव अपने बच्चे को लेकर बैठी मिली. जब आजतक की टीम ने उनसे पूछा कि मैडम बच्चे कहां हैं तो कहा कि एक से लेकर पांच क्लास तक पांच हीं बच्चे हैं और वो चले गए.
यहां से हम जयपुर जिले के हीं कोरिया गांव में पहुंचे तो वहां भी दो टीचर तैनात थे. एक आता है दूसरा घर रहता है. मैडम को पता चल गया कि आजतक की टीम आई है तो चार बच्चे जल्दी से बुलवा कर चित्रकला पढ़ाने लगी. यहां भी एक से लेकर पांचवीं तक का स्कूल है और कागज़ों में नामांकन केवल सात है जबकि कोई आता नहीं है. जिस बच्चे को पड़ोस से ले आई हैं उसको यह भी पता नहीं कि वो किस क्लास में पढ़ता है.
फिर हम जयपुर जिले के पाचाल पहुंचे तो पता चला कि यहां तो चार स्कूल है और 20 टीचर हैं. एक स्कूल में पहुंचे तो देखा कि दो कमरे में एक से लेकर आठवीं तक की पढ़ाई चल रही थी. कुल 6 टीचर हैं जिनमें से पांच की तैनात थी. दोनों ने कहा कि एक साथ एक कमरे में तीन-तीन क्लास एक साथ पढ़ा लेते हैं. टीचर सीताराम जाट ने कहा कि हम तो बैठे रहेंगे, अब सरकार का काम है कि बच्चे लाएं और कमरे दे. एक कमरे में दोनों टीचर बैठते हैं एक पढ़ाता है तो दूसरा होमवर्क देता है.
पेपर पर कुछ और सच कुछ और
इस तरह के जयपुर के कई स्कूलों का हमने जायजा किया जहां कागजों पर फर्जी नामांकन दिखाकर टीचर की तैनाती की गई है. दरअसल जो वीआईपी टीचर होते हैं वो जयपुर जोधपुर, कोटा, उदयपुर, सीकर जैसे जिला मुख्यालयों पर जुगाड़ से ट्रांसफर करा लेते है. फर्जी स्कूल खोलकर फर्ज़ी नामांकन दिखा देते है. लेकिन इस मामले की जांच जब शिक्षा मंत्री मदन दिलावर तक पहुंची तो उन्होंने कहा कि स्कूलों की इस स्थिति को लेकर उन्हें जानकारी है और वह रास्ता निकालने की कोशिश कर रहे हैं.