हिमाचल में 3 दिनों तक स्कूल बंद, मंडी, चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, सिरमौर में भारी बारिश का रेड अलर्ट, अडवाइजरी जारी

शिमला : मौसम विभाग की ओर से जारी ‘रेड अलर्ट’ के मद्देनजर हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा, मंडी और सिरमौर जिलों के सभी शैक्षणिक संस्थान 20 और 21 जुलाई को बंद रहेंगे। मौसम विभाग चंबा, कांगड़ा, मंडी और सिरमौर जिलों में तथा मंगलवार के लिए चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी और सिरमौर जिलों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश का ‘रेड अलर्ट’ जारी किया है। कांगड़ा के जिला मजिस्ट्रेट एवं उपायुक्त हेमराज बैरवा ने 20 और 21 जुलाई को जिले के सभी सरकारी और निजी शैक्षणिक संस्थानों को बंद रखने के आदेश जारी किए हैं। इसी तरह के आदेश मंडी के उपायुक्त अपूर्व देवगन और सिरमौर की उपायुक्त प्रियंका वर्मा ने भी जारी किए हैं।

परीक्षाएं की गईं कैंसल
आदेश के अनुसार, सभी सरकारी और निजी स्कूल, कॉलेज, व्यावसायिक एवं तकनीकी प्रशिक्षण संस्थान, आंगनबाड़ी केंद्र, बालवाटिकाएं, केंद्रीय हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय तथा कांगड़ा जिले के बल्याहार स्थित संस्कृत विश्वविद्यालय बंद रहेंगे। बैरवा ने यह भी निर्देश दिए कि 20 और 21 जुलाई को निर्धारित परीक्षाएं स्थगित कर दी जाएंगी। शिक्षण एवं गैर-शिक्षण कर्मचारी अवकाश पर रहेंगे, हालांकि आवश्यकता पड़ने पर जिला प्रशासन उन्हें आपातकालीन या आपदा प्रबंधन कार्यों के लिए बुला सकता है।

बाढ़ ने मचाई तबाही
मंडी जिले में भी सभी सरकारी स्कूल, निजी शिक्षण संस्थान, आईटीआई, डीआईईटी, व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थान, आंगनबाड़ी केंद्र और निजी ‘डे-केयर’ केंद्र बंद रहेंगे। हालांकि, यह आदेश आवासीय शिक्षण संस्थानों पर लागू नहीं होगा। इनमें आईआईटी मंडी, श्री लाल बहादुर शास्त्री राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल, नेरचौक तथा अन्य चिकित्सा शिक्षण संस्थान शामिल हैं। इस बीच, किन्नौर जिले में सांगला-चितकुल मार्ग पर रानी कांडा के पास टुबर नाले में रविवार को अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई

सुरक्षा चौकियां तबाह
अधिकारियों ने बताया कि चितकुल के रास्ते तिब्बत सीमा क्षेत्र को उत्तराखंड से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध हो गया है। टुबर नाले पर बना पुल भी तेज बहाव में क्षतिग्रस्त हो गया, जिससे सेना और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) की अग्रिम चौकियों से सड़क संपर्क टूट गया है। यह मार्ग सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसी रास्ते सेना और आईटीबीपी की तिब्बत सीमा के निकट स्थित अग्रिम चौकियों तक जवानों और आवश्यक सामग्री की आवाजाही होती है।

हिमाचल में भारी बारिश का अलर्ट
शिमला स्थित मौसम विज्ञान केंद्र द्वारा प्रदेश के चार से पांच जिलों में अलग-अलग स्थानों पर बहुत भारी से अत्यधिक भारी वर्षा की संभावना जताए जाने के बाद हिमाचल प्रदेश के अधिकारी अत्यधिक सतर्क हैं। इससे पहले मुख्य सचिव कमलेश कुमार पंत ने सभी उपायुक्तों को निर्देश दिए थे कि वे जिला आपातकालीन संचालन केंद्रों को 24 घंटे सक्रिय रखें, भूस्खलन, अचानक बाढ़ और बादल फटने की आशंका वाले संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान करें तथा आवश्यक एहतियाती उपाय सुनिश्चित करें। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि त्वरित प्रतिक्रिया दल, राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ), राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), होमगार्ड, अग्निशमन सेवा, पुलिस और एंबुलेंस सेवाओं को पूरी तरह तैयार रखा जाए।

लोगों के लिए अडवाइजरी जारी
प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने, नदियों, खड्डों, नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की है। सड़कों के बंद होने के मामले में मंडी जिला सबसे अधिक प्रभावित है, जहां 11 सड़कें यातायात के लिए बंद हैं। इनमें सराज उपमंडल की नौ और थलौट उपमंडल की दो सड़कें शामिल हैं। इसके बाद चंबा जिले में 10 सड़कें बंद हैं। लोक निर्माण विभाग सड़कों को बहाल करने का कार्य युद्ध स्तर पर कर रहा है।

पीने के पानी की किल्लत
मानसूनी बारिश का सबसे अधिक असर पेयजल आपूर्ति पर पड़ा है। सोमवार सुबह जहां 12 पेयजल योजनाएं प्रभावित थीं, वहीं शाम तक यह संख्या बढ़कर 43 हो गई। इनमें अकेले चंबा जिले के तीसा उपमंडल में 40 पेयजल योजनाएं प्रभावित हुई हैं, जिससे कई क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति बाधित हुई है। वहीं, बिजली व्यवस्था में दिनभर के दौरान उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया। सुबह तक 60 वितरण ट्रांसफार्मर प्रभावित थे, लेकिन बिजली विभाग की लगातार बहाली के प्रयासों के बाद शाम तक यह संख्या घटकर केवल पांच रह गई। रिपोर्ट के अनुसार सिरमौर जिले में भी बारिश का असर बना हुआ है। मानसून के दौरान अब तक 149 सड़कें बहाल की जा चुकी हैं, जबकि ताजा बारिश के बाद 61 सड़कें अभी भी बंद हैं। इसके अलावा जिले में 33 वितरण ट्रांसफार्मर और 12 पेयजल योजनाओं को बहाल करने का कार्य जारी है।

राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, जिला प्रशासन और संबंधित विभाग लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में भारी मशीनरी लगाकर मलबा हटाया जा रहा है, ताकि सड़क संपर्क जल्द बहाल किया जा सके। साथ ही बिजली और पेयजल जैसी आवश्यक सेवाओं को सामान्य करने के लिए युद्ध स्तर पर काम किया जा रहा है। प्रशासन ने लोगों से खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने  और नदी-नालों से दूर रहने की अपील की है।