अमेरिका देने जा रहा एक और झटका! ट्रंप के नए फैसले से कैसे बढ़ी भारत की टेंशन

Donald Trump Generic Medicine Tariff : अमेरिका अपने फायदे के लिए कुछ भी कर सकता है. डोनाल्ड ट्रंप को टैरिफ-टैरिफ खेलने में खूब मजा आता है. अब अमेरिका ऐसा फैसला लेने जा रहा है, जिसका सीधा असर भारत पर पड़ेगा. जी हां, डोनाल्ड ट्रंप के इस फैसले से भारत की मुश्किलें बढ़ जाएंगी. दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका में आयात होने वाली जेनेरिक दवाओं पर भारी टैरिफ लगाने जा रहे हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को अगस्त 2028 से इम्पोर्ट की जाने वाली जेनेरिक दवाओं पर भारी टैरिफ लगाने का ऐलान किया. इस फैसले से भारत की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि अमेरिका भारतीय दवा कंपनियों का सबसे बड़ा बाजार है. ट्रंप के इस फैसले का सबसे बड़ा असर भारत के दवा उद्योग पर पड़ेगा.

डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर कहा कि 1 अगस्त 2026 से अमेरिका में आने वाली सभी जेनेरिक दवाओं पर अगले दो साल तक कोई टैरिफ नहीं लगाया जाएगा. यानी 2028 तक इन दवाओं पर आयात शुल्क शून्य रहेगा. लेकिन इसके बाद नियम पूरी तरह बदल जाएंगे. 2028 से एक साल के लिए इसे बढ़ाकर 100 परसेंट और फिर उसके बाद 200 परसेंट कर दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि इस कदम का मकसद ऐसी फार्मास्युटिकल दवाओं की मैन्युफैक्चरिंग को अमेरिका में ही शुरू करना है. इस कदम से भारत पर असर पड़ सकता है. कारण कि अमेरिका को जेनेरिक दवाओं का सबसे बड़ा एक्सपोर्टर है.

डोनाल्ड ट्रंप का क्या ऐलान
डोनाल्ड ट्रंप ने इसके लिए अमेरिकी कंपनियों को धमकाया भी है. उन्होंने कहा कि ऐसा जेनेरिक फार्मास्युटिकल प्रोडक्शन को अमेरिका में वापस लाने के लिए किया जा रहा है. जो कंपनियां तय समय में प्लांट और इक्विपमेंट नहीं बनाएंगी, उन पर जुर्माना लगाया जाएगा. राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि इस पॉलिसी का मकसद अमेरिकी लोगों की सुरक्षा करना है. उन्होंने कहा कि पेटेंटेड, ब्रांडेड या इनोवेटिव दवाओं पर जो पॉलिसी अब तक बहुत सफल रही है, वह वैसी ही बनी रहेगी.

भारत पर सबसे ज्यादा असर क्यों?
दरअसल, भारत को अक्सर ‘फार्मेसी ऑफ द वर्ल्ड’ कहा जाता है क्योंकि यह दुनिया भर के देशों को जेनेरिक दवाएं सप्लाई करता है. ‘ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में भारत ने अमेरिका को 9.7 अरब डॉलर की फार्मास्युटिकल दवाएं एक्सपोर्ट कीं. यह भारत के कुल 25.8 अरब डॉलर के ग्लोबल फार्मा एक्सपोर्ट का 38 परसेंट था. भारतीय जेनेरिक दवाएं अमेरिका में हाइपरटेंशन, डायबिटीज, कैंसर, संक्रामक रोगों और मानसिक स्वास्थ्य के इलाज के लिए बड़े पैमाने पर इस्तेमाल की जाती हैं.

किन दवाओं पर पड़ सकता है असर?
भारत से अमेरिका भेजी जाने वाली जेनेरिक दवाओं का इस्तेमाल बड़ी संख्या में मरीज करते हैं. इनमें मुख्य रूप से हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, कैंसर, संक्रामक रोगों और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी दवाएं शामिल हैं. इन दवाओं की कीमत कम होने की वजह से अमेरिका में भी इनकी काफी मांग रहती है. अगर इन दवाओं पर 100 से 200 फीसदी तक टैरिफ लगता है तो उनकी कीमत बढ़ सकती है. इसका असर न सिर्फ भारतीय कंपनियों पर पड़ेगा, बल्कि अमेरिकी मरीजों को भी महंगी दवाएं खरीदनी पड़ सकती हैं.
भारत के लिए क्या चुनौती?

भारत का जेनरिक दवा उद्योग लंबे समय से अमेरिकी बाजार पर काफी हद तक निर्भर रहा है. भारत की इन दवाओं की अमेरिका में बड़ी डिमांड रहती है. ऐसे में अगर डोनाल्ड ट्रंप की यह नीति तय समय पर लागू होती है तो भारतीय कंपनियों के सामने दो बड़े विकल्प होंगे. पहला कि वे अमेरिका में अपने प्रोडक्शन प्लांट लगाएं या फिर दूसरा कि भारी टैरिफ का बोझ उठाकर अमेरिकी बाजार में बने रहने की कोशिश करें. बहरहाल, इसमें कोई दोराय नहीं कि ट्रंप का यह फैसला लागू होता है तो भारत के फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री पर भयंकर असर पड़ेगा.