बीजिंग: एक विशालकाय रॉकेट धरती से अंतरिक्ष की तरफ बढ़ रहा था…लॉन्च के महज कुछ ही सेकंड बीते थे और अचानक आसमान से कड़कड़ाती हुई बिजली सीधे उस रॉकेट पर आ गिरी. ये नजारा देखकर आस-पास मौजूद लोग घबरा गए, सबको लगा की एक भयानक ब्लास्ट होने वाला है. आम तौर पर ऐसी स्थिति में किसी भी बड़े हादसे या मिशन के फेल होने की आशंका 100% होती है लेकिन चीन के एक रॉकेट ने आसमान में ऐसा कारनामा कर दिखाया है जिसे देखकर वैज्ञानिक भी दंग रह गए हैं.
चीन के रॉकेट के साथ क्या हुआ?
चीन के ‘लॉन्ग मार्च-3बी’ (Long March-3B) रॉकेट ने उड़ान भरते ही बिजली का एक भयानक झटका झेला, लेकिन बिना डगमगाए और बिना अपना रास्ता भटके, वो सीधा अंतरिक्ष की ओर बढ़ता चला गया. इस रॉकेट ने न सिर्फ बिजली के हमले को बेअसर किया, बल्कि अपने साथ ले जाए जा रहे सैटेलाइट को एकदम सही ऑर्बिट में पहुंचा भी दिया.
ये घटना चीन के शिचांग सैटेलाइट लॉन्च सेंटर की है. ये जगह चीन के उन इलाकों में गिनी जाती है जहां मौसम बहुत तेजी से बदलता है और आसमान में सबसे ज्यादा बिजली कड़कती है.
लॉन्च वाले दिन जैसे ही ‘लॉन्ग मार्च-3बी’ रॉकेट ने पैड छोड़ा और हवा में चंद सौ मीटर ऊपर उठा, तभी अचानक बादलों को चीरती हुई नीली-सफेद रंग की बिजली की तेज लकीर सीधे रॉकेट से आ टकराई. एक पल के लिए ऐसा लगा जैसे कोई बड़ा धमाका हो जाएगा. चारों तरफ एक जोरदार चमक उठी लेकिन हैरान कर देने वाली बात ये रही कि रॉकेट की रफ्तार में न तो कोई कमी आई और न ही उसके रुख में जरा सा भी बदलाव हुआ. वह पूरी शान के साथ बादलों को फाड़ते हुए ऊपर निकल गया.
बिजली के हमले को मात देकर इस रॉकेट ने ‘तियानलियान-2-06’ नाम के एक बेहद एडवांस्ड डेटा रिले सैटेलाइट को जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में स्थापित कर दिया.
चीन का ‘अंतरिक्ष नेटवर्क’: ये सैटेलाइट चीन के सेकंड-जनरेशन तियानलियान नेटवर्क का छठा सैटेलाइट है. इसे आसान शब्दों में समझें तो ये अंतरिक्ष में चीन का अपना ‘वाई-फाई और मोबाइल टावर’ है.
नासा जैसी तकनीक: जिस तरह अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA के पास TDRSS नेटवर्क है, ठीक उसी तरह चीन का ये तियानलियान सिस्टम काम करता है.
चीन के लिए क्यों जरूरी है ये सैटेलाइट: जब अंतरिक्ष यात्री या चीनी स्पेस स्टेशन धरती के उन हिस्सों के ऊपर से गुजरते हैं जहां नीचे कोई ग्राउंड स्टेशन नहीं होता, तब यही सैटेलाइट उनके सिग्नल, वीडियो और डेटा को सीधे कंट्रोल रूम तक पहुंचाते हैं. यानी यह अंतरिक्ष और जमीन के बीच बात कराने वाली सबसे मजबूत कड़ी है.
इतिहास के पन्नों में दर्ज हुआ चीन का ये रॉकेट
अंतरिक्ष विज्ञान के इतिहास में ऐसी बहुत कम घटनाएं दर्ज हैं जहां किसी रॉकेट ने उड़ान के दौरान बिजली का झटका झेला हो और फिर भी मिशन 100% कामयाब रहा हो. चीन का ‘लॉन्ग मार्च-3बी’ अब दुनिया के उन गिने-चुने चुनिंदा रॉकेट्स के खास क्लब में शामिल हो गया है जिन्होंने बिजली की मार को हरा दिया.
इस क्लब में कौन-कौन शामिल है?
नासा का सैटर्न 5 (Saturn V): 1969 में नासा के मशहूर ‘अपोलो 12’ मिशन के दौरान सैटर्न 5 रॉकेट पर उड़ान भरते ही दो बार बिजली गिरी थी. उस वक्त कुछ पलों के लिए रॉकेट का सारा डेटा बंद हो गया था, लेकिन वैज्ञानिकों ने उसे संभाल लिया था.
रूस का सोयुज-2 (Soyuz-2): रूस का सोयुज रॉकेट भी एक बार लॉन्च के दौरान बिजली की चपेट में आ चुका है और सुरक्षित निकल गया था.
चीन का लॉन्ग मार्च-3बी: अब इस लिस्ट में चीन के इस ‘वर्कहॉर्स’ रॉकेट का नाम भी गर्व से जुड़ गया है.
बिजली से रॉकेट को इतना खतरा क्यों होता है?
दरअसल, जब आसमान से लाखों वोल्ट की बिजली किसी रॉकेट से टकराती है तो उसमें बहुत भारी करंट पैदा होता है. ये करंट रॉकेट के अंदर लगे नाजुक कंप्यूटरों, सेंसर्स, नेविगेशन सिस्टम और फ्यूल टैंक के वाल्वों को चुटकियों में जलाकर खाक कर सकता है. अगर नेविगेशन सिस्टम खराब हो जाए तो रॉकेट अपना रास्ता भटक कर आबादी वाले इलाके में गिर सकता है या हवा में ही फट सकता है. यही वजह है कि ज्यादातर देश खराब मौसम और बिजली चमकने के दौरान लॉन्च को तुरंत टाल देते हैं.
चीन की टेक्नोलॉजी का लोहा मान रही दुनिया
शिचांग के बेहद खराब और तूफानी मौसम में भी ‘लॉन्गमार्च-3बी’ रॉकेट का इस तरह बिना किसी खराबी के मिशन पूरा कर लेना ये दिखाता है कि चीन ने अपने रॉकेट्स की सुरक्षा और इंसुलेशन पर कितना काम किया है. पिछले दो सालों में चीन ने तियानलियान-2 सीरीज के चार सैटेलाइट लॉन्च करके अपने स्पेस कम्युनिकेशन ढांचे को काफी मजबूत कर लिया है. इस सफल और हैरतअंगेज लॉन्च के बाद पूरी दुनिया के स्पेस एक्सपर्ट्स चीन के इस रॉकेट की मजबूती और उसकी टेक्नोलॉजी की जमकर तारीफ कर रहे हैं.