हरियाणा सरकार को HC की फटकार, कर्मचारियों के लंबित वेतन पर प्रामाणिक रिकॉर्ड और स्पष्टीकरण तलब

पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय ने हरियाणा सरकार से जुड़े एक बेहद महत्वपूर्ण मामले में याचियों के मार्च 2026 से लंबित वेतन भुगतान के दावों पर लिखित जवाब और सैलरी भुगतान का पूरा प्रामाणिक रिकॉर्ड तलब किया है।

जस्टिस निधि गुप्ता की एकल पीठ ने याचिकाकर्ता तुही राम, जतिन, विपिन, अजय दहिया, सतवीर सिंह व अन्य की ओर से दायर विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया।

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता आरके मलिक और वरिष्ठ अधिवक्ता विकास चतरथ सहित अन्य वकीलों ने अदालत के समक्ष कर्मचारियों का पक्ष मजबूती से रखा।

उन्होंने पीठ को बताया कि कर्मचारियों को मार्च 2026 से अब तक वेतन का भुगतान नहीं किया गया है, जिसके कारण उन्हें आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, राज्य सरकार का पक्ष रखते हुए अतिरिक्त महाधिवक्ता तनुश्री गुप्ता ने याचिकाकर्ताओं के इन दावों का पुरजोर खंडन किया। उन्होंने कोर्ट को आश्वस्त किया कि सरकार की तरफ से सभी संबंधितों को नियमित रूप से वेतन का वितरण किया जा रहा है।

केवल मौखिक बयानों के आधार पर फैसला नहीं ले सकते
अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल मौखिक बयानों के आधार पर फैसला नहीं लिया जा सकता, इसलिए राज्य सरकार अपने लिखित जवाब के साथ यह स्पष्ट करे कि याचियों को किस माध्यम और तरीके से वेतन का भुगतान किया गया है। बैंक ट्रांसफर और संबंधित वित्तीय रिकॉर्ड भी कोर्ट के समक्ष पेश किए जाएं।

पीठ ने अपने आदेश में यह भी निर्देश दिया कि यदि जांच या रिकॉर्ड में किसी भी याचिकाकर्ता का वेतन या कोई देय राशि बकाया पाई जाती है, तो राज्य सरकार अगली सुनवाई से पहले उस पूरी बकाया राशि का भुगतान सुनिश्चित करे। अब 30 नवंबर को होने वाली आगामी सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार को अपना विस्तृत जवाब और वेतन वितरण से जुड़े प्रामाणिक दस्तावेज कोर्ट के पटल पर रखने होंगे।