राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में सर्दियों में हर साल चरम पर पहुंचने वाले प्रदूषण को देखते हुए इस बार प्रदेश सरकार ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी हैं। पराली प्रबंधन के लिए अतिरिक्त मशीनें खरीदी जाएंगी। ठोस कचरे और बायोमास के 100 प्रतिशत उठान का लक्ष्य रखा गया है। सड़कों की सफाई के लिए मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनों के इस्तेमाल को प्रोत्साहन दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव के बीच हुई बैठक में प्रदूषण की समस्या से निपटने पर विशेष जोर रहा। यादव ने सुझाव दिया कि सर्दियों के मौसम से पहले मिले समय का पूरा इस्तेमाल प्रदूषण नियंत्रण के उपायों को मिशन मोड में लागू करने के लिए किया जाना चाहिए।
दिल्ली-एनसीआर की एयर क्वॉलिटी में सुधार लाने के लिए आदेशों को समय पर लागू करना, विभिन्न एजेंसियों में बेहतर तालमेल और नियमों को सख्ती से लागू करना बहुत जरूरी होगा।
सड़कों से उड़ने वाली धूल को रोकने के लिए निर्णय लिया गया है कि मानसून के दौरान सड़कों पर गड्ढों की पहचान और मरम्मत, फुटपाथ और पेवमेंट बनाने, सड़क किनारे हरियाली और सफाई पर खास ध्यान दिया जाए। सितंबर तक मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनों के इस्तेमाल में सभी कमियों को पूरा कर लिया जाए। सड़कों की सफाई के काम की रियल टाइम मॉनिटरिंग करते हुए संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने म्युनिसिपल सॉलिड वेस्ट और बायोमास जलाने के मामलों से निपटने के लिए डेडिकेटेड टास्क फोर्स बनाने की वकालत की। साथ ही कूड़ा-करकट को खुले में जलाने से रोकने के लिए ठोस कचरे और बायोमास के 100 प्रतिशत उठान पर जोर दिया।
पराली जलाने के मामले में कमी लाने के लिए कस्टम हायरिंग सेंटर बनाने में तेजी लाने का अनुरोध करते हुए कहा कि स्थानीय चुने हुए प्रतिनिधि ग्राम पंचायतों के साथ मिलकर पराली जलाने वाले हॉट स्पॉट की पहचान करें।