लखनऊ के अलीगंज की एक इमारत में 22 जून 2026 को हुए अग्निकांड के बाद प्रदेश भर में अवैध निर्माण और भवनों अग्निसुरक्षा के मानकों को लेकर विकास प्राधिकरण, नगर निगम और अन्य विभाग सतर्क हो गए हैं। इस बीच बरेली में बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) और फायर ब्रिगेड की कार्रवाई के बाद अब नगर निगम भी आवासीय भवनों में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने वालों पर शिकंजा कसने जा रहा है। निगम का टैक्स विभाग ऐसे होटल, रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के खिलाफ अभियान चलाएगा, जो आवासीय भवनों में संचालित हो रहे हैं। नियमों का उल्लंघन मिलने पर सीलिंग की कार्रवाई भी की जाएगी।
नगर निगम सबसे पहले गली-मोहल्लों में संचालित होटल और रेस्टोरेंटों की जांच करेगा। विभागीय टीमें मौके पर पहुंचकर भवनों की पैमाइश करेंगी और यह तय करेंगी कि संपत्ति का उपयोग आवासीय है या व्यावसायिक। जांच में व्यावसायिक उपयोग मिलने पर संबंधित भवन का हाउस टैक्स आवासीय से बदलकर व्यावसायिक श्रेणी में किया जाएगा। मुख्य कर निर्धारण अधिकारी पीके द्विवेदी ने बताया कि भवनों का सर्च अभियान शुरू किया जा रहा है। अलग अलग जगहों पर भवनों की रिपोर्ट बनाएंगे। ये अभियान नगर निगम के राजस्व को बढ़ाने के लिए किया जा रहा है।
15 हजार भवन निगम के रडार पर
नगर निगम के प्रारंभिक आकलन के मुताबिक शहर में करीब 15 हजार ऐसे भवन हैं, जिनका हाउस टैक्स आवासीय श्रेणी में जमा हो रहा है, जबकि उनका उपयोग व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा है। कार्रवाई से राजस्व में बढ़ोतरी के साथ नियमों का पालन भी सुनिश्चित होगा।
2018 से वसूला जाएगा बकाया टैक्स
नगर निगम ऐसे भवनों का साल 2018 से अब तक का व्यावसायिक टैक्स का आकलन करेगा। इसके बाद जुर्माने के साथ नोटिस जारी कर बकाया राशि जमा कराने के निर्देश दिए जाएंगे। समय पर भुगतान नहीं होने पर सीलिंग और अन्य वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
इन इलाकों पर पहले फोकस
नगर निगम की सूची में किला क्षेत्र, पुराना शहर, पीलीभीत रोड, राजेंद्र नगर, मॉडल टाउन, बानखाना सहित कई प्रमुख इलाके शामिल हैं। इन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में आवासीय भवनों में होटल, रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होने की शिकायतें हैं।