सावधान! हिमाचल में खतरे से खाली नहीं हैं अगले 4 दिन, भीषण बारिश की चेतावनी; लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह

प्रदेश में मानसून के दौरान अब तक बादल फटने की आठ, अचानक बाढ़ की 71, घटनाएं दर्ज की गई हैं। शिमला के पंथाघटी में खुदाई के बाद 10 भवनों को खतरा बढ़ा हुआ है। हमीरपुर जिला में सलोनी-दियोटसिद्ध सड़क पर कई स्थानों पर पेड़ गिरने का खतरा है।

इस सबके बीच प्रदेश में मानसून एक बार फिर कहर बरपाने की तैयारी में है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने 25 से 30 जुलाई तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में वर्षा का दौर जारी रहने का पूर्वानुमान जारी किया है। 28 और 29 जुलाई को कई जिलों में भारी से बहुत भारी वर्षा की चेतावनी दी गई है।

इस दौरान भूस्खलन, अचानक बाढ़, नदी-नालों के उफान और सड़कें बंद होने की आशंका जताते हुए लोगों को सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है। प्रदेश में शुक्रवार और शनिवार को कई स्थानों पर भारी वर्षा दर्ज की गई।

प्रदेश में 134 सड़कें बंद हैं। 78 बिजली ट्रांसफार्मर (डीटीआर) प्रभावित हैं और 35 पेयजल योजनाएं बाधित हैं। मानसून सीजन में अब तक 618 सड़कें, 710 बिजली ट्रांसफार्मर और 1,461 पेयजल योजनाएं प्रभावित हो चुकी हैं। इनमें से अधिकांश सेवाएं बहाल कर दी गई हैं, लेकिन कई स्थानों पर बहाली का कार्य अभी भी जारी है।

प्रदेश में बीते चौबीस घंटों के धर्मशाला में 80.5 मिलीमीटर सबसे अधिक वर्षा दर्ज की गई। पालमपुर में 62,मंडी में 39.8, कांगड़ा में 30.4 और सराहन में 28.7 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई। प्रदेश में अधिकतम तापमान में तीन डिग्री की गिरावट आई है। न्यूनतम तापमान सामान्य के आसपास रहा। सबसे अधिक अधिकतम तापमान नेरी में 32.1 डिग्री दर्ज किया गया है।

मौसम विज्ञान केंद्र ने प्रशासन को संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने और आपदा प्रबंधन दलों को अलर्ट रखने के निर्देश दिए हैं। लोगों से नदी-नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहने तथा मौसम की चेतावनियों का पालन करने की अपील की गई है।