देहरादून मसूरी मार्ग पर मंडरा रहा खतरा! ULMMC स्टडी रिपोर्ट में खुलासा

देहरादून: उत्तराखंड में इन दिनों बारिश हो रही है. जिसके कारण जगह जगह पर लैंडस्लाइड की घटनाएं हो रही हैं. ऐसे में लोगों को बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. इन दिनों हुई बारिश में सबसे अधिक देहरादून मसूरी मार्ग प्रभावित रहा है. देहरादून मसूरी मार्ग पर कई ऐसे अलग-अलग स्पॉट है जहां लैंडस्लाइड का खतरा है. ये खतरा आने वाले दिनों में लोगों के लिए बड़ी समस्या बन सकता है.

मानसून सीजन में बढ़ी लैंडस्लाइड की घटनाएं:मानसून सीजन की शुरुआत के साथ ही उत्तराखंड में लैंडस्लाइड की घटनाएं बढ़ने लगी हैं. पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश के बीच कई जगह सड़कें मलबे से पट रही हैं. कहीं पहाड़ों से गिर रहे पत्थर यातायात के लिए खतरा बन रहे हैं. देहरादून-मसूरी मार्ग भी इस खतरे से अछूता नहीं है. जिस सड़क को आमतौर पर देहरादून और मसूरी के बीच सुरक्षित और महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग माना जाता है, वहां पिछले कुछ समय से लगातार भूस्खलन की घटनाएं सामने आ रही हैं.

देहरादून मसूरी मार्ग पर लैंडस्लाइड
पिछले साल बरसात के दौरान देहरादून-मसूरी मार्ग को भारी नुकसान पहुंचा था. कई जगह सड़क धंस गई थी. कुछ स्थानों पर पहाड़ से लगातार पत्थर और मलबा गिरने की घटनाएं हुईं. इस साल भी मानसून की शुरुआत के साथ ही हालात एक बार फिर चिंता बढ़ा रहे हैं. हाल ही में लैंडस्लाइड के चलते मार्ग पर यातायात बाधित हुआ. जिला प्रशासन को मसूरी जाने वाले रास्ते को कुछ समय के लिए बंद करना पड़ा. सड़क से मलबा हटाने और प्रभावित हिस्सों को सुरक्षित करने के बाद यातायात को दोबारा शुरू किया गया.

ULMMC ने किया तकनीकी अध्ययन:लगातार सामने आ रही इन घटनाओं को देखते हुए लोक निर्माण विभाग ने देहरादून-मसूरी मार्ग का तकनीकी अध्ययन कराने का निर्णय लिया. इसके लिए उत्तराखंड लैंडस्लाइड मिटिगेशन एंड मैनेजमेंट सेंटर यानी ULMMC की मदद ली गई. ULMMC ने मार्ग के अलग-अलग हिस्सों का अध्ययन कर उन स्थानों की पहचान की है, जहां भूस्खलन का खतरा अधिक है. हालांकि, अध्ययन रिपोर्ट अभी लोक निर्माण विभाग को आधिकारिक रूप से प्राप्त नहीं हुई है,लेकिन सेंटर की ओर से अपनी स्टडी पूरी कर ली गई है.

देहरादून मसूरी मार्ग पर लगा जाम
तीन से चार लैंडस्लाइड जोन चिन्हित:अध्ययन में सामने आया है कि मार्ग पर करीब तीन से चार ऐसे स्थान हैं, जिन्हें लैंडस्लाइड प्रोन एरिया के तौर पर चिन्हित किया गया है. इन स्थानों पर पहाड़ों से निकलने वाला पानी और स्लोप की स्थिति चिंता का कारण बनी हुई है. जिन हिस्सों में पहाड़ी से पानी लगातार रिसकर या बहकर सड़क की ओर आता है, वहां जमीन की पकड़ कमजोर होने की संभावना बढ़ जाती है. ऐसे में लगातार बारिश होने पर स्लोप अस्थिर हो सकते हैं. अचानक लैंडस्लाइड की स्थिति बन सकती है.

सुरक्षा कार्यों में जुटा लोक निर्माण विभाग:अध्ययन में चिन्हित किए गए संवेदनशील क्षेत्रों में से एक स्थान पर लोक निर्माण विभाग की ओर से सुरक्षा कार्य किया जा चुका है. बाकी क्षेत्रों में अभी भी स्थायी समाधान की जरूरत है. इन स्थानों पर ड्रेनेज व्यवस्था को बेहतर करने, पानी की निकासी सुनिश्चित करने और कमजोर स्लोप को स्थिर करने जैसे उपाय किए जाने की जरूरत है. रिपोर्ट मिलने के बाद विभाग और जिला प्रशासन इन क्षेत्रों में आवश्यक सुरक्षा कार्य शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं.

ULMMC की रिपोर्ट अभी जिला प्रशासन को प्राप्त नहीं हुई है. हालांकि प्रारंभिक जानकारी में कुछ ऐसे क्षेत्रों को चिन्हित किए जाने की बात सामने आई है, जहां तेज बारिश की स्थिति में लैंडस्लाइड की संभावना बनी हुई है. रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद इन क्षेत्रों में आवश्यक सुरक्षा कार्य किए जाएंगे, ताकि देहरादून-मसूरी मार्ग को सुरक्षित बनाया जा सके.

आशीष चौहान, देहरादून के जिलाधिकारी
क्यों जरूरी है देहरादून-मसूरी मार्ग:देहरादून-मसूरी मार्ग की संवेदनशीलता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मसूरी में सालभर पर्यटकों की आवाजाही बनी रहती है. गर्मियों के सीजन में पर्यटकों की संख्या काफी बढ़ जाती है. लेकिन मानसून के दौरान भी छुट्टियों और वीकेंड पर बड़ी संख्या में पर्यटक मसूरी पहुंचते हैं. देहरादून और उत्तराखंड के दूसरे जिलों के अलावा देश के अलग-अलग राज्यों से भी लोग मसूरी आते हैं. ऐसे में मार्ग पर लैंडस्लाइड का खतरा सिर्फ स्थानीय लोगों के लिए ही नहीं, बल्कि पर्यटकों के लिए भी बड़ी चिंता बन जाता है.

देहरादून मसूरी मार्ग
सड़क बंद होने की स्थिति में मसूरी का संपर्क प्रभावित होता है. हाल के दिनों में लैंडस्लाइड के बाद जिस तरह से मार्ग को बंद करना पड़ा, उसने एक बार फिर इस खतरे की गंभीरता को सामने ला दिया. सड़क से मलबा हटाने के बाद यातायात तो बहाल कर दिया गया, लेकिन सवाल यह है कि जब तक संवेदनशील स्लोप का स्थायी उपचार नहीं किया जाता, तब तक हर भारी बारिश के बाद ऐसी स्थिति दोबारा बन सकती है.

लोक निर्माण विभाग के इंजीनियरों के मुताबिक देहरादून-मसूरी मार्ग पर पिछले साल और इस साल हुए नुकसान की सबसे बड़ी वजह कम समय में बहुत अधिक बारिश होना है. एक साथ बड़ी मात्रा में पानी पहाड़ों पर गिरने से प्राकृतिक जल निकासी व्यवस्था पर दबाव बढ़ता है. इसके साथ ही पहाड़ी स्लोप में पानी का रिसाव बढ़ने से मिट्टी और चट्टानों की पकड़ कमजोर होती है. यही वजह है कि कई जगह अचानक मलबा और पत्थर सड़क पर आ जाते हैं.

इस मार्ग पर पिछले साल और इस बार भारी नुकसान की मुख्य वजह अत्यधिक बारिश है. कम समय में काफी अधिक बारिश होने के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में पानी का दबाव बढ़ रहा है. जिससे स्लोप अस्थिर हो रहे हैं. लैंडस्लाइड की घटनाएं सामने आ रही हैं.जिसके कारण कई बार सड़क बंद हो जाता है.

राजेश कुमार, अधिशासी अभियंता, लोक निर्माण विभाग

फिलहाल ULMMC की रिपोर्ट को इस पूरे मामले में महत्वपूर्ण मानी जा रही है. रिपोर्ट में चिन्हित किए गए स्थानों पर यदि समय रहते वैज्ञानिक तरीके से उपचार किया जाता है. भविष्य में होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है. खासतौर पर उन स्थानों पर जहां पहाड़ से पानी लगातार सड़क की ओर आ रहा है, वहां ड्रेनेज और स्लोप स्टेबिलाइजेशन पर विशेष ध्यान देना होगा.

देहरादून मसूरी मार्ग के हाल
देहरादून-मसूरी मार्ग उत्तराखंड के सबसे महत्वपूर्ण पर्यटन मार्गों में से एक है. ऐसे में इस मार्ग को सिर्फ सड़क के तौर पर नहीं, बल्कि पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था की लाइफलाइन के तौर पर भी देखा जाता है. पिछले साल हुई घटनाओं और इस मानसून में सामने आ रहे लैंडस्लाइड के बाद अब चुनौती यह है कि चिन्हित किए गए खतरनाक स्लोप को समय रहते सुरक्षित किया जाए, क्योंकि अगर तेज बारिश का दौर इसी तरह जारी रहा, तो संवेदनशील स्थानों पर कभी भी लैंडस्लाइड की स्थिति बन सकती है. जिससे देहरादून-मसूरी मार्ग पर यातायात फिर से प्रभावित हो सकता है.