अध्ययन की प्रमुख लेखिका डॉ. लिसा फोर्स (Lisa Force) का कहना है कि कैंसर नियंत्रण के लिए नीतियां और योजनाएं अभी भी वैश्विक स्वास्थ्य एजेंडा में प्राथमिकता नहीं पा रही हैं. बहुत से देशों में पर्याप्त फंडिंग नहीं है, जिसकी वजह से समय पर जांच और बेहतर इलाज उपलब्ध नहीं हो पाता. उन्होंने यह भी कहा कि अगर सभी देशों में समान और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिलें तो कैंसर से होने वाली मौतों को काफी हद तक कम किया जा सकता है.
ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज (GBD) अध्ययन, जिसने 204 देशों और क्षेत्रों के आंकड़ों का विश्लेषण किया, स्पष्ट करता है कि अगर अभी कदम नहीं उठाए गए तो 2050 तक कैंसर की स्थिति और गंभीर हो जाएगी. रिपोर्ट में लिखा गया है कि 2050 में हर साल 3.05 करोड़ नए केस और 1.86 करोड़ मौतें होंगी, जो 2024 की तुलना में क्रमशः 60.7 प्रतिशत और 74.5 प्रतिशत की वृद्धि होगी. यानि आने वाले समय में कैंसर पूरी दुनिया के लिए एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बनने वाला है. अगर समय रहते लाइफस्टाइल में बदलाव, जागरूकता और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था नहीं की गई, तो इसके विनाशकारी परिणाम देखने को मिल सकते हैं.