फरीदाबाद: सितंबर का सूरज सिर पर चढ़ा तो मानो आग उगलने लगा… पर कहावत है न कि हर रात के बाद सवेरा होता है…वैसा ही हाल अब मौसम का है. हरियाणा समेत पूरे दिल्ली-एनसीआर में पिछले दस दिनों से चिलचिलाती धूप और उमस ने लोगों का जीना दूभर कर रखा था. लेकिन शनिवार को मौसम ने करवट बदली और लोगों ने राहत की सांस ली. 31 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली हवाओं और बादलों की आवाजाही ने वो तेज धूप ढक ली जो लोगों को तपते तवे पर बैठने जैसा अहसास करा रही थी.
भारत मौसम विज्ञान विभाग और स्काईमेट वेदर दोनों की रिपोर्ट ने साफ कर दिया है कि सितंबर का अंत और अक्टूबर की शुरुआत इस बार कुछ खास होने वाली है. जहां दिन में बादलों की लुकाछिपी और बूंदाबांदी की संभावना बनी रहेगी, वहीं रातें अब धीरे-धीरे ठंडी होने लगी हैं. करनाल और पलवल में जहां शनिवार को पारा 37.8 डिग्री तक पहुंच गया वहीं महेंद्रगढ़ की रात ने 22.4 डिग्री पर सुकून दिया. जैसे ही पहाड़ों की तरफ से ठंडी हवाएं चलनी शुरू हुईं, मौसम में ताजगी घुलने लगी.
फरीदाबाद, गुरुग्राम, मेवात, पलवल और रेवाड़ी जैसे जिलों में हल्की बारिश या बूंदाबांदी की संभावना जताई गई है. मौसम विभाग के अनुसार, 30 सितंबर को चार जिलों मेवात, पलवल, रेवाड़ी और महेंद्रगढ़ में हल्की बरसात हो सकती है, जबकि बाकी जिलों में मौसम साफ रहेगा. 1 और 2 अक्टूबर को तो पूरे प्रदेश में साफ आसमान की उम्मीद है, लेकिन हवाओं का रुख उत्तर-पश्चिम की ओर रहने से रात का तापमान गिरता रहेगा. यानी धीरे-धीरे सर्दी दस्तक देने लगेगी.
हालांकि बारिश के बाद कई इलाकों में स्मॉग की परत भी देखने को मिली. अंबाला में सुबह-सुबह हल्का धुंधलका छाया रहा, मानो आसमान और जमीन के बीच धुएं और ओस ने हाथ मिला लिया हो. यही वजह है कि जहां राहत है वहीं सावधानी भी जरूरी है. इस बार हरियाणा में मानसून ने भी अपना रंग खूब दिखाया. एक जून से 22 सितंबर तक करीब 114 दिनों तक बरसात होती रही. इस दौरान औसत से 38 प्रतिशत ज्यादा बारिश दर्ज हुई. सबसे ज्यादा बारिश यमुनानगर में 1116.5 मिमी हुई जबकि सबसे कम सिरसा में 346.6 मिमी.
अब अक्टूबर की दस्तक के साथ ही मौसम का मिजाज बदल रहा है. गर्मी से परेशान लोगों के लिए यह बड़ी खुशखबरी है. कह सकते हैं कि अब बरसाती तपिश की जगह… सर्दी की सरगोशियां सुनाई देने लगी हैं. आने वाले दिनों में धूप नरम होगी, हवाओं में ठंडक घुलने लगेगी और सुबह-शाम का माहौल सुहावना बन जाएगा. यानी मौसम ने आखिरकार कह दिया है…अब चैन से सांस लो राहत का मौसम लौट आया है.