Airplane Facts: जब कोई विमान तूफानी बादलों के पास से उड़ता है और बाहर तेज रोशनी चमकती है तो ज्यादातर यात्रियों का दिल जोर से धड़कने लगता है. लेकिन हकीकत यह है कि यह कोई दुर्लभ घटना नहीं है. नेशनल वेदर सर्विस के अनुसार, एक कमर्शियल एयरक्राफ्ट पर औसतन साल में एक या दो बार बिजली गिरती है, और ज्यादातर बार यात्रियों को इसका अहसास तक नहीं होता.
क्या यात्रियों को इस झटके का पता नहीं चलता?
अक्सर ऐसा होता है कि प्लेन पर बिजली गिरने के बावजूद केबिन के अंदर बैठे लोगों को कुछ भी महसूस नहीं होता. बाहर बस एक हल्की सी चमक या तेज रोशनी दिख सकती है, लेकिन प्लेन सामान्य तरीके से उड़ता रहता है. यही वजह है कि पायलट और क्रू इसे एक रूटीन घटना की तरह देखते हैं, न कि किसी आपात स्थिति की तरह.
मॉडर्न प्लेन में अब नहीं कोई दिक्कत
आज के एयरक्राफ्ट को खास तौर पर इस तरह डिजाइन किया जाता है कि बिजली का करंट उनके बाहरी ढांचे से होकर निकल जाए और अंदर मौजूद महत्वपूर्ण सिस्टम सुरक्षित रहें. विमान का धातु या कंपोजिट ढांचा एक तरह का सुरक्षा कवच बन जाता है, जिससे बिजली का रास्ता कंट्रोल्ड तरीके से बाहर निकल जाता है और किसी भी इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम को नुकसान नहीं होता.
कैसे बनी रहती है नॉर्मल सिचुएशन?
विमान के इंजन, कॉकपिट और नेविगेशन सिस्टम को बिजली से बचाने के लिए कई लेयर की सुरक्षा दी जाती है. केबल्स और इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स को खास शील्डिंग के अंदर रखा जाता है ताकि किसी भी तरह का इलेक्ट्रिक झटका अंदर तक न पहुंचे. इसलिए भले ही बाहर बिजली चमके, अंदर सब कुछ सामान्य बना रहता है. यह जानकर बहुत से लोग हैरान हो जाते हैं कि अमेरिका में 1963 के बाद से बिजली गिरने की वजह से कोई भी कमर्शियल विमान क्रैश नहीं हुआ है. तकनीक के आगे बढ़ने के साथ विमानों की सेफ्टी भी लगातार बेहतर होती गई है. आज की एविएशन इंडस्ट्री में बिजली गिरना एक मैनेज्ड रिस्क माना जाता है, न कि जानलेवा खतरा.
यात्री ऐसे समय क्या करें?
जब आपकी फ्लाइट किसी तूफान के पास से गुजर रही हो और बाहर चमक दिखाई दे, तब घबराने की जरूरत नहीं होती. पायलट और एयर ट्रैफिक कंट्रोल लगातार मौसम और विमान की स्थिति पर नजर रखते हैं. आधुनिक तकनीक और डिजाइन के कारण प्लेन ऐसे हर झटके को आसानी से झेल लेता है, जिससे आपकी यात्रा सुरक्षित बनी रहती है.