भूत भगाने के नाम पर हैवानियत; मां ने ही बेटी की ली जान, अंधविश्वास ने छीनी मासूम की जिंदगी

21वीं सदी में जहां विज्ञान और तकनीक ने इंसान की जिंदगी आसान बना दी है, वहीं अंधविश्वास आज भी कई घरों में जानलेवा साबित हो रहा है. कभी तंत्र-मंत्र, कभी भूत-प्रेत और कभी आत्मा के साए का डर. ऐसी ही एक सोच ने चीन में एक बेटी की जान ले ली. यह मामला न किसी अपराध फिल्म की कहानी है और न ही किसी डरावने सीरियल का सीन, बल्कि हकीकत है. सोशल मीडिया पर वायरल हो रही इस खबर ने लोगों को झकझोर दिया है. आइए जानते हैं कैसे ‘भलाई’ के नाम पर किया गया एक कर्म, मौत में बदल गया.

मां और बहन दोषी
चीन के ग्वांगडोंग प्रांत के शेनझेन शहर की एक अदालत ने इस सनसनीखेज मामले में बड़ा फैसला सुनाया. कोर्ट ने मां ली और बड़ी बेटी को लापरवाही से हुई हत्या का दोषी माना. हालांकि अदालत ने यह भी साफ किया कि उनका इरादा बेटी को मारने का नहीं था. इसी आधार पर दोनों को तीन साल की सजा सुनाई गई, जिसे चार साल के लिए निलंबित कर दिया गया. रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपियों ने जांच में पूरा सहयोग किया, अपना अपराध स्वीकार किया और पछतावा जताया, जिस वजह से उन्हें तुरंत जेल नहीं भेजा गया.

अंधविश्वास की गिरफ्त में परिवार
कोर्ट के मुताबिक, मां और दोनों बेटियां लंबे समय से खतरनाक अंधविश्वासी विचारों से प्रभावित थीं. परिवार का मानना था कि दानव कब्जा कर सकते हैं, टेलीपैथी होती है और आत्माएं बेची जा सकती हैं. यह सोच धीरे-धीरे डर और शक में बदल गई. दिसंबर में छोटी बेटी शिए ने दावा किया कि उस पर किसी दुष्ट आत्मा का साया है और उसे बचाने के लिए ‘एक्सॉर्सिज़्म’ यानी भूत भगाने की प्रक्रिया जरूरी है. परिवार ने डॉक्टर या विशेषज्ञ की मदद लेने के बजाय अंधविश्वास को ही इलाज मान लिया.

मदद समझकर किया गया अत्याचार
भूत भगाने की इस कथित रस्म के दौरान मां और बड़ी बहन ने शिए के सीने पर जोर डाला और जबरन उसके मुंह में पानी डाला, ताकि वह उल्टी करे. उनका मानना था कि इससे बुरी आत्मा बाहर निकल जाएगी. हैरानी की बात यह रही कि पीड़िता खुद भी कहती रही कि प्रक्रिया काम कर रही है. लेकिन अगली सुबह वह बेहोश मिली, उसके मुंह से खून निकल रहा था. इमरजेंसी सेवाएं पहुंचीं, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी. कोर्ट ने साफ कहा कि अंधविश्वास के नाम पर किया गया यह कृत्य गंभीर लापरवाही है.