बहराइच: जिले में इन दिनों किसान साहीवाल गाय से घी का बिजनेस करके अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं, जिसमें 30 से 35 लीटर दूध की एक लीटर घी बनाई जाती है और फिर 2500 रुपए प्रति किलो के हिसाब से बिक्री होती है. 100% शुद्धता की गारंटी के साथ इस घी को बनाने और बेचने वाले जांच करने का दावा भी करते हैं. आइए जानते हैं कि साहीवाल गाय के दूध की घी का बिजनेस कैसे आगे बढ़ रहा है.
बिनोला विधि से तैयार होती है यह घी
बिनोला विधि घी निकालने की एक बेहद पारंपरिक विधि है, जो पूर्वजों के जमाने से इस्तेमाल होती आ रही है. इस विधि से घी बिल्कुल शुद्ध प्राप्त होती है और घी का स्वाद भी बना रहता है. इसमें सबसे पहले साहीवाल गाय और गिरी गाय के दूध को लेकर मिट्टी की हांडी में उसकी दही जमाई जाती है और फिर दही के ऊपर पड़ने वाली मलाई को निकाल लिया जाता है और फिर इसको मथकर इसका मस्का निकाला जाता है. मस्का निकालने के बाद लगभग 30 से 35 लीटर दूध की 1 किलो शुद्ध घी (A2 नाम की घी) तैयार होती है.
शुद्धता का मिला है प्रमाण पत्र
बहराइच जिले के जरवल में स्थित गौशाला में प्रबंधन का काम देखने वाले रामसेवक वर्मा ने बताया कि सरकार की ओर से हमारी इस देसी घी को शुद्धता का प्रमाण पत्र मिला हुआ है और अगर इसके बावजूद भी कोई अगर चेक करना चाहता है, तो वह चेक कर सकता है. जो घी हमारी A2 देसी घी के नाम से जिले में चर्चित है, सरकारी दफ्तरों से लगाकर अधिकांश जगह पर इसकी पकड़ है.
महीने की खपत और कमाई
रामसेवक वर्मा ने बताया कि इस देसी घी की खपत हर दिन लगभग 8 से 10 किलो है. इस हिसाब से महीने का देखा जाए तो लगभग 240 किलो तक घी बड़े आराम से बिक जाता है. मुनाफे की बात करें तो हर एक किलो पर 300 रुपये बड़े आराम से बच जाता है. इस हिसाब से प्रति माह 72000 तक बचत हो जाती है, जिसकी बिक्री ऑनलाइन वेबसाइट पर www.anvayapure.com या फिर बहराइच शहर में स्थित कृषि भवन में मिलेट्स गैलरी से भी कर सकते हैं.
साहीवाल और गिरी गाय का घी इतना महंगा क्यों?
साहीवाल और गिरी गाय के दूध से बनने वाला घी अपनी शुद्धता, सुगंध, स्वाद और पौष्टिकता के लिए जाना जाता है. इसके अलावा, यह नस्ल की गाय काफी कीमती होती है और इनकी देखरेख भी उच्च स्तर पर करनी पड़ती है, जिसकी कीमत लाखों रुपये तक होती है.
उन्होंने बताया कि 1 किलोग्राम घी बनाने के लिए लगभग 30 से 35 लीटर दूध की आवश्यकता पड़ती है, जिससे इसकी लागत भी बढ़ जाती है और फिर इनको बिनोला विधि से मिट्टी की हांडी में तैयार किया जाता है. शायद यही कारण है कि यह 2500 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से बेची जाती है.