पैसेवाले और दूसरों पर ज्ञान झाडने वाले मौके पर कैसे बेईमान बनते है, ये घटना आपको हैरान कर देगी

तिरुवनंतपुरम: केरल विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर लैटिन अमेरिकन स्टडीज को अपनी वित्तीय इतिहास की सबसे महंगी ‘टाइपो’ की कीमत चुकानी पड़ रही है। साल 2023 में ब्राजील के एक पत्रकार को चार ऑनलाइन लेक्चर देने पर भुगतान करते समय बैंक स्तर पर हुई एक छोटी-सी गलती ने विश्वविद्यालय को करीब 16.5 लाख रुपये का नुकसान पहुंचा दिया। विश्वविद्यालय की ओर से दिए जाने वाले 20 हजार रुपये के मानदेय को स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की तेजस्विनी शाखा, टेक्नोपार्क (तिरुवनंतपुरम) के एक बैंक कर्मचारी ने गलती से डॉलर में दर्ज कर दिया। ‘₹’ की जगह ‘$’ लिखे जाने के कारण 20,000 रुपये की बजाय 20,000 डॉलर संबंधित खाते में ट्रांसफर हो गए। इस एक गलती से केरल विश्वविद्यालय के खाते से करीब 16.5 लाख रुपये अतिरिक्त निकल गए।

लेक्चरर ने दिया था पैसे लौटाने का आश्वासन
यह राशि ब्राजील स्थित अतिथि लेक्चरर मिलान सिमे मार्टिनिक की पत्नी कैथलीन मार्टिनिक के नाम पर नामित खाते में भेजी गई थी। विश्वविद्यालय अधिकारियों के अनुसार, यह भुगतान 15 जून 2023 को किया गया था। जब बाद में इस त्रुटि का पता चला, तो सेंटर फॉर लैटिन अमेरिकन स्टडीज ने वर्ष 2024 में इसकी सूचना विश्वविद्यालय प्रशासन को दी। केंद्र के प्रमुख गिरीश कुमार ने बताया कि विश्वविद्यालय की ओर से अतिथि लेक्चरर से संपर्क किया गया था। उन्होंने अतिरिक्त राशि वापस करने का आश्वासन भी दिया था और दावा किया कि पैसा विश्वविद्यालय के खाते में लौटा दिया गया है, लेकिन वास्तव में वह राशि कभी वापस नहीं पहुंची।

मामला और जटिल हुआ
ये मामला तब और जटिल हो गया जब कुछ ही महीनों बाद मिलान सिमे मार्टिनिक का निधन हो गया, जिससे अतिरिक्त भेजी गई रकम की वसूली की संभावनाएं लगभग खत्म हो गईं। यह पैसा एक छात्र विनिमय कार्यक्रम के लिए राज्य सरकार द्वारा सेंटर को दिए गए 20 लाख रुपये में से था। विश्वविद्यालय ने अब इस पूरे मामले को बैंकिंग लोकपाल के समक्ष उठाया है, लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं निकल पाया है। एसबीआई ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए विश्वविद्यालय से अनुरोध किया है कि वह राशि प्राप्त करने वाले पक्ष से पैसे वापस दिलाने में सहयोग करे।