World Unique Tradition: दुनिया में कई जनजातियां अपनी अजीब और रहस्यमयी परंपराओं के लिए जानी जाती हैं. पापुआ न्यू गिनी की पहाड़ियों में रहने वाली साम्बिया जनजाति (Sambia Tribe) भी इन्हीं में से एक है. इस जनजाति की मान्यता और परंपरा को जानकर आप हैरान रह जाएंगे, क्योंकि यहां बचपन से लड़कों को मर्द बनाने के लिए एक बेहद अलग रीति निभाई जाती है- सीमन पीने की परंपरा.
साम्बिया जनजाति कहां रहती है?
साम्बिया लोग पापुआ न्यू गिनी के ईस्टर्न हाईलैंड प्रोविन्स के पहाड़ी इलाकों में रहते हैं. ये लोग शिकार करने और खेती-बाड़ी करने वाले समुदाय हैं. अमेरिकी मानवविज्ञानी गिल्बर्ट हर्ड्ट (Gilbert Herdt) ने इस जनजाति की गहराई से रिसर्च की है और इनके जीवन और यौन-संस्कृति का विस्तार से वर्णन किया है.
लड़कों को क्यों अलग कर दिया जाता है?
साम्बिया संस्कृति में यह विश्वास है कि महिलाएं पुरुषों के लिए खतरनाक हो सकती हैं. इस कारण जब लड़के सात साल के होते हैं, तो उन्हें उनकी मां और सभी स्त्रियों से अलग कर दिया जाता है. इस उम्र के बाद उनकी असली दीक्षा प्रक्रिया शुरू होती है.
सीमन पीने की परंपरा क्यों है?
साम्बिया मानते हैं कि मर्द बनने और योद्धा बनने के लिए लड़कों को एक विशेष शक्ति चाहिए जिसे वे जुरुंगडु कहते हैं. उनका विश्वास है कि यह शक्ति केवल वीर्य में होती है. इसलिए छोटे लड़के, बड़े पुरुषों का वीर्य पीते हैं.
प्रक्रिया कैसे होती है?
शुरुआती वर्षों में छोटे लड़के सिर्फ वीर्य ग्रहण करते हैं. जैसे-जैसे वे बड़े होते जाते हैं, भूमिका बदलती जाती है. पहले वे ग्राही होते हैं, बाद में स्वयं दाता बन जाते हैं यानी छोटे लड़कों के लिए वीर्य प्रदान करते हैं. यह प्रक्रिया तब तक चलती है जब तक वे पूरी तरह वयस्क नहीं हो जाते.
क्या यह पुरुषत्व की यात्रा है?
साम्बिया की नजर में यह कोई अपराध या गलत काम नहीं है. बल्कि यह मर्द बनने की अनिवार्य यात्रा है. उनकी मान्यता है कि वीर्य पीने से लड़कों के शरीर में ताकत आती है, वे बहादुर और शक्तिशाली योद्धा बनते हैं. दीक्षा पूरी होने के बाद ही वे शादी कर सकते हैं और महिलाओं से संबंध बना सकते हैं. उस समय से वे केवल विषमलैंगिक जीवन जीते हैं.
क्या साम्बिया समलैंगिक थे?
दिलचस्प बात यह है कि साम्बिया जनजाति समलैंगिकता और विषमलैंगिकता को अलग नहीं मानती थी. उनके अनुसार यह केवल जीवन यात्रा के पड़ाव थे. बचपन में समलैंगिक संबंध जरूरी थे, लेकिन बड़े होकर पुरुष स्त्रियों से विवाह करते और परिवार बसाते थे.