1 करोड़ लोगों ने छोड़ा इस्लाम! ईरान में आंदोलन की गूंज भारत तक

नई दिल्ली। ईरान में मौजूदा सरकार के विरुद्ध आंदोलन से देश में ‘Ex-Muslim’ मुहिम को भी हवा मिल रही है। ईरान और भारत के हालात में एक्स-मुस्लिम समानाताएं देख रहे हैं। महंगाई के विरुद्ध जारी ईरान में आंदोलन इस्लाम के खिलाफ तक पहुंच चुका है, जिसे ‘बाहरी’ बताते हुए वहां के मुस्लिम लोग खुद की सांस्कृतिक पहचान को मूल पारसी धर्म से जोड़ने लगे हैं।

यहां यह पहचान सनातन धर्म के रूप में है। हालांकि, ईरान में जहां इस्लाम के प्रति अनिच्छा खुलकर व्यक्त की जा रही है। वहीं, भारत में यह विमर्श अब भी इंटरनेट मीडिया ( एक्स पूर्व में ट्विटर, यूट्यूब, फेसबुक, वाॅट्सऐप जैसे) के माध्यम से अधिक बढ़ रहा है। यहां खुलकर सामने आने पर परिवार और सांप्रदायिक प्रतिक्रिया का डर बना हुआ है। पर कुछ एक्स मुस्लिमों में हिम्मत बढ़ी है, जो खुलकर मंच पर आने लगे हैं।

एक करोड़ से अधिक एक्स मुस्लिम होने का दावा हाल ही में रामलीला मैदान में आयोजित आर्य समाज के एक कार्यक्रम में दिल्ली के एक्स मुस्लिम इमरोज आलम ने मंच साझा कर अपना नाम राजन चौधरी रखने की घोषणा की। उन जैसे कई अन्य एक्स- मुस्लिमों का दावा है कि देशभर में हाल के वर्षों में उनकी संख्या एक करोड़ से अधिक हो गई है,। हालांकि, इसका कोई ठोस साक्ष्य नहीं है। फिर भी मामले से जुड़े लोग बड़ी उम्मीद से कहते हैं कि देश में 25 वर्ष पूर्व केरल से शुरू यह मुहिम जोर पकड़ते हुए अब उत्तर भारत तक पहुंच चुका है। उनका दायरा बढ़ता जा रहा है। लोग खुद या परिवार सहित मुस्लिम धर्म छोड़ रहे हैं।

पंजाब के चंडीगढ़ के एक्स मुस्लिम जावेद इकबाल, कुछ माह पहले ही हिंदू धर्म अपनाते हुए अपना नाम जीतेंद्र गौड़ रख लिया है। उन्होंने अपनी पत्नी तथा दो किशोर बच्चों के साथ हिंदू धर्म ग्रहण किया है। वह कहते हैं कि हमारे पूर्वजों ने जिस भी दबाव में दूसरे धर्म को अपनाया हो, लेकिन हमारी जड़ें तो वहीं है। 25 साल पहले केरल से शुरू हुई थी मुहिम इसके पहले उन्होंने कुछ वर्ष तक दोनों धर्म के अंतर में जानकारी जुटाई और कट्टरता, महिलाओं की दयनीय स्थिति, रूढ़िवादिता, ठहराव होने तथा सवाल पूछने की मनाही जैसे मामलों को देखते हुए हिंदू धर्म को बेहतर माना। ऐसा करने पर उन्हें काफी कठिनाई आई।

देवबंद की उनकी पत्नी को समझाने में काफी प्रयास करना पड़ा, जबकि, 16 वर्ष की बेटी तथा 11 वर्षीय बेटे ने सहजता से स्वीकार कर लिया। केरल में एक्स मुस्लिम मुहिम से जुड़े बेयान इब्राहिम कहते हैं कि ईरान और भारत में मुस्लिमों की स्थिति में काफी समानता है। दोनों जगह इस्लामिक रूढ़िवादिता का विरोध हो रहा है। मोदी सरकार आने के बाद से एक्स मुस्लिम को थोड़ा सकारात्मक माहौल मिला है। उनके खिलाफ हमले और फतवे नहीं हो रहे हैं, लेकिन अभी भी एक्स मुस्लिम के लिए कानूनी व्यवस्था की आवश्यकता है। मूल रूप से सरकारी नियंत्रण शिक्षा व्यवस्था की आवश्यकता है। उन्होंने अपनों बच्चों को मदरसे की जगह आधुनिक शिक्षा दी।

इस बदलाव में विहिप व आर्य समाज जैसे संगठन सहयोगी भी भूमिका में हैं। जावेद इकबाल ने आर्य समाज मंदिर में परिवार सहित सनातन धर्म ग्रहण किया था। घर, विवाह में दिक्कतें सनातन अपनाने पर दिक्कतें कम नहीं है। इमरोज आलम कहते हैं कि कई हिंदू मकान मालिक उनके पूर्व में मुस्लिम होने के चलते घर देने पर हिचकिचाते है। आगे बच्चों के विवाह की चिंता बनी हुई है। अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जीतेन्द्रानंद स्वामी कहते हैं कि यह समस्या दूर होगी। जैसे-जैसे उनकी संख्या बढ़ेगी। आपस में विवाह का रास्ता खुलेगा। वैसे, भी विवाह में आर्थिक पक्ष अधिक काम करता है।