Pakistan Zareena Baloch the woman Suicide Bomber in Balochistan: पाकिस्तान में आतंक की लहर अब उसकी सेना पर आसमानी बिजली की तरह गिर रही है. खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में लगातार उसके सैनिकों की मौत हो रही है. बलूचिस्तान के नोकुंडी स्थित फ्रंटियर कॉर्प्स (FC) मुख्यालय पर हुए ताजा हमले ने पाकिस्तान की सुरक्षा प्रणाली को और भी गंभीर रूप से प्रभावित किया है. इस हमले की जिम्मेदारी बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (BLF) ने लेते हुए एक महिला आत्मघाती हमलावर की तस्वीर सार्वजनिक की है.
संगठन के अनुसार, हमलावर का नाम जरीना रफीक (Zareena Rafiq), जो अपने गिरोह में तारंग माहो (Taranag Maho) के नाम से जानी जाती थी. उसने मुख्य प्रवेश द्वार पर खुद को विस्फोट से उड़ा लिया. जिस परिसर को निशाना बनाया गया, वह चीन समर्थित तांबा और सोना खनन परियोजनाओं सैंदक और रेको डिक का केंद्रीय संचालन स्थल माना जाता है. इस हमले में छह पाकिस्तानी जवानों की मौत होने की संभावना व्यक्त की गई है. हालांकि पाकिस्तान की ओर से अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है.
हमले के शुरुआती कुछ घंटों तक किसी भी गुट ने जिम्मेदारी नहीं ली थी. बाद में टेलीग्राम पर जारी बयान में BLF के प्रवक्ता ग्वाहरम बलूच ने कहा कि यह हमला संगठन की आत्मघाती विंग सद्दो ऑपरेशन बटालियन (SOB) द्वारा अंजाम दिया गया. यह यूनिट शहीद कमांडर वाजा सद्दो उर्फ सदाथ मारी के नाम पर स्थापित की गई है. इसी बीच, एक अन्य बड़ा विद्रोही गुट बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने भी बयान जारी कर पुष्टि की कि उसने 28-29 नवंबर को कई स्थानों पर हमले किए हैं. नोकुंडी में चल रही मुठभेड़ और हालिया हमलों के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है और सुरक्षा चौकसी और कड़ी कर दी गई है.
फिदायीन ऑपरेशन BLF की विशेष यूनिट ने किया
BLF की ओर से कहा गया कि निशाना उस केंद्रीय परिसर को बनाया गया, जिसका उपयोग रेको डिक और सैंडक खनन परियोजनाओं पर काम करने वाले विदेशी विशेषज्ञ करते हैं. BLF द्वारा जारी तस्वीर में जरीना रफीक को हमले से पहले दिखाया गया है और संगठन ने स्पष्ट किया कि उसने FC मुख्यालय के बाहर मुख्य गेट पर खुद को उड़ा लिया. जारी तस्वीर में दिखाई देता है कि उसके जैकेट में तीन बम लगाए गए थे. विस्फोट के बाद क्षेत्र में लंबे समय तक भारी गोलीबारी चलती रही, जिससे पूरा नोकुंडी इलाका दहशत में आ गया. सुरक्षा एजेंसियां अब तक इस हमले में हुए नुकसान और हताहतों के बारे में आधिकारिक बयान जारी नहीं कर पाई हैं.
विदेशी हितों को बनाया निशाना
यह हमला चागई जिले में हुआ है, यह वही इलाका है जहां रेको डिक स्थित है, जो दुनिया के सबसे बड़े अप्रयुक्त तांबा और सोने के भंडारों में गिना जाता है. यह परियोजना पाकिस्तान की खनन और विदेशी निवेश योजनाओं में अहम स्थान रखती है. इस जगह पर हमला करना BLF की रणनीति में महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है, क्योंकि अब तक आत्मघाती हमलों की नीति विशेष रूप से बलोच लिबरेशन आर्मी (BLA) की मजीद ब्रिगेड तक सीमित थी. मजीद ब्रिगेड हाल में जाफर एक्सप्रेस अपहरण समेत कई बड़े हमले कर चुकी है. विश्वसनीय सूत्रों का मानना है कि यह हमला उन साइटों पर केंद्रित था, जिनका संचालन चीनी कंपनियों और एक कनाडाई फर्म द्वारा किया जाता है. इससे संकेत मिलता है कि बलोच उग्रवादी अब रणनीतिक और भू-राजनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स पर सीधे चोट कर रहे हैं.
अमेरिका की भी हो रही एंट्री
इस इलाके में अब अमेरिका की भी एंट्री हो रही है. कुछ दिनों पहले पाकिस्तान के पीएम और आर्मी चीफ एक सूटकेस लेकर डोनाल्ड ट्रंप के पास खड़े देखे गए थे. जिसके बाद पिछले महीने नोवा मिनरल्स के अमेरिकी सीईओ ने पाकिस्तान की मिनरल एक्सप्लोरेशन कंपनी, हिमालयन अर्थ एक्सप्लोरेशन के साथ क्रिटिकल मिनरल्स को लेकर एक समझौता ज्ञापन पर साइन किया है. उन्होंने कहा कि इस प्रोजेक्ट में लगभग सौ मिलियन डॉलर के निवेश की जरूरत होगी. पाकिस्तान और अमेरिका के बीच इस एमओयू पहले एंटीमनी पर केंद्रित होगी, जिसकी अमेरिका में भारी आवश्यकता है. इसके बाद सहयोग का विस्तार सोना, रेयर अर्थ और अन्य क्रिटिकल एलिमेंट्स के प्रोजेक्ट्स तक किया जाएगा. ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि पाकिस्तान इस पर कैसे एक्ट करता है.
बलूच महिलाओं की बढ़ती भागीदारी वजह क्या है?
वहीं इस घटना में महिला की संलिप्तता ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि बलूच महिलाएं ऐसे जोखिम भरे हमलों में क्यों उतर रही हैं? स्थानीय मानवाधिकार समूहों और राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इसे केवल हताशा, आत्मघाती प्रवृत्ति या आर्थिक मजबूरी की तरह नहीं देखा जाना चाहिए. उनका मानना है कि कई बलूच महिलाएं वर्षों से अपने लापता परिजनों खासतौर पर भाइयों और बहनों के लिए संघर्ष कर रही हैं. लगातार शिकायतों के बावजूद न्याय न मिलने की भावना उन्हें चरम कदम उठाने की ओर धकेल रही है. कई परिवार लंबे समय से जबरन गायब किए जाने, गुमशुदगी और मानवाधिकार उल्लंघनों के आरोपों पर आवाज उठा रहे हैं और यही दबाव युवाओं में, विशेषकर महिलाओं में उग्र प्रतिक्रिया को जन्म देता दिख रहा है. 2025 की पहली छमाही में बलोच यकजेहती समिति की रिपोर्ट के अनुसार 752 लोग जबरन गायब हुए, जिनमें से 181 लौटे और 25 की हिरासत में मौत हुई, जबकि 546 अब भी लापता हैं. रिपोर्ट में 117 न्यायेतर हत्याओं का उल्लेख है, जिनमें ज्यादातर फर्जी मुठभेड़ों और हिरासत में हुई मौतों से जुड़ी हैं.
24 घंटे में बलूचिस्तान में हमलों की बौछार
पिछले एक दिन में बलूचिस्तान के कई हिस्सों में हमलों में तेज़ी देखी गई है. IED ब्लास्ट, घात लगाकर किए गए हमले और सुरक्षाबलों की चौकियों पर हमलों के जरिए अलगाववादी गुटों ने सुरक्षा बलों को कई स्थानों पर निशाना बनाया है. बीएलए ने कहा कि दो दिनों के भीतर किए गए 29 हमलों में 27 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए हैं. समूह ने यह भी दावा किया कि उसके लड़ाकों ने एक मोटरवे पर नियंत्रण स्थापित कर लिया है और पाकिस्तानी बलों के हथियार भी कब्जे में ले लिए हैं.
ग्वादर के पासनी क्षेत्र में BLA ने कोस्ट गार्ड कैंप पर ग्रेनेड लॉन्चर से हमला किया. इसके अलावा, संगठन ने दावा किया कि ग्वादर के ही जिवानी इलाके में उसने मिलिट्री इंटेलिजेंस के अधिकारियों को रिमोट-कंट्रोल IED से निशाना बनाया. वहीं मस्तंग शहर में पाकिस्तानी सेना के एक मेजर के घर को भी निशाना बनाया गया. राजधानी क्वेटा में सेना से जुड़े ठिकानों पर कुल छह धमाकों की सूचना है. हालिया दिनों में सुरक्षा कारणों से कई क्षेत्रों में इंटरनेट सेवाएं बंद की गईं, रास्ते और शहरों को सील किया गया, लेकिन इन कदमों का हमलों पर सीमित ही असर पड़ा.