नई दिल्ली: चांदी की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। इस बीच चीन की नई स्ट्रेटेजी भारत समेत कई देशों के लिए आने वाले समय में एक बड़ी चुनौती बनने वाली है। ड्रैगन अब दुनिया भर में चांदी की सप्लाई पर अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है। इससे भारत की निर्भरता लगातार बढ़ रही है। भारत अपनी कुल चांदी आयात का 40 फीसदी से ज्यादा चीन से लेता है। 2019 में यह आंकड़ा लगभग एक-तिहाई और एक दशक पहले करीब एक-चौथाई था। यह स्थिति इसलिए चिंताजनक है क्योंकि डिफेंस से लेकर नई तकनीकों तक में चांदी का इस्तेमाल बहुत ज्यादा होता है। कोरोना महामारी के बाद से यह निर्भरता और बढ़ी है। इससे पता चलता है कि यह सिर्फ सप्लाई चेन की टेम्पररी समस्या नहीं है। अलबत्ता, एक तरह की निर्भरता बन चुकी है।
2013 से 2019 के बीच भारत के चांदी आयात में चीन की हिस्सेदारी लगभग 34–35% थी। 2020–21 में जब महामारी के कारण सप्लाई चेन में दिक्कतें आईं तो यह निर्भरता 44% से ऊपर चली गई। तब से इसी ऊंचे स्तर पर बनी हुई है। 2025 में यह हिस्सा बढ़कर 42.2% होने का अनुमान है। यह दिखाता है कि चांदी के बढ़ते आर्थिक महत्व के बावजूद भारत अभी तक चीन का कोई दूसरा विकल्प नहीं ढूंढ पाया है।
सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है समस्या
यह समस्या सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। दुनिया की कई अन्य अर्थव्यवस्थाएं भी चीन की चांदी सप्लाई पर तेजी से निर्भर होती जा रही हैं। 2024 में थाईलैंड ने अपनी 41% से अधिक चांदी चीन से आयात की। वहीं, ब्रिटेन की निर्भरता करीब 36% रही। एशिया में मलेशिया, सिंगापुर और मकाऊ जैसे देशों में भी ऐसी ही स्थिति देखने को मिल रही है। यहां तक कि स्विट्जरलैंड और तुर्की जैसे स्थापित ट्रेडिंग हब्स में भी चांदी आयात में चीन की मजबूत मौजूदगी साफ दिखती है।
चीन पर चांदी को लेकर यह निर्भरता इसलिए भी ज्यादा अहम हो गई है क्योंकि चांदी की मांग का तरीका बदला है। अब चांदी सिर्फ गहने, फोटोग्राफी या निवेश तक ही सीमित नहीं है। चांदी एक महत्वपूर्ण औद्योगिक कच्चा माल बन गई है। फोटोवोल्टिक सेल्स (सौर ऊर्जा बनाने वाले पैनल) में इसके इस्तेमाल में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। जहां दशक की शुरुआत में सौर निर्माण से जुड़ी ग्लोबल डिमांड 10% से भी कम थी, वहीं 2025 तक यह बढ़कर करीब 17% हो जाने का अनुमान है। इसके अलावा, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स में चांदी का इस्तेमाल कुल मांग का लगभग एक-चौथाई हिस्सा बनाए हुए है। इसका मतलब है कि चीन अपनी सप्लाई पर कंट्रोल करके इन महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर असर डाल सकता है। यह ठीक वैसे ही है जैसे चिप की सप्लाई घटने से ऑटो सेक्टर के लिए मुश्किलें बढ़ गई थीं।
भारत की कई इंडस्ट्रीज पर पड़ सकता है असर
चांदी का इस्तेमाल अब सिर्फ पारंपरिक कामों तक सीमित नहीं रहा। यह आधुनिक तकनीक का एक अहम हिस्सा बन गई है। उदाहरण के लिए सौर ऊर्जा पैनलों में चांदी का उपयोग बहुत बढ़ गया है। ये पैनल सूरज की रोशनी को बिजली में बदलते हैं। पहले इनकी मांग कम थी। लेकिन, अब यह तेजी से बढ़ी है। इसी तरह, मोबाइल फोन, कंप्यूटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में भी चांदी का खूब इस्तेमाल होता है। इन क्षेत्रों में चांदी की सप्लाई पर चीन का नियंत्रण भारत जैसे देशों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है।