देश में ‘काल’ बनकर नाच रही गर्मी; एक दिन में 3400, पांच दिन में 30 हजार जान जाने का खतरा!

India extreme heatwave 3400 deaths in a day: भयानक गर्मी के चलते क्या एक ही दिन में 3,400 मौतें हो सकती हैं. अगर हां तो ये एक बड़ी समस्या है जो कोराना महामारी से भी ज्यादा खतरनाक हो सकती है. हाल ही में भीषण गर्मी के चलते देश में सामने आए मौत के कुछ मामलों को कंपाइल किया गया तो मरने वालों का आंकड़ा देखकर लोगों के होश उड़ गए. वैसे भी भारत ऐसी बड़ी इतनी बड़ी और सघन आबादी वाले देश में हीटस्ट्रोक से होने वाली मौतों के सरकारी आंकड़े अक्सर कम ही दिखाई पड़ते हैं. गर्मी से हुई मौतों को किसी खास कैटेगिरी में दर्ज ही नहीं किया जाता. इसलिए हीट स्ट्रोक से मरने वाला की वास्तविक संख्या प्रशासन द्वारा अधिकृत आंकणे से कहीं ज्यादा हो सकता है.

एक दिन में 3,400 मौतें! भारत में भीषण गर्मी कितनी जानलेवा?
2026 की गर्मियों के इस सीजन में देश के कई हिस्सों में तापमान 46 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया है. इसके साथ ही एक्सट्रीम हीट यानी भयावाह सड़ा देने वाली गर्मी पड़ने का मुद्दा फिर से चर्चा में आ गया है. कहने का बाल साल दर साल गर्मी की तीव्रता बढती जा रही है.

ऐसा होना सामान्य घटनाक्रम नहीं माना जा सकता. भीषण गर्मी कितनी गंभीर चिंता का विषय है, ये बात एक नई स्टडी से आए नतीजों से पता चली है. रिसर्चर्स ने देश के 10 शहरों पर हो चुकी पुरानी स्टडी के आंकड़ों का उपयोग करते हुए देश के सभी जिलों में हालात कितने खराब हो चुके हैं, इसका विश्लेषण किया है.

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स्टडी रिपोर्ट के मुताबिक, देशभर में केवल एक दिन की अत्यधिक गर्मी करीब 3,400 अतिरिक्त मौतों का कारण बन सकती है. वहीं, लगातार पांच दिन चलने वाली हीटवेव करीब 30,000 लोगों की जान ले सकती है. अगर 2026 में अब तक दर्ज हुई भीषण गर्मी की घटनाओं को इस संदर्भ में देखें, तो यह आंकड़ा बेहद चिंताजनक प्रतीत होता है.

भीषण गर्मी से जूझता भारत
भारत लंबे समय से भीषण गर्मी का सामना करता रहा है. बीते कुछ सालों में हीटवेव की अवधि और तीव्रता दोनों बढ़ी है. 2024 में राजस्थान के कुछ हिस्सों में तापमान 50.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा था. दिल्ली ने बीते कुछ सालों में सबसे गर्म रातों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है.2026 में भी दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान समेत उत्तर, मध्य और पश्चिम भारत के कई राज्यों में गंभीर हीट अलर्ट जारी किए गए हैं.

इस वर्ष एक और बड़ी समस्या सामने आई है-गर्म रातें. पहले रात के समय लोगों को गर्मी से कुछ राहत मिल जाती थी, लेकिन अब शहरी क्षेत्रों में कंक्रीट और इमारतों के कारण सूरज ढ़लने के बाद भी वातावरण किसी गैस चेंबर या भट्टी की तरह रात में 10 बजे तक गर्म बना रहता है.

इसका असर भारत के करोड़ों लोगों पर पड़ा है. खासकर किसान, टिर्री यानी ई-रिक्शा चलाने वाले ड्राइवर, भवन निर्माण में लगे मजदूरों, रेहड़ी-पटरी लगाने वाले कामगार और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं. क्योंकि वो लंबे समय तक 45 डिग्री वाली धूप में रहते हैं इसलिए बढ़ते तापमान के प्रति अधिक संवेदनशील हो चुके हैं.

इस स्टडी के नतीजे और भी ज्यादा चिंताजनक इसलिए हैं, क्योंकि गर्मी से जुड़ी कई मौतों को हीटस्ट्रोक नहीं माना जाता है. कमजोर और गरीब तबके में ऐसी मौतें अक्सर हार्ट अटैक, सांस संबंधी बीमारियों या अन्य कारणों में दर्ज कर दी जाती हैं.

कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी, बर्कले के रिसर्चर पियूष नारंग और अशोक गाडगिल की स्टडी ने इस कमी को दूर करने की कोशिश की है. इस स्टडी को करने वाले रिसर्चर्स का मानना है कि उनके अनुमान न्यूनतम अनुमान (Lower-Bound Estimates) हैं. यानी भीषण गर्मी का वास्तविक प्रभाव इससे अधिक हो सकता है, खासकर ग्रामीण इलाकों में, जहां लोगों के पास गर्मी और तेज धूप से बचाव के साधन कम होते हैं.

यूपी में स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक
यूपी देश में सबसे बड़ी आबादी वाला राज्य है. यहां हीटस्ट्रोक के प्रभावित लोगों की संख्या राज्यवार आंकड़ों में ज्यादा हो सकती है. स्टडी में यूपी सबसे अधिक प्रभावित राज्यों में सामने आया है. अनुमान है कि पांच दिन की हीटवेव के दौरान यहां 8,000 से अधिक अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं. अहमदाबाद, जयपुर और सूरत जैसे शहरों के कुछ जिलों में एक ही दिन की अत्यधिक गर्मी के दौरान 250 से अधिक अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं.

जान बचाना जरूरी!
एक्सपर्ट्स का मानना है कि जैसे-जैसे पृथ्वी का तापमान बढ़ेगा, हीटवेव की दिक्कतें और घातक हो आएंगी. ऐसे में लोगों की जान बचाने के लिए अब बेहतर अलर्ट सिस्टम लागू करने के साथ, गर्मी के दौरान मजबूत स्वास्थ्य सेवाएं और हाई रिस्क वाले क्षेत्रों के लिए विशेष सहायता योजनाएं चलाने की जरूरत बताई गई है. ये स्टडी इस बात पर जोर देती है कि भयानक गर्मी अब केवल असुविधा या सामान्य परेशानी का विषय नहीं, बल्कि तेजी से उभरता हुआ सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बन चुकी है, जिस पर 2027 की गर्मियां आने से पहले गंभीरता से ध्यान देना जरूरी है.