Iran Protest: ईरान में अशांति बढ़ती जा रही है और लगातार सातवें दिन भी कट्टरपंथी शासन के खिलाफ जनता सड़कों पर है जिसने विद्रोह के हालात पैदा कर दिये हैं. देश के 50 से अधिक शहरों तक विरोध की आंच पहुंच गई हैं. प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़प भी हुई है. बीते 2 दिनों में 8 लोगों की मौत हो चुकी है और दर्जनों लोग घायल हैं.
शहर-शहर लोग सड़कों पर उतर रहे हैं. हमादान के असदाबाद में प्रदर्शनकारी अवाम ने खामेनेई की फौज ईरानी रिवॉल्यूशनरी गार्ड कोर यानी आईआरजीसी की बेस पर कब्जे का दावा किया है. विरोध के पीछे कारण ईरानी अर्थव्यवस्था की बुरी हालत है. कई प्रदर्शनकारियों को देश के सुप्रीम लीडर, अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ नारे लगाते सुना गया, जबकि कुछ ने राजशाही बहाल करने की मांग की.
ईरान के क्राउन प्रिंस ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का धन्यवाद करते हुए कहा कि उनके “मजबूत नेतृत्व और समर्थन” से ईरान में सरकार-विरोधी प्रदर्शनकारियों का हौसला बढ़ा है. खुद को 46 साल से जारी शासन को खत्म करना चाहने वाले प्रदर्शनकारियों का संदेशवाहक बताते हुए क्राउन प्रिंस ने कहा कि उनके पास ईरान में “स्थिर संक्रमण” की स्पष्ट योजना है. उन्होंने क्षेत्र में शांति और समृद्धि बहाल करने के लिए अमेरिका के साथ रिश्ते दोबारा मजबूत करने की भी वकालत की.
कनाडा ने ईरान के लिए अपनी ट्रैवल एडवाइजरी अपडेट की है जिसमें नागरिकों को “सभी तरह की यात्रा से बचने” को कहा गया है. इसमें ईरान में बढ़ती महंगाई व आर्थिक कठिनाइयों के खिलाफ जारी प्रदर्शनों का जिक्र किया गया है. एडवाइजरी में कहा गया है कि ईरान में मौजूद कनाडाई नागरिकों पर ईरानी अधिकारियों की कड़ी निगरानी और पूछताछ हो सकती है. सलाह में यह भी कहा गया है कि लोग लो-प्रोफाइल रहें और अजनबियों के साथ अपनी निजी जानकारी साझा न करें.
ईरान ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव और सुरक्षा परिषद के सदस्यों को पत्र लिखकर देश में जारी विरोध-प्रदर्शनों को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पोस्ट पर आपत्ति जताई है. एक्सियोस के पत्रकार बराक राविड के मुताबिक, पत्र में तेहरान ने कहा है कि यदि अमेरिका हमला करता है तो ईरान “निर्णायक और अनुपातिक आत्मरक्षा” में जवाबी कार्रवाई करेगा.
ईरान ने प्रदर्शनों को लेकर डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों पर संयुक्त राष्ट्र से हस्तक्षेप की मांग की है. संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत आमिर सईद इरावानी ने महासचिव और यूएन सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष को पत्र लिखकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से तेहरान के खिलाफ दी गई “अवैध धमकियों” की निंदा करने का आग्रह किया है.
ईरान में देशव्यापी विरोध प्रदर्शन और बाजार बंद सातवें दिन भी जारी हैं. अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज़ एजेंसी (HRANA) के अनुसार, अब तक कम से कम आठ प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है और दर्जनों लोगों को हिरासत में लिया गया है. अशांति की शुरुआत सोमवार को तेहरान में बाजार बंद होने से हुई थी, जो अब 22 प्रांतों के 46 शहरों के 113 स्थानों तक फैल चुकी है. HRANA के मुताबिक मशहद, जाहेदान, कजविन, हमदान और तेहरान समेत कई शहरों में प्रदर्शन हुए. इस दौरान भारी सुरक्षा तैनाती, बल प्रयोग और नई गिरफ्तारियों की खबरें सामने आई हैं.
ब्रिटेन के कंजर्वेटिव सांसद और पूर्व सुरक्षा मंत्री टॉम टुगेंधट ने कहा कि ईरान के सिस्टम में बड़े अधिकारी पहले से ही विदेशी खुफिया एजेंसियों से संपर्क कर रहे होंगे. उन्होंने X पर एक पोस्ट में कहा, “कितने वरिष्ठ शासन अधिकारी विदेशी खुफिया अफसरों से संपर्क कर रहे हैं और शासन के गिरने पर सुरक्षा के बदले रहस्य सौंप रहे हैं? नेतृत्व को शक है कि कई लोग सुरक्षित ठिकाने की तलाश में हैं, लेकिन सिर्फ शक करने से कुछ हासिल नहीं होगा,क्योंकि कई नेता खुद भी ऐसा कर रहे हैं.”
दरअसल ईरान में विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत रियाल के घटते दाम के खिलाफ हुई थी. अंतर्राष्ट्रीय बाजार में डॉलर 42 हजार रियाल को पार कर चुका है. महंगाई दर 40 प्रतिशत तक जा चुकी है.सरकार का कहना है कि इकॉनोमी की बदहाली को दुरुस्त करने के लिए राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन की कैबिनेट ने पूर्व अर्थशास्त्र मंत्री अब्दोलनासर हेम्मती को सेंट्रल बैंक का नया गवर्नर नियुक्त किया है.
ईरान के कई हिस्सों से प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच तीख झड़प की खबरें सामने आई हैं. विरोध प्रदर्शन तेज होने के साथ हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं. कुछ इलाकों में सुरक्षा बलों ने भीड़ को तितर-बितर करने की कोशिश की, जबकि प्रदर्शनकारी सरकार विरोधी नारे लगाते दिखे.
ईरान के सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव और वरिष्ठ अधिकारी अली लारिजानी ने ईरान में हो रहे प्रदर्शनों के पीछे अमेरिका और इजरायल का हाथ होने का आरोप लगाया है. अधिकारियों द्वारा विरोध प्रदर्शनों के जवाब में यह आरोप अक्सर लगाया जाता रहा है. लारिजानी ने एक्स पर लिखा, “ट्रंप को यह समझना चाहिए कि इस घरेलू मामले में अमेरिका का दखल पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर देगा और अमेरिकी हितों के विनाश का कारण बनेगा. अमेरिकी जनता को यह जानना चाहिए कि इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत ट्रंप ने ही की है और उन्हें अपने सैनिकों की सुरक्षा पर ध्यान देना चाहिए.”
ईरान की सड़कों पर सुप्रीम लीडर खामेनेई को तानाशाह बताकर मुर्दाबाद वाले नारे बुलंद हो रहे हैं. तेहरान से शुरू हुआ ये विरोध प्रदर्शन ईरान के दूसरे इलाकों में भी फैलता जा रहा है. उग्र प्रदर्शनकारी एक तो ईरान में तबाह हो रही इकॉनोमी का विरोध कर रहे हैं. दूसरे खामेनेई हुकूमत का विरोध कर रहे हैं और तीसरे ईरान से निर्वासित शाह रेजा पेहलावी का समर्थन भी कर रहे हैं.