नेपाल से छोड़े गए पानी के कारण सरयू नदी का जलस्तर 2 सेंटीमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से बढ़ रहा है। तहसील महसी के ग्राम जानकी नगर को खंडहर बनाने के बाद अब नदी की धारा नई बस्ती की ओर मुड़ गई है। शुक्रवार की रात नदी तेज कटान करते हुए 14 घरों को बहा ले गई। ग्रामीणों में दहशत है।
जलस्तर में वृद्धि शुरू होते ही नदी ने अपना रौद्र रूप धारण कर लिया। रात के समय अचानक कटान तेज़ हो गई, जिसमें आठ आवासीय और छह अनावासीय मकान नदी में समाहित हो गए। शुक्रवार रात जो ग्रामीण बेघर हुए हैं उनमें हृदय राम, सुशील, राजकरण, सुरेंद्र, कुलदीप, संदीप, भूषण, राजाराम शामिल हैं। ग्रामीणों ने बताया कि नदी अब कटान करते हुए दक्षिण और पश्चिम दिशा की ओर लगातार बढ़ रही है, साथ ही, कृषि योग्य भूमि भी नदी के अंदर समाहित होती जा रही है। नदी के मुहाने पर बसे कृष्ण कुमार, सूर्यलाल, छोटकन्ने के मकान पर लहरें थपेड़े ले रही हैं। लेकिन अभी तक बचाव के इंतजाम नहीं हुए हैं।
तहसीलदार विकास कुमार ने बताया कि कटान पीड़ित परिवारों को दैवीय आपदा राहत कोष से गृह अनुदान राशि दी जाएगी। उन्होने बताया कि हल्का लेखपाल ने अब तक 44 कटान पीड़ितों की सूची भेजी है। कार्य धीमा होने के कारण राजस्व निरीक्षक को भी लगाया गया है ताकि कटान सर्वे प्रक्रिया को तेज किया जा सके।
वन्यजीव का आतंक: हाका लगाकर ग्रामीणों ने किया रतजगा
महसी तहसील के गांवों में वन्यजीव के हमले के बाद ग्रामीणों में डर का माहौल है। शनिवार को भी हमलावर वन्यजीव का सुराग नहीं लग सका, ग्रामीण रतजगा करते हुए दहशत के साए में रात बिताने को मजबूर हैं। ग्राम बभौंरी के बदनपुरवा, सिसैया चूड़ामणि, और मोतीपुरवा गांवों में वन विभाग ने हमलावर वन्यजीव काे पकड़ने के लिए सात टीमें लगाई हैं। वन्यजीव की निगरानी के लिए पांच थर्मल कैमरे और दो ड्रोन कैमरे से वन्यजीव की निगरानी शुरू करवाई है, लेकिन 24 घंटे से ज्यादा समय बीतने के बाद भी वन्यजीव का कोई सुराग नहीं मिल सका है।
वन विभाग और पुलिस दोनों ही अलर्ट मोड में हैं, प्रभावित गांवों में लगातार सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंतित ग्रामीणों ने वन विभाग के साथ मिलकर शुक्रवार रात गश्त की, ड्रोन से जंगल के संभावित ठिकानों पर वन्यजीव को तलाश किया गया, लेकिन वन्यजीव का कोई पता नहीं चला। वन्यजीव के हमले में बृहस्पतिवार को दो महिलाओं समेत चार लोग घायल हो गए थे। इसके बाद से ग्रामीण पूरी रात जागकर डर के साए में बिता रहे हैं।
रेंजर मोहम्मद साकिब ने बताया कि वन विभाग की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं और सर्च अभियान चलाया जा रहा है। इसके साथ ही, ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा है कि वे रात में बाहर न निकलें और बच्चों को अकेले बाहर न भेजें।