बिटकॉइन में अचानक लाखों करोड़ों डूब गए, रिटर्न Gold और शेयर बाजार से कम

2025 को क्रिप्टो की जीत का साल माना जा रहा था, लेकिन आंकड़े कुछ और ही कहानी सुना रहे हैं. अमेरिकी Bitcoin ETFs से लगातार आउटफ्लो जारी है, अक्टूबर की बड़ी गिरावट के बाद बिटकॉइन दूसरे एसेट्स के मुकाबले बुरी तरह पिछड़ गया है. गोल्ड, Nasdaq, यहां तक कि T-bills भी बिटकॉइन से बेहतर रिटर्न दे रहे हैं. कई निवेशक जिनका ETF एंट्री प्राइस $90,000 के आसपास था, अब पानी में हैं. बाजार में डर साफ दिख रहा है.

इतना हल्ला क्यों मचा है? ये “ग्रेट बिटकॉइन क्रैश 2025” आखिर है क्या? 2025 में बिटकॉइन लगभग 30% गिर चुका है. यह गिरावट इसलिए बड़ी मानी जा रही है क्योंकि बिटकॉइन को हमेशा ऐसे एसेट के रूप में बताया गया था जो तेज़ बढ़ता है, महंगाई से बचाता है और दूसरे बाज़ारों से अलग चलता है. लेकिन इस साल वह हर मोर्चे पर कमजोर साबित हुआ है. गोल्ड, Nasdaq, बॉन्ड, T-bills-सब उससे बेहतर चल रहे हैं. यानी जिसकी सबसे ज्यादा शौहरत थी, वही इस साल सबसे पीछे है.

ETF से पैसा निकलना क्यों खबर बन गया है
अमेरिका के Bitcoin ETFs से लगातार पैसा निकल रहा है. ब्लूमबर्ग की चार्ट में साफ दिखता है कि 1 अक्टूबर के बाद से लगभग हर दूसरे दिन आउटफ्लो (रकम निकलाना) आया है. इसका मतलब यह है कि बड़े निवेशक बिटकॉइन पर भरोसा कम कर रहे हैं. इसकी बड़ी वजह यह है कि बिटकॉइन कई बार $90,000 के नीचे फिसला, जो ETF निवेशकों की औसत खरीद कीमत के आसपास है. यानी ज्यादातर लोग सीधे नुकसान में चले गए. नुकसान देखकर उन्होंने ETF से पैसा निकालना शुरू किया, और इससे दबाव और बढ़ गया.

मार्केट डेप्थ गिरने का क्या मतलब होता है? यह क्यों चिंता की बात है
मार्केट डेप्थ से मतलब है बाजार में कितनी खरीद और बिक्री तुरंत उपलब्ध है. अगर डेप्थ ज्यादा हो, तो कीमतें स्थिर रहती हैं. लेकिन अक्टूबर की भारी गिरावट के बाद बिटकॉइन की डेप्थ अचानक $700 मिलियन से घटकर लगभग $500 मिलियन के आसपास रह गई. इसका सीधा मतलब है कि मार्केट में लिक्विडिटी कम हो गई है. बड़े निवेशक अब बड़े ऑर्डर लगाने से डर रहे हैं. थोड़ा सा खरीद-बिक्री भी कीमत को बहुत ऊपर-नीचे कर रही है. यह बाजार को और कमजोर बनाता है.

बिटकॉइन गोल्ड, Nasdaq और बॉन्ड से भी पीछे कैसे चला गया? लोग इस साल सुरक्षित निवेश की तरफ ज्यादा झुक रहे हैं. गोल्ड 60% तक चढ़ गया है. Nasdaq भी पॉजिटिव है. T-bills, जिन्हें अक्सर बोरिंग माना जाता है, उन्होंने भी काफी अच्छा रिटर्न दिया है. यहां तक कि US Utilities Index-जो धीमी और स्थिर ग्रोथ वाला इंडेक्स है-वह भी बिटकॉइन से बेहतर निकला है. बिटकॉइन को डिजिटल गोल्ड कहा जाता था, लेकिन इस साल असली गोल्ड ने ही बाज़ी मार ली.

बिटकॉइन $90,000 के नीचे क्यों गया
इसकी सबसे बड़ी वजह 10 अक्टूबर का वह क्रैश था जिसमें लगभग $19 बिलियन का लीवरेज एक झटके में उड़ गया. इस गिरावट ने मार्केट मेकर्स का भरोसा हिला दिया. उन्होंने मार्केट में लिक्विडिटी डालना कम कर दिया. इसी दौरान एशिया से कमजोर डेटा आया, चीन की मार्केट गिरी, और Nvidia की कमाई से पहले टेक स्टॉक्स में भी कमजोरी आ गई. इन सभी ग्लोबल कारकों ने बिटकॉइन को और दबा दिया. नतीजा यह हुआ कि यह $90,000 के नीचे चला गया.

ETF निवेशक इतने परेशान क्यों हैं क्योंकि ETF में पैसा तब आया था जब बिटकॉइन की कीमत ज्यादा थी. औसतन $90,000 के आसपास. जैसे ही कीमत उससे नीचे आई, निवेशकों को लगा कि उन्होंने गलत समय पर खरीद लिया. लोगों ने ETF से पैसा निकालना शुरू किया और इससे बिटकॉइन पर और दबाव बढ़ता गया. एक तरह का चक्र बन गया-कीमत गिरी तो लोग भागे, लोग भागे तो कीमत और गिरी.

बिटकॉइन को हमेशा महंगाई से बचाने वाला, सुरक्षित, और ग्रोथ वाला एसेट बताया गया था. फिर ये सब क्यों फेल हो गया 2025 में ये तीनों दावे कमजोर पड़ गए. महंगाई बढ़ी लेकिन बिटकॉइन नहीं चला. मार्केट गिरा तो बिटकॉइन ज्यादा टूटा. मार्केट चढ़ा तो बिटकॉइन उतना नहीं चढ़ पाया. यानी यह हर उस भूमिका में फेल हुआ जिसके लिए इसे लोकप्रिय बनाया गया था. यही वजह है कि प्रोफेशनल फंड मैनेजर अब पूछने लगे हैं-इस एसेट का असली फायदा क्या है?

क्या मार्केट अब बियर फेज़ में जा रहा है इसके संकेत तेज होते जा रहे हैं. निवेशक अब $80,000 और $85,000 के आसपास गिरावट से बचने के लिए बड़े पैमाने पर पुट ऑप्शन खरीद रहे हैं. ऑप्शंस डेटा बताता है कि बिटकॉइन के इस साल अपने पुरानी रिकॉर्ड हाई $126,000 तक पहुंचने की संभावना 5% से भी कम है. इसका मतलब मार्केट फिलहाल डर के मोड में है.

क्या बिटकॉइन खत्म हो रहा है? नहीं, खत्म नहीं. ट्रंप की री-इलेक्शन के बाद भी इसकी कीमत पहले से काफी ऊपर है. क्रिप्टो का इतिहास भी यही बताता है कि हर बड़ी गिरावट के बाद बड़ी रिकवरी आती है. फर्क बस इतना है कि इस समय बाजार बहुत सावधान, रिस्क से दूर और रक्षात्मक हो गया है. इसलिए अभी तेज़ी की उम्मीद कम है, लेकिन लंबे समय में रिकवरी की संभावना बनी रहती है.