RBI Plastic Notes: नोटबंदी के बाद भारतीय करेंसी में एक बार फिर से बड़ा बदलाव होने जा रहा है. नोटबंदी में 500 और 1000 रुपये के नोट बंद कर 500 रुपये की नई और 2000 रुपये के नोट जारी किए गए थे. अब भारत की करेंसी में प्लास्टिक के नोट शामिल होने वाले हैं. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया नई प्लास्टिक बैंक नोट लॉन्च करने जा रही है. सरकार से मिली हरी झंडी के बाद रिजर्व बैंक ने 200 करोड़ प्लास्टिक नोट्स की छपाई की तैयारी कर ली है. यानी कुछ ही दिनों में आपकी जेब में कागज के बजाए प्लास्टिक के नोट्स पहुंचने वाले हैं.
ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, यूनाइटेड किंगडम समेत भारत उन 60 देशों में शामिल हो जाएगा, जहां प्लास्टिक के नोट चलन में है.केंद्र सरकार ने RBI को प्लास्टिक नोट्स छापने के लिए हरी झंडी दे दी है, जिसकी जानकारी खुद वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने संसद में दी. हालांकि इन पॉलीमर नोट्स को कब से बाजार में उतारा जाएगा, इसकी तारीखों का ऐलान नहीं हुआ है. ये पहली बार नहीं है जब प्लास्टिक नोट की बात हो रही है. साल 2012 में भी करेंसी की सेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए पॉलीमर नोट लाने का प्रस्ताव दिया गया था.
10 और 20 रुपये के नए नोट
रिजर्व बैंक पहले पॉलीमर बैंक नोट के ट्रायल करेगा. सफलता मिलने के बाद सबसे पहले 10 और 20 रुपये के नोट्स छापे जाएंगे और उन्हें बाजार में उतारा जाएगा.10 और 20 रुपये के 100-100 करोड़ नोट्स छापे जाएंगे. आरबीआई के केंद्रीय बोर्ड ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया एक्ट, 1934 की धारा 25 के तहत नए नोट का प्रस्ताव किया है. ऐसे में लोगों के मन में सवाल है कि जैसे नोटबंदी के बाद 500 और 1000 रुपये के नोट चलन से बाहर हो गए, क्या प्लास्टिक नोट आने के बाद पुराने कागज के नोट भी बंद हो जाएंगे? नए प्लास्टिक नोट में क्या खासियत होगी? कागजी नोट से ये कितना अलग होगा? RBI इन नोटों को छापने पर कितना खर्च करता है और क्यों प्लास्टिक नोट लाने का फैसला किया गया है?
प्लास्टिक नोट क्या है और इसके क्या फायदे हैं ?
RBI कागज के बजाए पॉलीमर सबस्ट्रेट पर नोटों की छपाई करेगा. जो दिखने और छूने में कागजी नोट की तरह ही होंगे, लेकिन ये ना तो गलते और ना ही फटेंगे. इसकी लाइफ कागजी नोट से लंबी होगी. पॉलीमर नोट्स की खासियत की बात करें तो…
1. प्लास्टिक नोट्स पानी, धूल और गंदगी से खराब नहीं होंगे और ना ही आसानी से फटेंगे.
2. कागजी नोट की तरह ये भी हल्के और आसानी से फोल्ड होंगे.
3. छूने में ये काजगी नोट की तरह ही होंगे.
4. पॉलीमर शीट पर एडवांस सिक्योरिटी फीचर्स लेयर्स के बीच होगा, जिसे नकल कर पाना लगभग नामुमकिन हो जाएगा. जिससे नकली नोट की समस्या पर लगाम लगाना आरबीआई के लिए आसान होगा.
5. कागजी नोट के मुकाबले इसकी लाइफ लंबी होगी. जिससे नोट छपाई पर होने वाले खर्च को कम करने में मदद मिलेगी. वित्त वर्ष 2024-25 में रिजर्व बैंक ने कागजी नोट की छपाई पर 6372 करोड़ रुपये खर्च किए.
RBI कैसे लेता है नए नोट छापने का फैसला, क्या है नोट छपाई का नियम ?
आरबीआई इस बात का आकलन करता है कि इकोनॉमी को कितनी नकदी चाहिए. नए नोट में सिक्योरिटी के कौन से फीचर एड किए जाए. नए नोट लाने या वापस लेने का प्रस्ताव रिजर्व बैंक तैयार करता है, जिसे केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद अमल में लाया जाता है. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया एक्ट, 1934 की धारा 22 के तहत RBI को नए नोट छापने का अधिकार मिलता है. धारा 25 के तहत नोट की डिजाइन, आकार, रंग आदि तय होते हैं. धारा 26(2) के तहत लीगल टेंडर की वैलिडिटी खत्म की जाती है.
भारत में कहां छापे जाते हैं नोट ?
भारत में 4 प्रेस हैं, जहां करेंसी की छपाई होती है.जिसमें से दो आरबीआई की सहायक संस्था हैं और दो केंद्र सरकार के पास है,
1. मैसूर
2. सालाबोनी
3. नासिक
4. देवास
तो क्या बंद हो जाएंगे 10-20 रुपये के कागज के नोट ?
प्लास्टिक नोट का ये मतलब बिल्कुल भी नहीं है कि कागज वाले पुराने नोट बंद हो जाएंगे. पॉलीमर नोट को ट्रायल के तौर पर लाया जा रहा है. प्लास्टिक नोट आने के बाद भी कागजी नोट पहले की तरह ही चलते रहेंगे. बाजार में पॉलीमर और पेपर दोनों ही तरह के नोट एक साथ चलेंगे. जब तक नए प्लास्टिक नोट पूरी तरह से बाजार में स्थापित नहीं हो जाते तब तक कागजी नोट का सर्कुलेशन चलता रहेगा.
कब आएंगे प्लास्टिक के नोट ?
अभी प्लास्टिक नोट को ट्रायल के तौर पर लाया जा रहा है. अभी पॉलीमर सबस्ट्रेट शीट के लिए टेंडर जारी किए गए हैं, जिसकी डेडलाइन 18 अगस्त को खत्म हो रही है. इसके बाद छपाई होगी, फिर अलग-अलग चरणों में इसे उतारा जाएगा. सरकार या आरबीआई के तरफ से इसकी लॉन्चिंग की डेड तय नहीं की गई है.
क्या ATM और नोट गिनने वाली मशीनों में कोई बदलाव करना होगा?
प्लास्टिक नोट को लाने के बाद एटीएम मशीने में बदलाव करने होंगे, हालांकि फिलहाल इसे 10 और 20 रुपये की करेंसी के साथ ट्रायल पर लॉन्च किया जा रहा है. ऐसे में फिलहाल तुरंत एटीएम मशीनों में बदलाव की जरूरत नहीं है. अगर ट्रायल सफल रहा और 100, 200, 500 रुपये वाली बड़ी करेंसी भी प्लास्टिक की बनने लगी, तो एटीएम मशीनों में बदलाव करना होगा.
क्या प्लास्टिक नोट बनाने की लागत ज्यादा है?
हां, प्लास्टिक नोट को छापना कागजी नोट के मुकाबले महंगा पड़ता है, जिसकी वजह पॉलीमर सामग्री और प्रिंटिंग तकनीक का अलग होना है. हालांकि प्लास्टिक नोट की सेल्फ लाइफ अधिक होने की वजह से इसे बार-बार छापने की जरूरत नहीं पड़ती है, जिससे रीप्रिंटिंग और डिस्ट्रीब्यूशन का खर्च बच जाता है.