कल्पना कीजिए, एक ऐसा शख्स जिसे इराक युद्ध का ‘जनक’ कहा जाता है, जिसे अरब दुनिया में ‘युद्ध अपराधी’ कहा जाता है और जिसके नाम पर ब्रिटेन में आज भी विरोध प्रदर्शन होते हैं- अब वही शख्स एक बार फिर मिडिल-ईस्ट की तकदीर तय कर सकता है। हम बात कर रहे हैं ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर की। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की योजना के मुताबिक, टोनी ब्लेयर गाजा की भविष्य की कमान संभालने को तैयार हैं।
ट्रंप के हालिया शांति प्लान में ब्लेयर को ‘पीस बोर्ड’ का प्रमुख सदस्य बनाया गया है, जो गाजा का अंतरिम प्रशासन चला सकता है। ट्रंप की गाजा योजना में टोनी ब्लेयर के शामिल होने पर कहा जा रहा है कि यह आदमी इसलिए वहां था क्योंकि शैतान कहीं और व्यस्त था। ऐसे में ये जानना जरूरी हो जाता है कि क्या ये गाजा के लिए आखिरी उम्मीद है, या एक और विवादास्पद अध्याय? टोनी ब्लेयर कौन हैं, उनकी कुख्याति क्यों है और उनको गाजा की ये जिम्मेदारी क्यों मिल रही है? आइए विस्तार से समझते हैं।
टोनी ब्लेयर: लेबर पार्टी का ‘चमकदार चेहरा’ जो युद्ध की छाया में डूब गया
टोनी ब्लेयर का जन्म 1953 में स्कॉटलैंड के एक छोटे शहर एडिनबर्ग में हुआ था। वो ब्रिटेन के लेबर पार्टी के सबसे युवा लीडर बने। वे 1997 में मात्र 43 साल की उम्र में प्रधानमंत्री बने। पहले तीन कार्यकालों में उन्होंने ब्रिटेन को आधुनिक बनाया: न्यू लेबर पॉलिसी से अर्थव्यवस्था चमकी, स्वास्थ्य और शिक्षा में सुधार हुए, और स्कॉटलैंड-उत्तरी आयरलैंड जैसे क्षेत्रों को ज्यादा अधिकार मिले। लोग उन्हें ‘पीपुल्स प्रिंस’ कहते थे – स्मार्ट सूट, चमकदार स्माइल, और टोनी-ब्लेयर-स्टाइल स्पीच से वो दुनिया को लुभाते थे।
लेकिन 2003 का इराक युद्ध सब कुछ बदल गया। अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश जूनियर के साथ मिलकर ब्लेयर ने इराक पर हमला किया। दावा था कि सद्दाम हुसैन के पास ‘मास डिस्ट्रक्शन वेपन्स’ यानी विनाश के हथियार हैं, जिससे दुनिया को खतरा है। लाखों ब्रिटिश सैनिक भेजे गए, लेकिन बाद में पता चला- ये खुफिया जानकारी झूठी थी। लाखों इराकी मारे गए, देश तबाह हो गया और ISIS जैसे संगठन पैदा हुए। ब्रिटेन में विरोध भयानक था: लाखों लोग सड़कों पर उतरे, लेबर पार्टी टूट गई, और ब्लेयर की लोकप्रियता मिट्टी में मिल गई। 2007 में उन्होंने इस्तीफा दे दिया।
आज भी, 2025 में, इराक युद्ध की छाया ब्लेयर पर है। उस वक्त टोनी के समर्थकों तक का कहना था कि “इराक युद्ध गलत था, शांति के रास्ते आजमाए बिना हमला किया गया।” अरब दुनिया में उन्हें ‘ब्लेयर द बुचर’ कहा जाता है। फिलिस्तीनियों के लिए तो वो ‘युद्ध अपराधी’ हैं, क्योंकि इराक के बाद उन्होंने मिडिल ईस्ट में कई विवादास्पद भूमिकाएं निभाईं। लेकिन ब्लेयर रुके नहीं। इस्तीफे के बाद उन्होंने टोनी ब्लेयर इंस्टीट्यूट फॉर ग्लोबल चेंज नाम का थिंक टैंक शुरू किया, जो गल्फ देशों (सऊदी अरब, UAE) को सलाह देता है। वे JPMorgan बैंक के सलाहकार बने, और करोड़ों कमा लिए। लेकिन मिडिल ईस्ट उनका जुनून रहा।
गाजा का संकट: दो साल का खूनी खेल और शांति की तलाश
अब बात गाजा की करते हैं। गाजा पट्टी- ये फिलिस्तीन का एक छोटा सा इलाका है, जहां 20 लाख से ज्यादा लोग रहते हैं। 2007 से हमास (एक इस्लामिक ग्रुप) का कंट्रोल है, और इजरायल की नाकाबंदी से ये ‘ओपन एयर प्रिजन’ बन गया। 7 अक्टूबर 2023 को हमास ने इजरायल पर हमला किया- 1,200 इजरायली मारे गए, 250 बंधक बनाए गए। जवाब में इजरायली सेना ने गाजा पर बमबारी शुरू की। दो साल बाद, 60,000 से ज्यादा फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं, लाखों बेघर, और भुखमरी फैली हुई है। संयुक्त राष्ट्र कहता है- “ये मानवीय संकट की हद है।”
ट्रंप प्रशासन ने अब एक ‘पीस प्लान’ यानी शांति योजना लॉन्च की है। इसमें तुरंत सीजफायर, सभी बंधकों की रिहाई (72 घंटों में), इजरायली सेना की धीमी वापसी, और गाजा का पुनर्निर्माण शामिल है। लेकिन असली सवाल: हमास हटेगा तो गाजा कौन चलाएगा? फिलिस्तीनी अथॉरिटी (PA) वेस्ट बैंक में कमजोर है, और अरब देश हमास को पसंद नहीं करते। यहां आता है टोनी ब्लेयर का प्लान।