France G-7 Summit: मीडिल ईस्ट में तनाव के बाद से पहली बार अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और पीएम मोदी की मुलाकात होने जा रही है। फ्रांस में होने वाले G-7 समिट में दोनों नेता शामिल होंगे। भारतीय विदेश मंत्रालय पीएम मोदी के दौरे की पुष्टि पहले ही कर चुका था। अब व्हाइट हाउस ने ट्रंप के शामिल होने की भी पुष्टि कर दी है।
दरअसल, फ्रांस में G-7 शिखर सम्मेलन 15 से 17 जून 2026 तक आयोजित किया जा रहा है। यह 52वां वार्षिक जी-7 शिखर सम्मेलन है, जो फ्रांस के दक्षिण-पूर्वी क्षेत्र हाउते-सावोई के एवियन-लेस-बैंस में हो रहा है। इस महत्वपूर्ण वैश्विक बैठक की मेजबानी फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फ्रांस के राष्ट्रपति के विशेष निमंत्रण पर आउटरीच पार्टनर के रूप में हिस्सा ले रहे हैं। साथ ही अब इस कार्यक्रम में ट्रंप के आने की भी पुष्टि हो गई है।
1 साल पहले मिले थे ट्रंप-मोदी
पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आखिरी मुलाकात 13 फरवरी 2025 को वाशिंगटन डीसी में व्हाइट हाउस में हुई थी। ट्रंप के दोबारा अमेरिका के राष्ट्रपति बनने के बाद, द्विपक्षीय संबंधों और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए पीएम मोदी ने यह अमेरिका यात्रा की थी।
मिडिल ईस्ट हालात पर हो सकती है चर्चा
इन दिनों मिडिल ईस्ट में बने हालात बेहद नाजुक है। इसी बीच ट्रंप और मोदी की मुलाकत से कयास लगाए जा रहे हैं कि मिडिल ईस्ट के हालात पर चर्चा हो सकती है। इसमें मुख्य रूप से कच्चे तेल की सप्लाई, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव और समुद्री सुरक्षा पर चर्चा हो सकती है। मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष का असर वैश्विक तेल बाजारों और आपूर्ति पर पड़ा है। भारत अपनी तेल जरूरतों के लिए इस क्षेत्र पर काफी निर्भर है, इसलिए दोनों नेता तेल की कीमतों को स्थिर रखने और बाधित आपूर्ति को बहाल करने पर विचार साझा हो सकते हैं।
9 जून को पीएम मोदी के जाने की हुई थी पुष्टि
भारतीय विदेश मंत्रालय ने फ्रांस के एवियन (Évian) में आयोजित G-7 शिखर सम्मेलन में पीएम नरेंद्र मोदी की भागीदारी की आधिकारिक पुष्टि 9 जून 2026 को की थी। उन्हें फ्रांस द्वारा एक भागीदार देश के रूप में विशेष आमंत्रित अतिथि के रूप में बुलाया गया था। 13 जून को ट्रंप के आने की भी पुष्टि हो गई है।
G-7 का सदस्य नहीं फिर क्यों शामिल हो रहा भारत
बता दें कि भारत G-7 (ग्रुप ऑफ सेवन) का औपचारिक सदस्य नहीं है, फिर भी उसे हर साल इसके शिखर सम्मेलनों में एक विशेष अतिथि (गेस्ट कंट्री) के तौर पर आमंत्रित किया जाता है। इसकी मुख्य वजहों में भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत, विशाल बाजार, तकनीकी नेतृत्व और भू-राजनीतिक रणनीतिक महत्व शामिल हैं। इस बार भी फ्रांस ने भारत को एक ‘पार्टनर कंट्री’ (सहयोगी देश) के रूप में आमंत्रित किया गया है।
G-7 में कौन कौन से देश करेंगे शिरकत
G-7 में सात प्रमुख उन्नत अर्थव्यवस्था वाले देश कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, यूरोपीय संघ (EU) भी इस समूह का एक गैर-सूचीबद्ध सदस्य है और सभी बैठकों में प्रतिनिधित्व करता है। आगामी फ्रांस G-7 शिखर सम्मेलन में आमंत्रित देशों में भारत, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील और दक्षिण कोरिया जैसे प्रमुख देश शामिल हैं। आंमत्रित देशों के अलावा स्थायी सदस्य बैठक का हिस्सा होते ही हैं।