नई दिल्ली: चीन में हाल में आयोजित हुई एससीओ समिट में भारत और चीन जिस तरह से नजदीक आए हैं, उसके बाद से अमेरिकी राष्ट्रपति अपने ही लोगों के निशाने पर हैं। अमेरिका के कई इकोनॉमी एक्सपर्ट ट्रंप की आलोचना कर रहे हैं। इनका कहना है कि ट्रंप ने भारत पर भारी टैरिफ लगाकर उसे न केवल अमेरिका से दूर कर दिया, बल्कि चीन के नजदीक जाने का मौका दिया। अब एक और एक्सपर्ट ने ट्रंप की समझ पर सवाल उठाए हैं। इनका कहना है कि ट्रंप को आर्थिक मामलों की जरा भी समझ नहीं है। वहीं पीएम नरेंद्र मोदी को इस मामले में स्मार्ट बताया है।
स्वतंत्र विदेश नीति विश्लेषक एडवर्ड प्राइस ( Edward Price ) ने भारत के प्रति राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रवैये की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि हाल के व्यापार विवाद 21वीं सदी की सबसे महत्वपूर्ण साझेदारी को कमजोर कर सकते हैं। एडवर्ड प्राइस एक स्वतंत्र विश्लेषक और न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि ट्रंप की भारत के खिलाफ टैरिफ की धमकी अर्थशास्त्र और कूटनीति दोनों की गलत समझ है।
क्या कहा प्राइस ने?
प्राइस ने कहा, ‘मैं पहले सोचता था कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अर्थशास्त्र और कूटनीति की बहुत कम समझ है। लेकिन अब मुझे एहसास हुआ कि मैं गलत था। वास्तव में, राष्ट्रपति ट्रंप को अर्थशास्त्र और कूटनीति की कोई समझ नहीं है।’
यह आलोचना तब आई है जब ट्रंप ने ओवल ऑफिस में दिए अपने भाषण में भारत द्वारा अमेरिकी कंपनियों पर लगाए गए टैरिफ का जिक्र किया। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका भारत के साथ बहुत अच्छी तरह से मिलता है। प्राइस का तर्क है कि भारत की टैरिफ नीतियां एक विकासशील अर्थव्यवस्था के रूप में उचित हैं।
उल्टा पड़ गया ‘ट्रंप कार्ड’
विश्लेषक ने सुझाव दिया कि ट्रंप का दृष्टिकोण रणनीतिक रूप से उल्टा पड़ गया है। इससे भारत चीन और रूस के करीब जा सकता है। अमेरिकी विदेश नीति हमेशा से ऐसा होने से रोकना चाहती थी।
हाल की तस्वीरों में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक साथ दिखाई दिए। इससे अमेरिका के हितों के खिलाफ एक उभरते हुए गठबंधन के बारे में चिंताएं बढ़ गई हैं।
मोदी को बताया स्मार्ट
प्राइस ने कहा, ‘ऐसा लगता है कि उन्होंने भारत को रूस और चीन के करीब धकेल दिया है।’ हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि इन देशों के बीच ऐतिहासिक तनाव का मतलब है कि कोई भी गठबंधन स्थायी होने के बजाय सामरिक हो सकता है।
प्राइस ने चीन और रूस के साथ मोदी की बातचीत को वाशिंगटन को यह याद दिलाने के रूप में बताया कि भारत के पास विकल्प हैं। उन्होंने कहा, ‘मोदी स्मार्ट हैं। मोदी अपने पत्ते खेल रहे हैं। और वह अमेरिका को याद दिला रहे हैं कि उनके पास एक विकल्प है।’