अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ हुए युद्धविराम और समझौते की आलोचना करने वालों पर तीखा हमला बोला है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में दावा किया कि युद्ध के बाद ईरान पहले की तुलना में काफी कमजोर हो गया है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने सैन्य मोर्चे पर ईरान को पीछे धकेला और यही वजह है कि अब समझौते की स्थिति बनी है।
ट्रंप ने अपने राजनीतिक विरोधियों, खासकर डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं को निशाने पर लेते हुए कहा कि कुछ लोग यह दावा कर रहे हैं कि ईरान चार महीने पहले की तुलना में अब बेहतर स्थिति में है। ट्रंप ने इस दावे को पूरी तरह गलत बताते हुए कहा कि युद्ध ने ईरान की ताकत को कम किया है और उसकी स्थिति पहले जैसी नहीं रही।
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आलोचकों की टिप्पणी को बताया निराधार
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि यह समझना मुश्किल है कि कोई कैसे कह सकता है कि ईरान पहले से ज्यादा मजबूत हुआ है। उन्होंने आलोचकों की टिप्पणी को निराधार बताते हुए कहा कि वास्तविकता यह है कि युद्ध के बाद ईरान की स्थिति कमजोर हुई है। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान-अमेरिका समझौते और उसके प्रभाव को लेकर अमेरिका में राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
‘उनका खेल खत्म, एक पैसा भी नहीं मिलेगा’
ट्रंप ने यह भी कहा कि बातचीत की जरूरत अमेरिका को नहीं, बल्कि ईरान को थी। उन्होंने दावा किया कि ईरान अब बेहद कमजोर स्थिति में पहुंच चुका है और उस पर आर्थिक दबाव जारी रहेगा। उन्होंने सोशल ट्रुथ पर पोस्ट करते हुए कहा कि हम मजबूरी में नहीं मिले थे, ईरान मिला था। वे खत्म हो चुके हैं। हम 60 दिन की प्रक्रिया पूरी करेंगे। उन्हें कोई पैसा नहीं मिलेगा, एक पैसा भी नहीं।
वेंस ने ईरान पर साधा था निशाना
ईरान का परमाणु हथियार कार्यक्रम पूरी तरह नष्ट हो चुका है।
ईरान की बड़ी संख्या में बैलिस्टिक मिसाइलें और लॉन्चर तबाह कर दिए गए हैं।
ईरान की पारंपरिक सैन्य क्षमता भी गंभीर रूप से कमजोर हो गई है।
तेहरान को अपना व्यवहार बदलना होगा, तभी उसे समझौते का लाभ मिलेगा।
ईरान को क्षेत्रीय अस्थिरता और आतंकवाद को समर्थन देना बंद करना होगा।
ईरान की अर्थव्यवस्था बेहद खराब स्थिति में है और उसे वैश्विक अर्थव्यवस्था में वापसी के लिए भरोसा जीतना होगा।
अंतिम समझौते में ईरान को ऐसे मिसाइल विकसित करने की अनुमति नहीं होगी, जो दुनिया के लिए व्यापक खतरा बन सकें।