नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र का दूसरा फेज सोमवार से शुरू हो रहा है. यह काफी हंगामेदार होने वाला है. बजट सत्र के पहले फेज में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सदन में बोल नहीं सके, क्योंकि बजट के मुद्दे पर बोलने के बजाय पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की अप्रकाशित किताब में चीन के साथ सीमा विवाद पर लिखे गए अंश पर अपनी बात रखना चाहते थे. इसके जवाब में विपक्ष ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का दांव चला.
स्पीकर ओम बिरला ने राहुल गांधी को बजट चर्चा के दौरान केवल बजट पर बोलने या नियमों (Rule 349) का पालन करने की बात कही थी, जबकि राहुल गांधी चीन के साथ गतिरोध पर पूर्व सेना प्रमुख जनरल नरवणे के अप्रकाशित संस्मरणों का हवाला देना चाहते थे. ऐसे में स्पीकर ने नियमों के विरुद्ध बताते हुए राहुल गांधी को बोलने की अनुमति नहीं दी थी.
बजट सत्र के पहले फेज में राहुल ने कई बार बोलने की कोशिश की, लेकिन हर बार उन्हें रोक दिया गया. इसके चलते कांग्रेस सहित तमाम विपक्षी दलों ने स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ले आया. विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव से भले ही स्पीकर न हट सके, लेकिन ओम बिरला को बजट के पहले सत्र में ‘खामोश’ कर दिया था.
लोकसभा में राहुल गांधी को स्पीकर ने बोलने की इजाजत नहीं दी. इस पर राहुल गांधी ने कहा था कि हिंदुस्तान के इतिहास में इस साल पहली बार लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष का बोलने नहीं दिया गया. मैंने स्पीच शुरू की. मुझे रोका गया. फिर शुरू की, फिर रोका गया. इसके जवाब में विपक्ष ने स्पीकर ओम बिरला को हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव लेकर आया.
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को हटाने के प्रस्ताव पर कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने कहा था कि सदन में विपक्ष के नेता को सरकार के खिलाफ बोलने की इजाजत नहीं दी गई. लोकसभा में एकतरफा शासन चल रहा था. इसलिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला अविश्वास प्रस्ताव का सामना कर रहे हैं. साथ ही कांग्रेस के सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि अगर अंपायर खुद पक्षपाती हो जाए, तो खेल सत्ता का हो जाता है, लोकतंत्र का नहीं. इसीलिए हमने प्रस्ताव पेश किया है.