कौन संभालेगा अजित दादा की विरासत? पार्टी में मंथन शुरू

मुंबई। क्षमता, कार्यशैली और तेवर, इसमें तो अजित पवार का मुकाबला अजित पवार के परिवार में तो क्या, उनकी पार्टी में भी कोई नहीं कर सकता। जहां तक बारामती विधानसभा क्षेत्र का सवाल है इस बात पर मंथन शुरू हो गया है कि दादा के जाने से खाली हुई सीट को भरने के लिए भविष्य में कौन उपयुक्त होगा? इसमें अजित पवार की पत्नी एवं राज्यसभा सदस्य सुनेत्रा पवार के साथ-साथ उनके ज्येष्ठ पुत्र पार्थ पवार का भी नाम लिया जा रहा है।

अजित पवार के निधन से बारामती विधानसभा सीट हुई खाली
विमान दुर्घटना में बुधवार को महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का निधन हो गया है। चूंकि इस विधानसभा का कार्यकाल अभी करीब चार साल बाकी है, इसलिए अजित पवार के निधन से खाली हुई सीट को भरने के लिए जल्दी ही बारामती विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव करवाने पड़ेंगे।

यह भी लगभग निश्चित ही है कि इस सीट से अजित पवार परिवार का ही कोई सदस्य प्रत्याशी होगा, और उसका जीतना भी सुनिश्चित ही माना जा रहा है। सवाल सिर्फ यह बचता है कि इस सीट के लिए पवार परिवार किसको आगे करता है।

पिछले तीन वर्षों में महाराष्ट्र के दिग्गज नेता शरद पवार के परिवार ने जितने उतार-चढ़ाव देख लिए, उसकी कल्पना इस परिवार ने शायद कभी न की होगी। शरद पवार द्वारा पार्टी की कमान अजीत पवार के हाथ में न देने से नाराज अजित ने जुलाई 2023 में पार्टी तोड़कर उसके दो तिहाई से ज्यादा विधायक अपने पाले में कर लिए थे।

यहां से शुरू हुई चाचा के साथ जंग
चाचा शरद पवार के साथ यहां से शुरू हुई जंग पिछले लोकसभा चुनाव में यहां तक जा पहुंची की बारामती से तीन बार की सांसद अपनी चचेरी बहन सुप्रिया सुले के विरुद्ध अजित पवार ने अपनी पत्नी सुनेत्रा पवार को ही चुनाव लड़ने उतार दिया।लेकिन बारामती के लोगों ने भतीजे के बजाय, चाचा के पाले में रहना पसंद किया, और सुप्रिया सुले पहले से भी ज्यादा मतों से चौथी बार जीतकर संसद में पहुंच गईं।

अजित पवार को पत्नी की यह हार बर्दाश्त नहीं हुई, तो उन्होंने सुनेत्रा पवार को राज्यसभा का सदस्य बनवाकर सुप्रिया सुले का मुकाबला करने के लिए दिल्ली में बैठा दिया। हालांकि उनके इस निर्णय का पार्टी के वरिष्ठ सदस्य छगन भुजबल ने विरोध भी किया, लेकिन पवार नहीं माने।

कौन संभालेगा अजित दादा की विरासत?
बारामती संसदीय क्षेत्र के लोगों ने जहां सुनेत्रा पवार को हराया, वहीं छह महीने बाद हुए बारामती विधानसभा क्षेत्र के चुनाव में अजित पवार को आठवीं बार जिताया भी। जबकि अजित के मुकाबले शरद पवार ने विधानसभा चुनाव में उनके ही सगे भतीजे युगेंद्र पवार को मैदान में उतारा था।

अब अजित पवार के असमय अवसान के बाद एक बार फिर बारामती विधानसभा क्षेत्र सूना हो गया है, तो उनके कुछ समर्थक इसी सीट से सुनेत्रा पवार को लाने की मांग करने लगे हैं, तो कुछ लोग पार्थ पवार को।

सुनेत्रा पहले से देश के उच्च सदन की सदस्य हैं। जबकि अजित पवार के ज्येष्ठ पुत्र पार्थ पवार 2019 का लोकसभा चुनाव पड़ोस की मावल सीट से हारने के बाद से कोई चुनाव नहीं लड़े हैं। यह उनकी राजनीतिक महत्त्वाकांक्षा पूरी करने का एक अच्छा अवसर हो सकता है।

पवार परिवार में पिछले कुछ समय में बदले समीकरणों में इस बार बाबा शरद पवार एवं बुआ सुप्रिया सुले का भी समर्थन पार्थ पवार को मिल सकता है। जहां तक फडणवीस सरकार में अजीत पवार के निधन से खाली हुए उपमुख्यमंत्री पद को भरने का सवाल है, तो उसे लेकर अभी कोई अनुमान लगाना मुश्किल ही होगा।