नई दिल्ली: चीन में हो रहे एससीओ समिट के बीच शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमीर जेलेंस्की के बीच अहम बातचीत हुई. प्रधानमंत्री मोदी ने साफ कहा कि भारत की स्थायी पोज़िशन शांति और संवाद की है और वह जल्द ही तियानजिन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात करेंगे. इस दौरान वे युद्धविराम (सीजफायर) पर जेलेंस्की की राय पुतिन तक पहुंचाएंगे.
पीएम मोदी ने बातचीत में यह भी दोहराया कि भारत संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान और जल्द से जल्द शांति बहाल करने के हर प्रयास का समर्थन करता है. उन्होंने यूक्रेन में नागरिकों की मौत पर संवेदना जताई और कहा कि नई दिल्ली हमेशा रचनात्मक भूमिका निभाने के लिए तैयार है.
जेलेंस्की ने जताई उम्मीद, पर ट्रंप पर निराशा
बातचीत के बाद राष्ट्रपति वलोडिमीर जेलेंस्की ने X पर पोस्ट में कहा,
मैंने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात की. मैंने उन्हें वॉशिंगटन में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूरोपीय नेताओं के साथ हुई मुलाकात के बारे में जानकारी दी. यूक्रेन ने रूस के राष्ट्रपति के साथ मुलाकात की तैयारी की पूरी तत्परता दिखाई है. लेकिन लगभग दो हफ्ते गुजर गए और इस दौरान जब रूस को कूटनीति की तैयारी करनी चाहिए थी, तब उसने केवल नागरिक ठिकानों पर हमले किए और दर्जनों निर्दोष लोगों को मार डाला.
उन्होंने आगे लिखा-
मैं प्रधानमंत्री मोदी का धन्यवाद करता हूं कि उन्होंने पीड़ितों के परिवारों और प्रियजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की. हमने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) सम्मेलन से पहले अपनी पोजिशन को समन्वित किया. भारत तैयार है आवश्यक प्रयास करने के लिए और रूस तथा अन्य नेताओं को उचित संदेश पहुंचाने के लिए.
जेलेंस्की ने पीएम मोदी से भविष्य में मुलाकात की इच्छा भी जताई और कहा –
मैं निकट भविष्य में प्रधानमंत्री से मिलने के लिए उत्सुक हूं.
मोदी–पुतिन मुलाकात पर अंतरराष्ट्रीय नजरें
प्रधानमंत्री मोदी ने साफ संकेत दिया कि SCO समिट में पुतिन मुलाकात में सीजफायर का मुद्दा उठाया जाएगा. यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिमी देशों की कोशिशों के बावजूद कोई ठोस नतीजा नहीं निकल रहा. जेलेंस्की का यह कहना कि “ट्रंप से अब कोई सकारात्मक उम्मीद नहीं बची” यह दर्शाता है कि अब उनकी निगाहें भारत पर टिकी हैं.
भारत की भूमिका और मजबूत
मोदी और जेलेंस्की की इस बातचीत से साफ है कि भारत अब केवल दर्शक नहीं बल्कि मध्यस्थ की भूमिका में सामने आ रहा है. रूस और यूक्रेन दोनों से संवाद बनाए रखते हुए भारत ने लगातार यह संदेश दिया है कि समाधान केवल बातचीत से ही संभव है. अब जब जेलेंस्की ने खुद स्वीकार किया कि भारत रूस तक “उचित संदेश” पहुंचा सकता है, तो अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें सीधे तियानजिन में होने वाली मोदी–पुतिन मुलाकात पर टिक गई हैं.