भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर 15 ऐसे सवाल, जिनका जवाब अब तक नहीं मिला

भोजपुर; बिहार के भोजपुर में 17 जून को हुए भरत तिवारी के कथित तौर पर हुए एनकाउंटर ने बिहार पुलिस के कर्मचारियों पर कई सारे सवाल खड़े दिए हैं. सवाल इसलिए कि भरत तिवारी कोई कुख्यात नहीं था. जानकारी के मुताबिक उस पर किसी तरह का कोई केस पहले से दर्ज नहीं था. इतना ही नहीं पुलिस ने खुद भरत तिवारी को मानसिक रूप से बीमार बताया था, तो ऐसे में निश्चित तौर से सवाल खड़े हो रहे हैं कि भरत का एनकाउंटर आखिर पुलिस ने क्यों किया. उस पर जानलेवा हमला आखिर क्यों किया गया. सवाल इसलिए भी उसके हथियार फेंकने और सरेंडर करने का वीडियो सामने आ चुका है, तो पुलिस ने उसका एनकाउंटर किसके आदेश पर किया.

भरत तिवारी एनकाउंटर पर इन 15 सवालों पर घिरी पुलिस और पूरा सिस्टम
जब भरत ने अपने पिस्तौल फेंक कर सरेंडर कर दिया तब पुलिस ने उसका एनकाउंटर क्यों किया ?
बिना वारंट के पुलिस उसके घर में दरवाज़ा तोड़ पर कैसे घुस गई?
इस घटना से पहले भरत पर किसी तरह का अपराधिक मुकदमा नहीं था , तब ऐसे में एनकाउंटर करना सही है?
पुलिस का कहना है कि भरत ने 10 राउंड फायरिंग की, तो फिर कोई पुलिस वाला घायल क्यों नहीं हुआ?
भरत को गोली मारने के बाद तुरंत उसके घर वालों को सूचित क्यों नहीं किया गया?
पुलिस ने भरत को गोली मारने के बाद तुरंत उसे अस्पताल क्यों नहीं पहुंचाई? क्या मौत का इंतजार किया जा रहा था?
पुलिस ने कहा था भरत मानसिक रूप से फिट नहीं हैं, तब ऐसे में किस कानून के तहत मानसिक रूप से अनफिट व्यक्ति का एनकाउंटर किया गया?
पुलिस का कहना है कि भरत ने सामने से गोली चलाई तब आत्मरक्षा में पुलिस ने जवाबी गोली चलाई तो फिर 5 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड क्यों किया गया?
पुलिस हमेशा अपराधियों के पकड़ने और एनकाउंटर का वीडियो बनाती है तो पुलिस के पास अब तक कोई सबूत क्यों नहीं है?
भरत की पोस्टमार्टम रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की गई है?
घटना के बाद अब पुलिस ने भरत के पिता-भाई समेत 50 अन्य लोगों पर केस क्यों दर्ज किया है? जबकि भरत को घर से काफी दूर मारा गया था.
भरत सिस्टम पर सवाल खड़े कर रहा था और इसके लिए उसने कई बार आवेदन भी दिया था, इसके बाद ही यह घटना हुई तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई?
भरत कोई आपराधिक मुद्दे नहीं बल्कि आम लोगों को हो रही परेशानी के खिलाफ आवाज उठा रहा था, तो पुलिस इसे हैंडल क्यों नहीं कर पाई?
आखिर क्यों भोजपुर के जवनिया गांव के लोगों को फिर से वैसे ही जमीन पर विस्थापित किया गया जहां वह फिर से डूब रहे थे?
ऐसे करने के बाद भी सरकार और सिस्टम के लोगों को यह गड़बड़ी क्यों नहीं आज तक दिखाई नहीं दी?
भरत तिवारी की मौत के बाद पुलिस को इसे एनकाउंटर बता देना, वहीं पुलिस के एनकाउंटर बोलने के बाद सरकार द्वारा अपनी ही पुलिस के खिलाफ जांच बैठाना और SIT गठित करना. पुलिस के पास एनकाउंटर के सबूत न होना , यह सब ऐसे सवाल हैं जो सभी लोगों के मन में हैं. यह सवाल सिस्टम-पुलिस-प्रशासन से पूछे जाने चाहिए और इसके जवाब भी मिलने चाहिए.