Congress In Bihar Chunav 2025: बिहार चुनाव में एनडीए की आई आंधी में महागठबंधन घास के तिनके की तरह उड़ गई. इस चुनाव में बिहार की कुल 243 सीटों में से एनडीए ने 202 सीटों पर जीत हासिल की. वहीं महागठबंधन सिर्फ 35 सीटों पर सिमट गया. जबकि अन्य के खाते में 9 सीटें आईं. बिहार के नतीजे कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी के लिए भी बड़ा झटका हैं. वे (राहुल गांधी) बिहार के मतदाताओं को यह समझाने की कोशिश में जुटे रहे कि बीजेपी वोट चोरी कर रही है. बिहार SIR के खिलाफ राहुल गांधी ने प्रदेश में ‘वोटर अधिकार यात्रा’ निकाली थी, जिसमें चुनाव आयोग और बीजेपी पर वोट चोरी करने के बड़े गंभीर आरोप लगाए. अपनी बातों को जस्टिफाई करने के लिए राहुल ने कुछ लोगों से भी मिलवाया, जिन्होंने ‘वोट चोरी’ के आरोपों का समर्थन किया. लेकिन मीडिया के फैक्ट चेक में राहुल गांधी के आरोपों धरासाई हो गए. ‘वोट चोरी’ को लेकर राहुल गांधी ने कहा था कि वे जल्द ही ‘हाइड्रोजन बम’ फोड़ने वाले हैं, जिससे चुनाव आयोग पूरी तरह से बेनकाब हो जाएगा. वहीं बिहार के नतीजे बता रहे हैं कि राहुल के ‘हाइड्रोजन बम’ से कांग्रेस खुद ध्वस्त हो गई और राजद भी घायल हो गई.
बता दें कि बिहार चुनाव से पहले राहुल गांधी ने तय किया कि वे SIR के खिलाफ एक माहौल बनाएंगे और इसी मुद्दे पर चुनाव लड़ेंगे. इसके लिए उन्होंने स्वतंत्रता दिवस के अगले ही दिन यानी 16 अगस्त से राहुल गांधी ने बिहार में वोटर अधिकार यात्रा निकालने का फैसला लिया. सासाराम से यात्रा की शुरुआत हुई. इसमें राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव और उनके बेटे तेजस्वी यादव भी शामिल हुए. इससे पहले तक तेजस्वी यादव क्राइम, भ्रष्टाचार और रोजदार के मुद्दे पर सरकार को घेर रहे थे. लेकिन राहुल के मैदान आते ही तेजस्वी ने बड़ा दिल दिखाते हुए उनके मुद्दे का समर्थन कर दिया और यही उनकी सबसे बड़ी गलती साबित हुई.
लालू-तेजस्वी का साथ मिलने के कारण राजद कार्यकर्ताओं ने वोटर अधिकार यात्रा को सफल बनाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी. इससे यात्रा में हुजूम उमड़ने लगा और इससे कांग्रेसियों के हौंसले बुलंद होते गए. कांग्रेसी इसे राहुल गांधी का करिश्मा मान बैठे. तेजस्वी यादव को इस बात का एहसास सीट शेयरिंग करते वक्त हुआ. हालांकि, तबतक काफी देर हो चुकी थी. सीट बंटवारे को लेकर दोनों दलों में काफी तनातनी देखने को मिली और अंत तक मुद्दा नहीं सुलझ सका. इसी कारण से 13 सीटों पर दोस्ताना फाइट देखने को मिली. मुख्यमंत्री पद के लिए तेजस्वी यादव को चेहरा घोषित करने के लिए भी महागठबंधन में काफी घमासान देखने को मिला. पीएम मोदी ने इसे पूरे चुनाव प्रचार में खूब इस्तेमाल किया और ‘कनपटी पर कट्टा’ वाले बयान ने राजद के खिलाफ माहौल तैयार कर दिया. नतीजों ने साफ कर दिया कि जंगलराज का भय लोगों के दिलो-दिमाग में आजतक कायम है.