Bihar Chunav: तेजस्वी बनेंगे CM, बनाएंगे महागठबंधन सरकार! सर्वे से गदगद हैं लालू यादव पर सामने है यह बड़ी चुनौती?

Bihar Chunav 2025: बिहार चुनाव में राजनीतिक विश्लेषकों के लिए अमित शाह के 160 के लक्ष्य पर आश्चर्य नहीं हो रहा. इसलिए कि एनडीए की महागठबंधन से टक्कर 2020 से कम नहीं है. सच कहें तो इस बार उससे भी ज्यादा कड़ा मुकाबला दिख रहा है. आरजेडी नेता और पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव बढ़ते अपराध और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर पहले से ही नीतीश कुमार की सरकार को घेरते रहे हैं. तरह-तरह के लुभावने वादे कर पहले से ही एनडीए की नाक में दम कर रखा है. बाद में वोट चोरी के आरोप लगा कर राहुल गांधी ने बिहार में वोटर अधिकार यात्रा निकाली, तो उससे तेजस्वी को नैतिक बल मिला है. लोक पोल (Lok Poll) के ताजा सर्वे में एनडीए पर महागठबंधन की अगर बढ़त दिख रही है तो उसके यही कारण हो सकते हैं.

सर्वे में बनती दिख रही तेजस्वी की सरकार
लोक पोल के सर्वे की बात करें तो उसमें महागठबंधन को 118-126 सीटें मिलती दिख रही है. एनडीए के खाते में 105-114 सीटें जा रही हैं. अगर लोक पोल का सर्वे हकीकत में तब्दील हुआ तो महागठबंधन की सरकार बननी तय है. ऐसा हुआ तो बतौर सीएम 20 साल बिहार में शासन चलाने वाले नीतीश कुमार के लिए यह बड़ा सेट बैक यानी झटका होगा. कोई कहे या न कहे, पर सभी समझ रहे हैं कि नीतीश के नेतृत्व में यह आखिरी चुनाव है. पिछली बार की तरह उन्होंने पाला बदला भी तो सीएम की कुर्सी महागठबंधन में मिलने से रही. इसलिए कि तेजस्वी यादव सीएम की कुर्सी पर 2020 से ही आंख गड़ाए हुए हैं. इस बार तो ‘कोई माई का लाल उन्हें सीएम बनने से नहीं रोक सकता.’ यह दावा दूसरे करें न करें, लेकिन उनके पिता और स्थापना काल से ही आरजेडी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे लालू यादव जरूर करते हैं.

लालू यादव तो कई बार इतने उत्साह में होते हैं कि वे अपनी शारीरिक स्थिति का भी आकलन नहीं करते. उनका किडनी ट्रांसप्लांट हुआ है. धूल-मिट्टी या भीड़भाड़ से ऐसे लोगों को बचने की हिदायत होती है. इसके बावजूद तेजस्वी की सभा में लालू पहुंच जाते हैं. समर्थकों में जोश भरने के लिए पुराने अंदाज में ‘लागल-लागल झुलनिया के धक्का, बलम कलकत्ता निकल गए’ गाने लगते हैं. ‘मत चूको चौहान’ के संकल्प के साथ तेजस्वी की ताजपोशी के लिए वे किसी से पंगा ले सकते हैं. दरअसल जितने मतों के अंतर से एनडीए की सरकार बनती रही है, उस अंतर को पाटने के लिए लालू ने जातीय समीकरण बना रखा है. लव-कुश समीकरण के कारण कुशवाहा समाज के लोग एनडीए के वोटर 2005 से ही बने हुए हैं. लालू ने इस समाज के वोटरों में सेंध लगा दी है. लोकसभा चुनाव में आरजेडी ने कई कुशवाहा नेताओं को टिकट देकर 2025 की तैयारी शुरू कर दी थी. महागठबंधन में शामिल सीपीआई (एमएल) ने भी कुशवाहा समाज को मान दिया. दोनों के कुशवाहा कैंडिडेट जीत गए. मंगनी लाल मंडल को आरजेडी का अध्यक्ष बना कर लालू ने नीतीश कुमार की ईबीसी वोटरों पर पकड़ ढीली करने की कोशिश की है.

तेजस्वी के लिए बेटा-बेटी से लालू का पंगा!
तेजस्वी के राजनीतिक करियर में दाग न लगे, इसके लिए लालू ने एक झटके में बड़े बेटे तेज प्रताप को पार्टी और परिवार से बाहर निकालने की मुनादी कर दी. जिस बेटी रोहिणी आचार्य ने अपनी किडनी देकर लालू को सेहतमंद किया, उसने किसी बात पर अपनी नाराजगी जाहिर की तो पिता के साथ पार्टी अध्यक्ष होने के नाते उन्हें खुद संज्ञान लेना चाहिए था. पर, पूरे प्रसंग पर लालू चुप रहे. उनकी चुप्पी का ही परिणाम रहा होगा कि रोहिणी ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म X अकाउंट को पर्सनल कर लिया. इतना ही नहीं, फैमिली और पार्टी के नेताओं को अनफालो कर रिश्ता तोड़ लिया. तेज प्रताप अपनी बहन के समर्थन में बोले. तेजस्वी भी बहन के आरोपों पर बोले. कहा- बहन का किसी भी तरह का अपमान कोई करता है तो वे बर्दाश्त नहीं करेंगे. पर, लालू खामोश रहे हैं अब तक. लालू के कुनबे में दिख रही अनबन के संकेत तो यही हैं कि तेजस्वी के लिए लालू की भी इसमें सहमति है. कहा तो यह भी जा रहा है कि लालू की सांसद बेटी मीसा भारती भी ख़फ़ा हैं. हालांकि इसका कोई पुख्ता प्रमाण नहीं मिलता. अलबत्ता रोहिणी प्रसंग पर मीसा की चुप्पी से संदेह जरूर होता है.

लालू फैमिली में मचे घमासान का कारण
इतना तो तय है कि लालू प्रसाद यादव के परिवार में चल रहे आंतरिक कलह पर लालू और उनकी सबसे बड़ी बेटी मीसा भारती की खामोशी के पीछे राजनीतिक और पारिवारिक कारण हो सकते हैं. तेजस्वी यादव के राजनीतिक सलाहकार सांसद संजय यादव को लेकर रोहिणी आचार्य की नाराजगी है. उन्हें तेजस्वी की सीट पर संजय यादव का बैठना नहीं सुहाया. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पार्टी पर कब्जे का प्रयास किया जा रहा है. तेज प्रताप यादव तो संजय यादव का नाम लिए बगैर इशारों-इशारों में उन्हें ‘जयचंद‘ बताते रहे हैं. मीसा की खामोशी के पीछे भी संजय यादव हों तो कोई आश्चर्य नहीं. अगर ऐसा है तो इसकी वजह क्या है. हरियाणा मूल के संजय यादव को तेजस्वी का बेहद करीबी पार्टी के लोग भी मानते हैं. तेजस्वी के हर फैसले में संजय की ही दृष्टि होती है.

तो ये है फैमिली में अनबन की मूल वजह!
आरजेडी के भरोसेमंद सूत्र बताते हैं कि संजय यादव ने तेजस्वी को परिवारवाद की राजनीति से बाहर निकलने की सलाह दी है. तेज प्रताप को एक ल