बिहार के सरकारी कर्मचारियों को इस दिन से मिलेगा 8वें वेतन आयोग का लाभ, इतनी बढ़ेगी सैलरी, जानिए पूरा गणित

बिहार के सरकारी कर्मचारियों में इस बात को लेकर चर्चा तेज हो गई है कि उनको आठवें वेतन का लाभ कब से मिलेगा। 1 जनवरी से आठवें वेतन आयोग का गठन तो हो गया है। लेकिन फिलहाल 7वें वेतनमान के तहत ही वेतन मिल रहा है। इसी बीच आठवें वेतन आयोग की अनुशंसाओं के लाभ को लेकर सरकारी सेवकों में उत्सुकता देखी जा रही है। फिलहाल इसको लेकर सरकारी गतिविधि तेज हो गई। सरकारी सूत्रों की मानें तो लोकसभा के अगले चुनाव से पहले 8वां वेतनमान मिलने की उम्मीद है।

वर्ष 2029 में संभावित लोकसभा चुनाव से पहले वेतन संशोधन को लेकर सचिवालय के गलियारों में तैयारी तेज हो गया है। हालांकि, सरकार पर नई नियुक्तियों और उससे जुड़े राजस्व व्यय के प्रबंधन का दबाव फिलहाल बना हुआ है। गौरतलब है कि बिहार में सातवें वेतन आयोग की अनुशंसाएं एक अप्रैल 2017 से लागू हुई थीं। इसके साथ ही राज्य के सरकारी सेवकों को केंद्र के समान वेतन और भत्ते मिलने लगे थे। सातवें वेतन आयोग की अवधि 2025 के अंत के साथ पूरी हो चुकी है, ऐसे में आठवें वेतन आयोग को लेकर उम्मीदें बढ़ गई हैं।

नियम के अनुसार, आठवें वेतन आयोग की अनुशंसाओं का लाभ सरकारी सेवकों को एक जनवरी 2026 से मिलना संभावित है। हालांकि, केंद्र सरकार को अभी आयोग की रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है। परंपरा के मुताबिक, केंद्र में आठवें वेतन आयोग की अनुशंसाएं एक जनवरी 2026 से प्रभावी मानी जाएंगी, जबकि इसकी रिपोर्ट 2027 के मध्य से पहले आने की संभावना नहीं है। उसी समय नए वेतनमानों की घोषणा होने का अनुमान है।

बिहार में सातवें वेतन आयोग का लाभ लगभग 3.5 लाख सरकारी सेवकों और करीब चार लाख पेंशनभोगियों को मिला था। वर्तमान में सरकारी कर्मियों की संख्या में काफी वृद्धि हो चुकी है। ऐसे में आठवें वेतन आयोग के लागू होने पर राज्य के खजाने पर बोझ भी पहले की तुलना में अधिक पड़ने की आशंका है। हालांकि राज्य सरकार पर अनुशंसाएं लागू करने की कानूनी बाध्यता नहीं है, लेकिन एक बार सातवें वेतन आयोग को लागू करने के बाद पीछे हटना सरकार के लिए आसान नहीं होगा।

इस बीच, सरकारी सेवक पुरानी पेंशन योजना (OPS) को लागू करने की मांग को लेकर भी लगातार दबाव बनाए हुए हैं, जबकि सरकार इस पर बार-बार असहमति जता चुकी है। केंद्र सरकार द्वारा आठवें वेतन आयोग की अनुशंसाएं लागू किए जाने के बाद बिहार में वित्त विभाग की ओर से एक स्क्रीनिंग कमेटी का गठन किया जाएगा। उसी समिति की रिपोर्ट के आधार पर राज्य के सरकारी सेवकों और पेंशनभोगियों के लिए वेतन वृद्धि पर निर्णय लिया जाएगा।

ऐसे लागू होगा फिटमेंट फैक्टर

इससे पहले सातवें वेतन आयोग के लिए पूर्व मुख्य सचिव जीएस कंग की अध्यक्षता में समिति गठित की गई थी, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर एरियर का भुगतान भी किया गया था। सातवें वेतन आयोग के दौरान फिटमेंट फैक्टर 2.57 तय किया गया था, जिसके आधार पर वेतन में बढ़ोतरी हुई थी। इस बार फिटमेंट फैक्टर दो के आसपास रहने की चर्चा है, हालांकि अंतिम फैसला आयोग की अनुशंसाओं पर निर्भर करेगा। पिछली बार मूल वेतन और महंगाई भत्ता को जोड़कर फिटमेंट फैक्टर लागू किया गया था, जिससे निचले स्तर के कर्मियों के वेतन में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई थी। बिहार में औसतन लगभग 15 प्रतिशत वेतन वृद्धि हुई थी, जिससे राज्य के खजाने पर हर साल करीब 8000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ा था। उसी अनुपात में पेंशनभोगियों को भी लाभ मिला था।

एरियर और टैक्स का असर

आठवें वेतन आयोग के लागू होने पर मिलने वाला एरियर आयकर के दायरे में आएगा। कई सरकारी कर्मचारी 30 प्रतिशत के टैक्स स्लैब में आ सकते हैं, जिससे एरियर पर भी उसी दर से टैक्स देना होगा। वित्त विशेषज्ञों का आकलन है कि आठवें वेतन आयोग की रिपोर्ट आने तक महंगाई भत्ता 70 प्रतिशत के आसपास पहुंच सकता है। नए वेतनमान तय करते समय यह राशि मूल वेतन में जुड़ जाएगी, जिससे सरकारी सेवकों और पेंशनभोगियों को दोहरा लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।