पटना: Bihar Sand Scam: बिहार में सरकारी राजस्व को चूना लगाने वाले माफियाओं के एक बहुत बड़े और हाईटेक सिंडिकेट का पर्दाफाश हुआ है। खान एवं भूतत्व विभाग के ‘खननसॉफ्ट’ पोर्टल को हैक कर करीब 350 करोड़ रुपये का बालू बेचने के इस महाघोटाले में आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने अपनी जांच की रफ्तार बढ़ा दी है। मिली जानकारी के मुताबिक, ईओयू के डीआईजी मानवजीत सिंह ढिल्लो ने शुक्रवार को एक बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि इस पूरे खेल की परतें खोलने के लिए बिहार स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बेल्ट्रॉन) के साथ-साथ केंद्र सरकार की एक बहुत बड़ी विशेषज्ञ कंपनी से इस पूरे सिस्टम का ‘टेक्निकल ऑडिट’ कराया जा रहा है। इस ऑडिट से यह साफ हो जाएगा कि पोर्टल के लॉग-इन आईडी और पासवर्ड का कंट्रोल किन-किन लोगों के हाथों में था।
एनआईसी कर्मियों की मिलीभगत से सॉफ्टवेयर में की गई गड़बड़ी
इस घोटाले की मोडस ऑपेरंडी इतनी शातिर है कि इसने तकनीकी सुरक्षा दावों की पोल खोलकर रख दी है। ईओयू की जांच में पता चला है कि खनन विभाग में प्रतिनियुक्त नेशनल इन्फर्मेटिक्स सेंटर (NIC) के कुछ भ्रष्ट कर्मियों की मिलीभगत से विभाग के मुख्य डेटाबेस सर्वर और सॉफ्टवेयर के साथ भारी छेड़छाड़ की गई थी। लाइसेंसधारकों को आवंटित की जाने वाली बालू की निर्धारित मात्रा को अवैध रूप से बढ़ाने के लिए सुरक्षा के सबसे मजबूत चक्र यानी ओटीपी ऑथेंटिकेशन को ही बाईपास कर दिया गया। इसके बाद बालू माफियाओं ने जिला खनन कार्यालय या विभाग की सहमति के बिना ही कागजों को खुद से पोर्टल पर अपलोड किया और अपनी कैपिंग को मनमाने ढंग से बढ़ाकर निर्धारित मात्रा से कई गुना अधिक बालू अवैध रूप से बेच डाला।
राजस्व चोरी मामले में 17 जिलों में दर्ज हैं 62 केस
इस महाघोटाले के तार पूरे बिहार में फैले हुए हैं, जिससे राज्य सरकार को सीधे तौर पर 350 करोड़ रुपये से अधिक की भारी राजस्व चपत लगी है। इस बालू घोटाले को लेकर राज्य के पटना साइबर थाने सहित कुल 17 जिलों में अब तक 62 आपराधिक कांड दर्ज किए जा चुके हैं, जिनकी जांच ईओयू की विशेष टीमें कर रही हैं। इस मामले में 100 से अधिक लाइसेंसधारी सीधे तौर पर पुलिस और जांच एजेंसियों के निशाने पर आ चुके हैं। डीआईजी मानवजीत सिंह ढिल्लो ने साफ कहा है कि टेक्निकल ऑडिट की फाइनल रिपोर्ट के आधार पर सरकारी राजस्व की चोरी करने वाले दोषी पदाधिकारियों, तकनीकी कर्मियों और बालू कारोबारियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ बेहद सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।