Samrat Choudhary: भाजपा लंबे समय तक बिहार की सत्ता में प्रमुख साझीदार रही है. इसके बावजूद भाजपा बड़ी राजनीतिक ताकत नहीं बन पाई. एक मामले में उसकी हालत ठीक कांग्रेस जैसी रही है. आरजेडी की पिछलग्गू बन कर कांग्रेस रही तो भाजपा नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले जेडीयू के पीछे चलती रही है. भाजपा के सुशील मोदी लंबे समय तक नीतीश मंत्रिमडल में उप मुख्यमंत्री रहे, लेकिन पार्टी ने कभी अपने स्वतंत्र अस्तित्व के लिए काम नहीं किया. सुशील मोदी के बाद पैन बिहार भाजपा नेता के रूप में किसी की पहचान नहीं बन पाई. 2014 से लगातार केंद्र में भाजपा की सरकार रही है.
भाजपा नेताओं पर आरोप
भाजपा ने लोकसभा और विधानसभा की सर्वाधिक सीटें जीतने का रिकार्ड भी अपने नाम किया है. इसके बावजूद बिहार में भाजपा का कोई सर्वमान्य नेता नहीं दिखता. हाल के वर्षों में भाजपा ने अपने 4 नेताओं को डेप्युटी सीएम बनाया. पर, किसी की पहचान बड़े कद के नेता की नहीं बन पाई. सुशील कुमार मोदी के बाद तार किशोर प्रसाद और रेणु देवी को भाजपा ने आजमाया. फिर कई दलों का दर्शन कर लौटे सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा को भाजपा ने डिप्टी सीएम बनाया. सुशील मोदी तो रहे नहीं, लेकिन बाद में भाजपा के जितने डिप्टी सीएम बिहार में बने, उन्होंने कोई छाप नहीं छोड़ी. उल्टे इसके शीर्षस्थ नेता भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों से गिर गए हैं. दिलीप जायसवाल, संजय जायसवाल, मंगल पांडेय और सम्राट चौधरी पर जन सुराज के नेता प्रशांत किशोर ने भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं. इन नेताओं ने अभी तक कायदे से ऐसी सफाई भी नहीं दी है, जिससे चुनावी मौसम में पार्टी जनता को संतुष्ट कर सके.
भाजपा के भीतर भी कलह
अब तो पार्टी को अंदरूनी कलह का भी सामना करना पड़ रहा है. डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी अपने नेताओं के निशाने पर भी आ गए हैं. प्रशांत किशोर ने उनकी उम्र में गड़बड़ी, डिग्री में फर्जीवाड़ा, एक से अधिक नाम और कई हत्याओं का आरोप लगाया है. ये इतने संगीन आरोप हैं कि भाजपा के लोग भी इसे सियासी खुन्नस मानने को तैयार नहीं. उन्हें भी सम्राट चौधरी में गड़बड़ियां नजर आती हैं. पूर्व केंद्रीय मंत्री आरके सिंह ने पहले सम्राट पर हमला बोला. अब तो अश्विनी चौबे ने भी मोर्चा खोल दिया है. लोकसभा चुनाव में हार के बाद से ही आरके सिंह पार्टी के प्रति नाराजगी जाहिर करते रहे हैं. वे अपनी हार के पीछे सम्राट चौधरी की भूमिका मानते हैं. सम्राट से तो अब अश्विनी चौबे भी खफा दिख रहे हैं. उन्होंने भ्रष्टाचार के आरोपों पर सम्राट चौधरी को लालकृष्ण आडवाणी जैसे आचरण की सलाह दे डाली है. आडवाणी पर जब जैन हवाला कांड में 1996 में भ्रष्टाचार के आरोप लगे तो उन्होंने लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था. हालांकि बाद में अदालत ने उन्हें मामले से बरी कर दिया था.
आरके सिंह ने सफाई मांगी
पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता आरके सिंह पार्टी नेताओं पर लगे आरोपों से खफा हैं. सम्राट चौधरी के खिलाफ प्रशांत किशोर ने जो आरोप लगाए हैं, उन पर उन्होंने उनसे सफाई देने की मांग कर दी है. सिंह ने कहा है कि सम्राट चौधरी अगर इन आरोपों का जवाब नहीं देते हैं तो उन्हें अपने पद से हट जाना चाहिए. उनके चुप रहने से पार्टी की छवि खराब हो रही है. प्रशांत किशोर ने दावा किया है कि सम्राट चौधरी सिर्फ सातवीं कक्षा पास हैं, पर उनके पास डी.लिट की डिग्री है. आरके सिंह की सलाह है कि सम्राट चौधरी को मैट्रिक या स्नातक का सनद दिखाना चाहिए. अगर वे ऐसा नहीं करते हैं तो इससे सरकार और पार्टी की की छवि पर बुरा असर पड़ेगा. सम्राट को खुद सामने आना चाहिए और अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए. यदि आरोप गलत हैं, तो सम्राट चौधरी को प्रशांत किशोर के खिलाफ मुकदमा दायर करना चाहिए.
अश्विनी चौबे भी आगबबूला
पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता अश्विनी चौबे भी आरोपों के मद्देनजर गरम दिखते हैं. उन्होंने प्रशांत किशोर के सम्राट चौधरी पर लगाए गए आरोपों पर तल्ख टिप्पणी भी की है. उन्होंने कहा कि कुछ लोग पार्टी में पिछले दरवाजे से आते हैं. इनमें कुछ लोग तो सुधर जाते हैं, लेकिन जो नहीं सुधरते, उन्हें जनता सुधार देती है. सनद रहे कि सम्राट चौधरी कई दलों से होकर भाजपा में पहुंचे हैं. भाजपा ने उन पर आंख मूंद कर भरोसा किया और उन्हें पहले प्रदेश अध्यक्ष और बद में डेप्युटी सीएम बना दिाया. चौबे ने प्रशांत किशोर को भी सलाह दी है कि अगर उनके पास सम्राट चौधरी के खिलाफ सबूत हैं तो उन्हें प्रेस कान्फ्रेंस करने के बजाय कोर्ट में जाना चाहिए. अखबारों में सुर्खियां बटोर कर कोई बड़ा नेता नहीं बन सकता. चौबे ने चेतावनी देते हुए यह भी कहा कि आलाकमान हर चीज पर नजर रखता है. सम्राट को नसीहत देते हुए चौबे ने लालकृष्ण आडवाणी का उदाहरण दिया. हवाला मामले में जब आडवाणी पर आरोप लगे तो उन्होंने लोकसभा से इस्तीफा दे दिया था. वे तब तक लोकसभा नहीं गए, जब तक कि वे बरी नहीं हुए.