पटना: बिहार में प्री-मानसून की बारिश और आंधी का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है. मौसम विज्ञान केंद्र ने गुरुवार को राज्य के मौसम में बड़े बदलाव के संकेत देते हुए 24 जिलों में बारिश और वज्रपात का ‘यलो अलर्ट’ जारी किया है. इन जिलों में उत्तर और पूर्वी बिहार के लगभग सभी प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं. मौसम विभाग के अनुसार, इन इलाकों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से धूल भरी आंधी चलने और गरज-चमक के साथ मध्यम से भारी बारिश होने की संभावना है.
इन जिलों में अलर्ट
अलर्ट की जद में आने वाले प्रमुख जिलों में पश्चिम और पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सीवान, सारण, मुजफ्फरपुर, वैशाली, सीतामढ़ी, शिवहर, मधुबनी, दरभंगा, समस्तीपुर, सुपौल, अररिया, किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार, सहरसा, मधेपुरा, खगड़िया, भागलपुर, मुंगेर, बांका और जमुई शामिल हैं. इन क्षेत्रों के निवासियों को सलाह दी गई है कि वे खराब मौसम के दौरान ऊंचे पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहें और सुरक्षित स्थानों पर शरण लें.
बीते 24 घंटों के आंकड़ों पर गौर करें तो बिहार में कुदरत का अलग ही रूप देखने को मिला है. राज्य में औसतन 32.1 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन वास्तविक रिकॉर्ड 94.5 मिमी तक पहुंच गया, जो सामान्य से करीब 186 प्रतिशत अधिक है. राजधानी पटना में जहां बीते दिन ओलावृष्टि और मूसलाधार बारिश ने जनजीवन प्रभावित किया. वहीं बगहा, किशनगंज और अररिया जैसे सीमावर्ती जिलों में भी जोरदार बारिश दर्ज की गई. इस बेमौसम बारिश ने तापमान को तो नीचे गिरा दिया है, लेकिन जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है.
तापमान का हाल
तापमान के उतार-चढ़ाव की बात करें तो बुधवार को कैमूर का भभुआ 36.6 डिग्री सेल्सियस के साथ सबसे गर्म स्थान रहा. वहीं, फॉरबिसगंज, डेहरी और गया में न्यूनतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया, जिससे रात के समय लोगों को हल्की ठंडक महसूस हुई. हालांकि, राजधानी पटना के लिए आज का पूर्वानुमान थोड़ा अलग है. यहां बादल छाए रह सकते हैं, लेकिन बारिश की संभावना कम है, जिससे वातावरण में उमस बढ़ने के आसार हैं. पटना का अधिकतम तापमान आज 34 से 38 डिग्री के बीच रहने का अनुमान है.
किसानों की बढ़ी मुश्किलें
यह बारिश आम जनता को भले ही गर्मी से राहत दे रही हो, लेकिन किसानों के लिए ‘आसमानी आफत’ बनकर टूटी है. खेतों में गेहूं की कटी हुई फसलें भीगकर खराब हो रही हैं, जिससे किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फिर गया है. सबसे बुरा असर सब्जियों और फलों की खेती पर पड़ा है. जलभराव के कारण खेतों में लगी सब्जियां सड़ने लगी हैं, वहीं तेज आंधी की वजह से आम और लीची के मंजर व कच्चे फल बड़ी संख्या में गिर रहे हैं, जिससे बागवानों को भारी आर्थिक चोट पहुंची है.
कब तक ऐसा रहेगा मौसम
मौसम विभाग के विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति अगले 2 से 3 दिनों तक बनी रह सकती है. हालांकि, मई के दूसरे सप्ताह से मौसम में फिर से बड़ा पलटाव होगा. जैसे ही बारिश की गतिविधियां थमेंगी, पछुआ हवाओं के प्रभाव से तापमान में अचानक उछाल आएगा. मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि मई के मध्य तक राज्य के कई हिस्सों में भीषण लू की स्थिति बन सकती है, इसलिए लोगों को आने वाले दिनों में कड़कती धूप का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए.