बिहार में डबल मर्डर केस में ऐतिहासिक फैसला, कोर्ट ने मां और प्रेमी को 2 बच्चों की हत्या पर सुनाई मौत की सजा

मधुबनी: बिहार के मधुबनी जिले के झंझारपुर कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दोहरे बाल हत्याकांड में मां अनीता देवी और उसके प्रेमी जयशंकर मंडल को फांसी की सजा सुना दी है. जिला अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय अभिषेक रंजन की अदालत ने इस मामले को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ श्रेणी में रखते हुए दोनों दोषियों को मौत की सजा दी.

क्रूर हत्याकांड की पूरी घटना: 3 जुलाई 2023 को अंधरामठ थाना क्षेत्र के नरही गांव की रहने वाली अनीता देवी अपने चार वर्षीय बेटे प्रिंस और 18 माह की बेटी सृष्टि को लेकर घर से निकली थी. शाम तक वापस न लौटने पर परिजनों ने खोज शुरू की.

एक बच्चे की मिली लाश: जांच में पता चला कि अनीता ने अपने प्रेमी जयशंकर मंडल के साथ मिलकर दोनों मासूम बच्चों की निर्मम हत्या कर दी और सबूत मिटाने के लिए उनके शव खोपा पुल के नीचे बलान नदी में फेंक दिए. चार वर्षीय प्रिंस का शव बाद में बरामद हुआ, जबकि छोटी बच्ची सृष्टि का शव नदी की तेज धारा में बह गया.

आक्रोशित ग्रामीणों ने आरोपियों को पकड़ा: घटना की सूचना मिलते ही आक्रोशित ग्रामीणों ने दोनों आरोपियों को पकड़ लिया और पुलिस के हवाले कर दिया. मृतक बच्चों के पिता प्रमोद कुमार साफी के आवेदन पर फुलपरास थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई. पुलिस जांच में अनीता देवी और जयशंकर मंडल की मिलीभगत साफतौर पर सामने आई. दोनों आरोपी 11 जुलाई 2023 से लगातार न्यायिक हिरासत में थे.

अदालत ने माना ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’: अदालत ने मामले की क्रूरता, मासूम बच्चों की हत्या और मां द्वारा अपने ही बच्चों को मारने की घटना को अत्यंत दुर्लभ श्रेणी में रखा. जज अभिषेक रंजन ने विस्तृत बहस और साक्ष्यों के आधार पर दोनों को दोषी करार दिया. अदालत ने दोनों दोषियों पर अलग-अलग 60 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है, जिसे न चुकाने पर अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी पड़ेगी.

परिवार और समाज में गहरा सदमा: इस घटना ने पूरे इलाके में शोक की लहर फैला दी है. मृतक बच्चों के पिता प्रमोद कुमार साफी और अन्य परिजन न्याय की इस जीत पर राहत महसूस कर रहे हैं, लेकिन बच्चों की कमी उन्हें खल रही है. ग्रामीणों का कहना है कि ऐसी क्रूर घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कानूनी कार्रवाई जरूरी है.

बिहार में बाल अपराध पर सख्त संदेश: यह फैसला बिहार में बाल हत्याओं और परिवारिक कलह से उपजी हिंसा के खिलाफ एक मजबूत संदेश है. झंझारपुर कोर्ट का यह फैसला अन्य लंबित संवेदनशील मामलों पर भी असर डालेगा.