पटना: प्रशांत किशोर का दावा है कि उनकी पार्टी बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में मजबूती से लड़ेगी और भाजपा को उसके गढ़ में घुस कर हराएगी। पिछले चुनाव में जिस पार्टी की 238 में से 236 सीटों पर जमानत जब्त हो गयी हो, क्या उसके नेता के इस दावे को गंभीरता से लेना चाहिए? बिहार चुनाव में उनके सभी दावे पानी के बुलबुले साबित हुए। इसके बाद भी वे भाजपा को उसके गढ़ में घुस कर हराने का दावा कर रहे हैं। क्या यह संभव है? या फिर ‘खाया-पीया कुछ नहीं और ग्लास फोड़ा बारह आने का’ मुहावरा चरितार्थ कर रहे हैं?
जब लालू -नीतीश भी मिलकर नितिन नवीन को नहीं हरा पाए
बांकीपुर सीट 2010 में अस्तित्व में आयी। अब तक हुए सभी चार चुनावों में नितिन नवीन ने शानदार जीत दर्ज की। पहली बार 78 हजार से अधिक वोटों मिले। 2015 में लालू यादव और नीतीश कुमार की संयुक्त ताकत भी नितिन नवीन का कुछ नहीं बिगाड़ पायी। बल्कि प्रतिक्रिया में नितिन नवीन और ज्यादा वोट (86 हजार से अधिक) मिले। यानी यहां लालू-नीतीश का कास्ट फैक्टर भी प्रभावी नहीं। 2020 में वे 83 हजार वोट मिले।
2025 में तो सारे रिकॉर्ड टूट गये और वोटों का आंकड़ा 98 हजार तक पहुंच गया। यानी राजनीतिक परिस्थितियां चाहे जैसी भी रही हों, भाजपा के वोट यहां बढ़ते रहे हैं। बांकीपुर विधानसभा सीट पहले पटना पश्चिम के नाम से जानी जाती थी। तब से इस सीट पर भाजपा का दबदबा है।
लालू यादव और शत्रुघ्न सिन्हा भी यहां फीके पड़ गए
ऐसा नहीं है कि भाजपा को इस सीट पर हराने के लिए विरोधी दलों ने पैंतरे नहीं आजमाये। हर एक चाल चल कर देख ली। लेकिन भाजपा को हरा नहीं पाए। इस सीट पर कायस्थ जाति के मतदाताओं की संख्या सबसे अधिक है। कायस्थ समाज भाजपा का समर्पित वोटर माना जाता है। अगर किसी दूसरे दल से कायस्थ उम्मीदवार खड़ा हो भी जाए, तब भी वे भाजपा को ही वोट करते हैं।
इस वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए 2010 में लालू यादव ने अपने निजी सचिव रहे विनोद कुमार श्रीवास्तव को बांकीपुर से उम्मीदवार बनाया था। लेकिन विनोद श्रीवास्तव को करीब 18 हजार वोट ही मिले और वे नितिन नवीन के हाथों करीब 60 हजार वोटों से हार गये। इस सीट पर लालू यादव का भी करिश्मा नहीं चला।
इसी तरह 2020 के चुनाव में कांग्रेस ने शत्रुघ्न सिन्हा के पुत्र लव सिन्हा को इस सीट से उम्मीदवार बनाया। शत्रुघ्न सिन्हा एक तो कायस्थ समाज से थे, ऊपर से और लोकप्रिय फिल्म अभिनेता भी थे। इसके बाद भी ने अपने पुत्र को जीत नहीं दिला सके। लव सिन्हा करीब 40 हजार वोटों के अंतर से चुनाव हार गये।
प्रशांत किशोर ने दिया था भूमिहार ब्राह्मण को टिकट, करारी हार
2025 के चुनाव में प्रशांत किशोर बांकीपुर सीट पर अपनी हैसियत देख चुके हैं। वंदना कुमारी ने जन सुराज पार्टी के टिकट पर यहां से चुनाव लड़ा था। उन्हें केवल 7 हजार 717 वोट मिले थे। वे तीसरे स्थान पर रहीं थीं। इस सीट पर नितिन नवीन ने राजद की रेखा कुमारी को करीब 41 हजार वोटों के बड़े अंतर से हराया था। प्रशांत किशोर ने इस सीट एक भूमिहार ब्राह्मण (वंदना कुमारी) को टिकट दिया था। बांकीपुर में कायस्थ के बाद भूमिहार ब्राह्मण और ब्राह्मण वोटर भी असरदार माने जाते हैं। लेकिन यह जाति समूह भी भाजपा का कट्टर समर्थक है। तभी तो तो भूमिहार ब्राह्मणों ने अपनी जाति की उम्मीदवार (वंदना कुमारी) को छोड़ कर भाजपा के नितिन नवीन (कायस्थ) को वोट दिया।
प्रशांत किशोर किस आधार पर कर रहे हैं जीत का दावा?
प्रशांत किशोर गांधीवाद और आदर्शवाद की चाहे जितनी भी बातें कर लें, लेकिन वे भी चुनाव लड़ने के लिए जाति और समुदाय पर ही आश्रित हैं। 2025 के चुनाव में उन्होंने भी जाति और धर्म के आंकड़ों को ध्यान में रखकर 238 सीटों पर टिकट बांटे थे। अधिकांश सीटों पर जिस जाति या समुदाय की बहुलता थी, उसी के आधार पर टिकट दिया गया था। जातीय राजनीति में फिलहाल प्रशांत किशोर के लिए अभी कोई जगह नहीं है।
राजद, जदयू और भाजपा पहले से इस राजनीति को साध रहे हैं। इस सीट पर भाजपा को हराने के लिए अभी तक जितनी भी रणनीतियां बनायी गयी हैं, वे सभी फेल रही हैं। तब फिर प्रशांत किशोर बांकीपुर सीट पर कैसे जीत हासिल करेंगे?