12 साल में IIT, 24 में Ph.D, बिहार के सत्यम को अब Apple ने बुलाया अमेरिका! किसान के बेटे ने दुनिया को चौंकाया

भोजपुर: प्रतिभा किसी परिचय या सुख-सुविधाओं की मोहताज नहीं होती, इसे सच कर दिखाया है बिहार के लाल सत्यम कुमार ने. बिहार के एक छोटे से गांव से निकलकर दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनी Apple तक पहुंचने का उनका सफर किसी फिल्मी पटकथा जैसा रोमांचक और प्रेरणादायक है. भारत के सबसे कम उम्र के IITians में से एक सत्यम ने न केवल अपनी मेधा का लोहा मनवाया, बल्कि वैश्विक स्तर पर बिहार का नाम रोशन किया है.

बचपन में ही रच दिया था इतिहास
सत्यम कुमार का जन्म 20 जुलाई 1999 को बिहार के भोजपुर जिले के बखोरापुर गांव में एक साधारण किसान परिवार में हुआ था. गांव की पगडंडियों और सीमित संसाधनों के बीच पले-बढ़े सत्यम में बचपन से ही गणित और विज्ञान के प्रति गजब का आकर्षण था. उनकी प्रतिभा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिस उम्र में बच्चे ठीक से स्कूल जाना सीखते हैं, उस उम्र में वे जटिल समीकरण हल कर रहे थे.
साल 2011 में महज 12 साल की उम्र में सत्यम ने पहली बार IIT-JEE की परीक्षा पास कर देशभर की सुर्खियां बटोरीं. हालांकि, वे अपनी 8137 रैंक से संतुष्ट नहीं थे. उन्होंने खुद को फिर से चुनौती दी और 2013 में 13 साल की उम्र में दोबारा परीक्षा देकर AIR 679 हासिल की। मात्र 14 साल की उम्र में उन्हें IIT कानपुर जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में दाखिला मिला, जहाँ उन्होंने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक-एमटेक की ड्यूल डिग्री पूरी की.

IIT से अमेरिका और Apple तक का सफर
IIT कानपुर में अपनी काबिलियत साबित करने के बाद सत्यम ने उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका का रुख किया. उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास से इलेक्ट्रिकल एंड कंप्यूटर इंजीनियरिंग में PhD की डिग्री हासिल की. आश्चर्य की बात यह है कि उन्होंने मात्र 24 साल की उम्र में ‘डॉक्टर’ की उपाधि प्राप्त कर ली.

उनकी विशेषज्ञता और रिसर्च को देखते हुए उन्हें दुनिया की दिग्गज टेक कंपनी Apple में काम करने का मौका मिला. 2023 में Apple के ‘सीरी स्पीच टीम’ (Siri Speech Team) में इंटर्नशिप करने के बाद, आज वे वहां एडवांस मशीन लर्निंग रिसर्च के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

परिवार में टैलेंट की खान
सत्यम की सफलता का असर उनके परिवार पर भी दिखा। उनके छोटे भाई शिवम ने भी उन्हीं के नक्शेकदम पर चलते हुए महज 15 साल की उम्र में IIT-JEE क्वालिफाई किया और IIT कानपुर से अपनी डिग्री पूरी की. फिलहाल शिवम सैमसंग जैसी बड़ी कंपनी में कार्यरत हैं.

सत्यम कुमार की यह कहानी उन लाखों युवाओं के लिए एक मशाल है जो अभावों में रहकर बड़े सपने देखते हैं. उनका यह सफर साबित करता है कि यदि लक्ष्य के प्रति समर्पण, अटूट साहस और निरंतरता हो, तो बखोरापुर के खेतों से लेकर कैलिफोर्निया के टेक लैब्स तक की दूरी तय करना नामुमकिन नहीं है.