भोजपुर ; बिहार के भोजपुर जिले में चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले ने एक नया मोड़ ले लिया है। अब इस मामले में गोली चलाने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ ही एफआईआर दर्ज कर ली गई है। भरत तिवारी की मां आशा देवी की शिकायत के आधार पर शाहपुर थाने में मामला दर्ज किया गया है, जिससे पूरे मामले को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं।
भोजपुर के पुलिस अधीक्षक (एसपी) राज ने 23 जून को इसकी पुष्टि की। एफआईआर में जगदीशपुर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, तत्कालीन शाहपुर थानाध्यक्ष समेत अन्य संबंधित पुलिसकर्मियों के नाम शामिल किए गए हैं। इससे पहले इस मामले में पांच पुलिसकर्मियों को निलंबित भी किया जा चुका है।
मां ने लगाए गंभीर आरोप
आशा देवी ने अपने आवेदन में आरोप लगाया है कि उनका बेटा भरत भूषण तिवारी बाढ़ प्रभावित और विस्थापित लोगों की समस्याओं को लेकर लगातार आवाज उठा रहा था। घटना वाले दिन पुलिस टीम उनके घर पहुंची और भरत को अपने साथ चलने के लिए कहा।
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शिकायत के अनुसार, भरत ने फेसबुक लाइव के दौरान अपने पास मौजूद हथियार फेंक दिया था और पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था। इसके बावजूद पुलिसकर्मियों ने उसे पकड़कर जमीन पर गिराया और कई गोलियां मार दीं। आशा देवी का दावा है कि उनके बेटे को पांच गोलियां लगी थीं।
‘आदेश पर चलाई गई गोली’
आवेदन में यह भी आरोप लगाया गया है कि गोलीबारी जगदीशपुर पुलिस उपाधीक्षक के निर्देश पर की गई। परिवार का कहना है कि घटना के बाद उन्हें कई घंटों तक सही जानकारी नहीं दी गई और बाद में भरत की मौत की सूचना मिली। इन आरोपों के आधार पर अब पुलिसकर्मियों के खिलाफ औपचारिक प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने की संभावना है।
पांच पुलिसकर्मी पहले ही हो चुके हैं सस्पेंड
इस प्रकरण में अब तक पांच पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की जा चुकी है। निलंबित अधिकारियों में तत्कालीन शाहपुर थानाध्यक्ष राजेश कुमार मालाकार, उपनिरीक्षक अंकित आर्यन, उपनिरीक्षक हरश्चंद्र कुमार, सहायक उपनिरीक्षक रामाशंकर यादव और महिला सिपाही मीरा कुमारी शामिल हैं।
जांच पर टिकी निगाहें
भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर शुरू से ही सवाल उठते रहे हैं। अब पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद मामले की निष्पक्ष जांच की मांग और तेज हो गई है। आने वाले दिनों में जांच एजेंसियों की रिपोर्ट और कानूनी प्रक्रिया इस मामले की दिशा तय करेगी। फिलहाल पूरे बिहार की नजर इस हाई-प्रोफाइल केस की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।