नीतीश कुमार का दिल्ली कूच और बेटे निशांत का राजनीति में उदय, जानें पूरा समीकरण

Bihar Politics: बिहार की राजनीति में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार के जदयू में सदस्यता लेने के साथ ही राजनीति की दशा-दिशा बिहार में बदल चुकी है. क्योंकि बिहार की जनता ने नीतीश कुमार की कार्यशैली पर बिहार की सत्ता की बागडोर पुनः उन्हें सौंपी है. आप देख सकते हैं कि सड़क से लेकर सोशल मीडिया पर नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने से अपने मन के भाव को लोग प्रकट कर रहे हैं. खासकर जिन महिलाओं के बीच नीतीश ने उम्मीद की लौ को जलाया है, वो महिलाएं तो नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की बात से उदास हो गई हैं. साथ ही कह रही है कि आप इस पर विचार करें. बिहार को अभी आपकी जरुरत है. दूसरी तरफ अगर देखें तो नीतीश कुमार के समर्थन में जो लगातार आवाज उठ रही है, इससे भाजपा और सहयोगी दलों के भी होश उड़ गए हैं. अब सबको लगने लगा है कि नीतीश कुमार का जनाधार आज भी बहुत बड़ा है.

इस जनाधार की जड़ में जाएं तो स्पष्ट हो जाता है कि नीतीश कुमार बोलते नहीं उनका काम बोलता है. जिस बिहार के नाम से लोगों ने नफरत पाल रखी थी, आज उसी बिहार में आने के लिए सैलानियों की लंबी फेहरिस्त है. नीतीश कुमार ने लड़कियों के लिए जो किया, युवाओं के लिए जो किया, उद्योगपतियों के लिए, छोटे-छोटे उद्योग-धंधे से जुड़े लोगों के लिए जो काम किया उसको दरकिनार नहीं किया जा सकता है. जदयू की बैठक करना, निशांत कुमार को उसमें बैठाकर सियासी चाल का एक हिस्सा माना जा रहा है. वहीं, भाजपा गुमसुम तरीके से इन सारे गेम को देख रही है. कहीं कोई कुछ बोलने की हिमाकत नहीं जुटा पा रहा है. सत्ता का मिलना और सत्ता को संभाले रहना. किसी के लिए अगर जनता सड़क पर उतर जाए तो यही उसकी कमायी है. नीतीश कुमार ने काम किया है तो बिहार की जनता ने उनको प्यार भी बहुत दिया है.

नीतीश कुमार जी अगर आप दिल्ली जाना चाहते हैं तो आप बिहार की जनता को निशांत कुमार को नेतृत्व सौंप दीजिए. इस तरह की आवाज हर तरफ से उठने लगी है. अगर हम राजनीतिक बिसात की बात करें तो कल तक नीतीश कुमार की घुर विरोधी राबड़ी देवी भी नीतीश को बिहार नहीं छोड़ने की अपील कर रही हैं. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इकलौते बेटे हैं निशांत कुमार. इनको कभी भी किसी ने राजनीतिक हनक या अपने पिता के पद का दुरुपयोग करते हुए नहीं देखा. इनकी सिंप्लीसिटी ही इनकी पहचान बन गई है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सिर्फ एक पारिवारिक या व्यक्तिगत फैसला नहीं, बल्कि जदयू की भविष्य की रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है. इसलिए राजनीतिक पंडितों का यह भी मानना है कि कहीं नीतीश कुमार के बाद निशांत कुमार ही हो सकते हैं बिहार का अगला मुख्यमंत्री. क्योंकि लगातार विधायकों, विधान पार्षदों सहित सांसदों और पब्लिक की पहली पसंद बन चुके हैं निशांत कुमार.

अगर हम राजनीतिक गुणा भाग की बात करें तो भाजपा के पास 89 विधायक हैं तो जदयू के पास 85 विधायक हैं. इतना ही नहीं केंद्र की सरकार भी नीतीश कुमार के सहयोग से ही टिकी हुई है. चूंकि महाराष्ट्र के राजनीतिक स्थिति से सभी अवगत हैं. भाजपा भी इस बात से वाकिफ है कि ये बिहार है, यहां नीतीश कुमार के आगे किसी की दाल गलने वाली नहीं है. ये वही नीतीश कुमार हैं जिन्होंने राजनीति को हमेशा सेवा समझा है और सेवक बनकर बिहार की प्रगति के लिए काम करते रहते हैं.