बिहार में अब ‘रिवर्स मोड’ में होगा विभागों का बंटवारा! CM भाजपा का तय, लेकिन गृह विभाग पर सस्पेंस

पटना: बिहार में नई सरकार के गठन के बाद अब एनडीए (NDA) के घटक दलों के बीच कैबिनेट और विभागों के बंटवारे को लेकर हलचल तेज हो गई है। राजनीतिक गलियारों में इस बार विभागों के आवंटन के लिए ‘रिवर्स मोड’ (Reverse Mode) फॉर्मूले की चर्चा सबसे अधिक है।

क्या है ‘रिवर्स मोड’ फॉर्मूला?
इस फॉर्मूले का मतलब है कि वर्तमान में भाजपा के पास जो विभाग हैं, वे जदयू (JDU) को मिल सकते हैं, और जदयू के पास मौजूद विभाग भाजपा के कोटे में जा सकते हैं। एनडीए के रणनीतिकारों का मानना है कि इस अदला-बदली से दोनों दलों को नए क्षेत्रों में काम करने का मौका मिलेगा और प्रशासनिक ताजगी आएगी।

किन विभागों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर?
कार्य विभाग

वर्तमान में पथ निर्माण विभाग भाजपा के पास है, जो जदयू को मिल सकता है। वहीं, ग्रामीण कार्य विभाग जो अभी जदयू के पास है, वह भाजपा के खाते में जा सकता है।

शिक्षा और स्वास्थ्य

सबसे महत्वपूर्ण बदलाव इन दो बड़े विभागों में दिख सकता है। चर्चा है कि शिक्षा विभाग (वर्तमान में जदयू) भाजपा को और स्वास्थ्य विभाग (वर्तमान में भाजपा) जदयू को सौंपा जा सकता है।

गृह विभाग पर सस्पेंस

गृह विभाग लंबे समय तक मुख्यमंत्री के पास रहा था, लेकिन पिछली बार इसे उपमुख्यमंत्री को सौंपा गया था। अब कयास लगाए जा रहे हैं कि यह विभाग फिर मुख्यमंत्री या जदयू कोटे के उपमुख्यमंत्री के पास जा सकता है।

विकास और निवेश पर फोकस
नई सरकार में उद्योग और ऊर्जा विभागों को प्राथमिकता दी जा रही है। बिहार में औद्योगिक निवेश बढ़ाने के लक्ष्य के साथ, उद्योग विभाग (अभी भाजपा) और ऊर्जा विभाग (परंपरागत रूप से जदयू) के बीच भी अदला-बदली संभव है।

अन्य बदलाव जो संभव हैं
ग्रामीण विकास, परिवहन और समाज कल्याण जैसे विभाग, जो वर्तमान में जदयू के पास हैं, वे भाजपा को मिल सकते हैं। हालांकि, लोजपा (रामविलास) के पास मौजूद लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) में बदलाव की संभावना कम जताई जा रही है।