पटना: पश्चिम बंगाल और असम विधानसभा चुनाव के परिणाम 4 मई को आ जाएंगे। उसके बाद बिहार की राजधानी पटना का सियासी तापमान गरम हो जाएगा। सियासी पंडितों को अनुमान है कि मई के दूसरे सप्ताह यानी 6 मई और उसके बाद बिहार में मंत्रिमंडल विस्तार किया जा सकता है। इस विस्तार में बिहार की सत्ता संरचना में पढ़ीगत बदलाव देखने को मिल सकता है। ऐसा अनुमान सियासी पंडित पहले से लगा रहे थे। लेकिन अब जेडीयू- बीजेपी के अंदर से ऐसी खबरें आ रही हैं कि मंत्रिमंडल में नये चेहरों को जगह दी जाएगी। संभावना ये भी जताई जा रही है कि पूर्व सीएम नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार के नेतृत्व में बिहार में विकास की नई टीम खड़ी हो, इसके लिए जेडीयू नए चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल कर सकती है। बीजेपी- जेडीयू के अलावा अन्य सहयोगी दल एलजेपी आर, आरएलएम और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा सेक्यूलर की भी अपनी तैयारी है।
सम्राट कैबिनेट में किसकी एंट्री?
जेडीयू के एक नेता ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि निशांत कुमार अपने पिता की राजनीतिक विरासत को जेडीयू को एकजुट करने में लगे हैं। निशांत वंशवादी सियासत से अलग हटकर राज्य में यात्रा कर स्वतंत्र रूप से अपनी छवि गढ़ने में लगे हैं। मंत्रिमंडल विस्तार से पहले वो जेडीयू के कई विधायकों से मिल चुके हैं। अंदर की खबर ये है कि अब जेडीयू की तरफ से जो भी मंत्री पद की शपथ लेंगे। उसका फैसला निशांत, डिप्टी सीएम विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र यादव करेंगे। नीतीश कुमार ने दोनों अनुभवी नेताओं को इसलिए डिप्टी सीएम बनाया है ताकि निशांत की टीम यानी मंत्रिमंडल में शामिल होने वाले जेडीयू के नए विधायकों का मार्गदर्शन सही तरीके से हो सके। जेडीयू से जिन नामों के मंत्रिमंडल में शामिल होने की चर्चा हो रही है, उसमें रुहैल रंजन, कोमल सिंह, रितुराज और चेतन आनंद शामिल हैं। ये लोग निशांत कुमार की टीम में शामिल हैं।
बीजेपी का प्लान समझिए!
चिराग पासवान की पार्टी की ओर से पिछले मंत्रिमंडल में दो युवा मंत्री रहे। मंत्रिमंडल में एक पद उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक का तय माना जा रहा है। उन्हें युवा और शिक्षित और उभरते नेता के तौर पर देखा जा रहा है। नितिन नवीन के बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद पार्टी पूरी तरह पीढ़ीगत बदलाव के दौर से गुजर रही है। इसलिए बीजेपी भी नये चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल करने को तैयार है। सूत्रों के मुताबि इस बाबत सम्राट चौधरी ने बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व को अवगत करा दिया है। बीजेपी नेता दबी जुबान में कहते भी हैं कि पीएम मोदी युवा चेहरे को आगे देखना चाहते हैं। 57 वर्षीय सम्राट के मुख्यमंत्री बनने के साथ ही भाजपा द्वारा मंत्रिमंडल में कुछ नए नेताओं को पदोन्नत किए जाने की भी उम्मीद है।
विजय सिन्हा के नाम पर सस्पेंस!
सबसे बड़ी चर्चा बीजेपी में विजय कुमार सिन्हा को लेकर है। सूत्रों के मुताबिक विजय कुमार सिन्हा को विधानसभा अध्यक्ष या पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में समायोजित किया जा सकता है। बीजेपी से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि विजय कुमार सिन्हा नये मंत्रिमंडल में जगह नहीं पाएंगे। इस तरह की चर्चा है। उसके अलावा बीजेपी से जिन चेहरों को शामिल किया जाएगा। उनके संभावित नाम भी सियासी गलियारों में चल रहे हैं। पहली बार बक्सर से विधायक बने अमित शाह के प्रिय पूर्व आईपीएस आनंद मिश्रा को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है। उसके अलावा संजय सिंह टाइगर पक्का हैं। श्रेयसी सिंह और लखेंद्र पासवान का नाम फाइनल है। रमा निषाद और प्रमोद चंद्रवंशी का नाम भी कमोवेश तय माना जा रहा है। उसके अलावा कई अन्य चेहरों पर पार्टी दांव लगा सकती है।
मंत्रिमंडल विस्तार की खास बात!
इस बीच सबसे खास बात जो सामने आ रही है, उसके मुताबिक बीजेपी और जेडीयू दोनों मंत्रिमंडल विस्तार में जातिगत समीकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने वाले हैं। बीजेपी के एक नेता ने बताया कि जातिगत समीकरण को लेकर पार्टी अलर्ट है। अगले साल यूपी के विधानसभा चुनावों को लेकर पार्टी सावधानीपूर्वक आगे बढ़ेगी। जेडीयू ने विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र यादव को डिप्टी सीएम बनाकर पहले ही संकेत दे दिए हैं। इन दोनों दलों के लिए समीकरण कितना मायने रखता है। इसलिए मंत्रिस्तरीय चयन में आयु और जातिगत समीकरणों को ध्यान में रखा जाएगा ताकि अति पिछड़े वर्गों (EBC) और अन्य पिछड़े वर्गों (OBC) के बीच अपने मतदाता आधार को बरकरार रखा जा सके। बिहार की जातिगत गतिशीलता के संदर्भ में, यादव समुदाय ओबीसी के भीतर सबसे बड़ा जनसांख्यिकीय समूह है, लेकिन भाजपा और जेडीयू दोनों ही गैर-यादव ओबीसी आधार को मजबूत करने का प्रयास कर रहे हैं।