जिस बिहार को बीजेपी एक CM चेहरा नहीं दे पाई, वहीं से चुन लिया पार्टी का सुप्रीम लीडर

Nitin Nabin Latest News: बीजेपी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष के तौर पर नितिन नबीन की ताजपोशी हो चुकी है. नितिन नबीन का संबंध बिहार की धरती से है. वही बिहार जहां पार्टी तकरीबन 20 साल से सत्ता में है और इन 20 वर्षों में अपना सीएम नहीं बना सकी है. बिहार विधानसभा में बीजेपी भले ही नंबर-वन की भूमिका में हो, लेकिन सत्ता में नंबर-2 की हैसियत से आगे नहीं बढ़ सकी. आज भी वह सीएम नीतीश कुमार के पीछे ही चलने को मजबूर है. इसमें कोई शक नहीं है कि बिहार की सियासत में बीजेपी बड़ी तेजी से आगे बढ़ी है. इस चुनाव में वह सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, जबकि पिछले चुनाव में वह नंबर दो की पार्टी थी. हालांकि, इसके बावजूद बिहार में बीजेपी का मुख्यमंत्री नहीं बन सका. अब उसी बिहार ने बीजेपी ने अपना सर्वोच्च नेता खोज निकाला है.

बता दें कि इसी साल हुए बिहार इलेक्शन में बीजेपी ने जेडीयू, लोजपा-रामविलास, हम और रालोमो के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था. एनडीए का मुख्य मुकाबला महागठबंधन से था, जिसमें राजद-कांग्रेस के अलावा वामदल और वीआईपी के अलावा आईआईपी शामिल थीं. इस चुनाव में एनडीए ने प्रचंड बहुमत के साथ वापसी की. इस चुनाव में बिहार की कुल 243 सीटों में से एनडीए ने 202 सीटों पर जीत हासिल की. वहीं महागठबंधन सिर्फ 35 सीटों पर सिमट गया, जबकि अन्य के खाते में 9 सीटें आईं. एनडीए में भारतीय जनता पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. उसे 89 सीटें मिली हैं, जबकि नीतीश कुमार की जेडीयू के खाते में 85 सीटें आईं. 2020 में 75 सीटों के साथ बार सबसे बड़ी पार्टी का खिताब हासिल करने वाली राष्ट्रीय जनता दल को इस बार सिर्फ 25 सीटों से संतोष करना पड़ा है.

2020 के चुनावों की बात करें तो 75 सीटों के साथ राजद सबसे बड़ा दल था. दूसरी बड़ी पार्टी के रूप में बीजेपी के पास 74 विधायक थे. उस चुनाव में सीएम नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू सिर्फ 43 सीटें ही जीत सकी थी. इसके बावजूद बीजेपी को नीतीश कुमार को ही मुख्यमंत्री बनाना पड़ा. इतना ही नहीं बीजेपी ने सरकार में जैसे ही अपनी पकड़ बनाने की कोशिश की तो नीतीश कुमार ने उसे सत्ता से ही बाहर कर दिया था और 2022 में राजद के साथ मिलकर सरकार बना ली थी. हालांकि, महागठबंधन सरकार भी ज्यादा दिनों तक टिक नहीं सकी और नीतीश कुमार को वापस एनडीए में आना पड़ा. उधर बीजेपी के पास भी नीतीश कुमार के कद का कोई नेता नहीं है. वर्तमान समय में केद्र की मोदी सरकार जेडीयू के समर्थन से चल रही है. लिहाजा, बिहार में बीजेपी को नीतीश कुमार के पीछे ही चलना ही पड़ेगा.