बिहार चुनाव में तेजस्वी की चाल पर भारी पड़ेंगे NDA के ये 6 दांव, नीतीश की हो जाएगी बल्ले-बल्ले!

बिहार विधानसभा चुनाव में भुनाए जा सकने वाले मुद्दों की तलाश में विपक्ष लगा हुआ है. नीतीश कुमार के शासन की भूल-चूक और गड़बड़ियों पर विपक्ष का फोकस बढ़ गया है. नीतीश को भ्रष्टाचार का भीष्म पितामह तक तेजस्वी कहने लगे हैं. उन्होंने बिहार का क्राइम बुलेटिन जारी करने का सिलसिला भी चला रखा है. भ्रष्टाचार के सिलसिले में तेजस्वी ‘डीके टैक्स’ की बात करते हैं. क्राइम की गति को देखते हुए बिहार में सुशासन नहीं, ‘महा जंगल राज’ का आरोप मढ़ते हैं. और तो और, तेजस्वी नीतीश की उम्र और स्वास्थ्य को लेकर उन पर बीमार-लाचार होने का तोहमत लगाते रहे हैं. पर संयोग कहें या प्रयोग, केंद्र और राज्य की डबल इंन की सरकारों ने कुछ ऐसे काम किए हैं, जिनका सुफल एनडीए को मिलने से कोई रोक नहीं सकता.

GST में कटौती
केंद्र सरकार ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है. अब जीएसटी की सिर्फ दो दरें होंगी. काफी चीजों को जीएसटी के दायरे से बाहर कर दिया गया है. नतीजतन इनकी कीमतें घटी हैं. महंगाई से बेहाल लोगों के लिए जीएसटी की नई दरें काफी राहत पहुंचाएंगी. मसलन कई सामान सस्ते हो जाएंगे. लोगों की बचत बढ़ेगी. लोग इसे सरकार का चुनाव के लिए सही समय पर उठाया गया कदम मानें या न मानें, लेकिन कीमतों में गिरावट का असर तक तो दिखेगा ही. लंबे समय से बीमा क्षेत्र को जीएसटी से बाहर करने की मांग उठ रही थी. सत्ता पक्ष से लेकर विपक्ष तक की ओर से बीमा पर जीएसटी खत्म करने की मांग होती रही है. बीमा पर 18 प्रतिशत जीएसटी से मुक्ति और टीवी-कारों की खरीदी पर जीएसटी की घटी दर का फायदा लोगों को मिलेगा. यह बिहार चुनाव में साइलेंटली एनडीए के पक्ष में काम करेगा. यह भीड़ जुटा कर शक्ति प्रदर्शन का आधार भले न बने, लेकिन चुपचाप अपना कमाल दिखा सकता है.

इनकम टैक्स छूट
केंद्र सरकार का यह फैसला पहले ही आ गया था. बजट में नौकरी पेशा लोगों की 12 लाख रुपए की आय पर टैक्स छूट ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में जब कमाल दिखा दिया तो बिहार चुनाव इससे कैसे अछूता रह सकता है. बिहार में 6 लाख ऐसे टैक्स पेयर्स हैं, जिनकी सालाना आया 12 लाख या इससे कम है. यानी इनकम टैक्स में छूट से बिहार के 6 लाख वयस्क मतदाता लाभान्वित हुए हैं. जाहिर है कि आयकर देने वाले लोग वयस्क होते हैं. यानी जिन्हें इस छूट का लाभ मिला है, उन 6 लाख लोगों को केंद्र सरकार का शुक्रगुजार होना चाहिए. और, अगर शुक्रगुजार हुए तो इसका मतलब आप समझ सकते हैं. यानी एनडीए ने झटके में एक रणनीति के तहत 6 लाख वोटों का बंदोबस्त कर लिया है.

महिला इंपावरमेंट
नीतीश कुमार का ध्यान उस वक्त महिला शक्ति की ओर गया, जब देश की संसदीय व्यवस्था में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण का संसद में विरोध हो रहा था. मुलायम सिंह, शरद यादव, लालू यादव जैसे नेता महिला आरक्षण के खिलाफ थे. उसी कुनबे से आने वाले नीतीश कुमार ने महिलाओं की ताकत पहचानी और 2005 में सीएम बनते ही पहला काम पंचायत चुनावों में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण का किया. उसके बाद उन्होंने निकाय चुनावों में भी 50 प्रतिशत आरक्षण दिया. नीतीश यहीं नहीं रुके, उन्होंने सरकारी नौकरियों में भी महिलाओं को 35 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया. देश में सबसे पहले नीतीश ने जीविका का कांसेप्ट डेवलप किया. इसके लिए विश्व बैंक से राज्य सरकार को कर्ज लेना पड़ा. अब तो देश भर में नीतीश की इस अवधारणा को लागू कर दिया गया है. हाल ही में इसके लिए केंद्र सरकार ने 105 करोड़ का फंड दिया है. पीएम नरेंद्र मोदी ने जीविका निधि साख सहकारी संघ लिमिटेड की न सिर्फ शुरुआत की, बल्कि 105 करोड़ की राशि भी ट्रांसफर की. बिहार में जीविका समूहों से जुड़ी दीदियों की संख्या 1.5 करोड़ के करीब पहुंच गई है.

10000 की नकदी
नीतीश कुमार की ताकत महिलाएं ही रही हैं. हालांकि महिलाओं पर नीतीश कुमार की पकड़ ढीली करने के लिए ही कांग्रेस और आरजेडी ने महागठबंधन की सरकार बनने पर 2500 रुपए मासिक मदद की घोषणा की थी. पर, नीतीश ने बड़ी समझदारी से मदद का नया तरीका खोज निकाला. नीतीश सरकार ने निर्णय लिया है कि हर परिवार की एक महिला को 10 हजार रुपए नकद दिए जाएंगे. इसके पीछे का मकसद सीधे तौर पर चुनावी लगता है, लेकिन सच में इस पर अमल हुआ तो इससे बिहार की तस्वीर बदल जाएगी. अव्वल तो यह पैसा लौटाना नहीं है. इस मदद का मकसद महिलाओं द्वारा अपना रोजगार खड़ा करना है. बिहार में 2.97 करोड़ परिवार हैं. इनमें 94 लाख गरीब परिवार हैं. गरीब के रूप मे चिह्नित परिवारों के लिए नीतीश कुमार ने पहले ही 2 लाख रुपए की मदद की घोषणा कर रखी है.

नई घोषणा के मुताबिक सभी परिवारों को केंद्र कर बनी योजना में बिना किसी भेदभाव के हर परिवार को 10 हजार रुपए मिलेंगे. अगर इनमें 5-10 प्रतिशत महिलाओं ने भी इससे जीविकोपार्जन की ओर कदम बढ़ाया तो इससे लोगों की आर्थिक स्थिति तो सुधरेगी ही, महिलाएं दूसरे को भी रोजगार दे सकेंगी.

मुफ्त की बिजली
नीतीश कुमार की 125 यूनिट फ्री बिजली की योजना ने बिहार में धमाल मचा दिया है. सरकारी आंकड़ों पर भरोसा करें तो इसका फायदा राज्य के एक करोड़ से अधिक लोगों को मिला है. तेजस्वी यादव ने भी फ्री बिजली का कमाल कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, हरियाणा, दिल्ली और झारखंड में देखा है. दिल्ली में अरविंद केजरीवाल ने मुफ्त की रेवड़ियों की शुरुआत की थी. सत्ता में केजरीवाल आए तो 10 साल आसानी से इसी फ्रीबीज के बूते निकाल लिए. झारखंड में 200 यूनिट फ्री बिजली के बूते हेमंत सोरेन ने दूसरी बार सत्ता हासिल कर ली. नीतीश कुमार ने भी इसकी नजाकत को समझा और 125 यूनिट बिजली फ्री कर दी. हालांकि नीतीश कुमार 2020 तक किसी भी तरह की मुफ्त वाली योजना के प्रबल विरोधी रहे हैं. पर, सच यह है कि कुछ मुफ्त देकर कौन सत्ता पाना नहीं चाहेगा. तेजस्वी यादव और उनकी पार्टी आरजेडी के नेता कहते हैं कि नीतीश नकलची हैं. वे तेजस्वी यादव की घोषणाओं की नकल कर रहे हैं. सच तो यह है कि तेजस्वी ने दूसरे राज्यों के इस कारगर फार्मूले की नकल की. नीतीश ने उन योजनाओं को न सिर्फ चुनावी, बल्कि विकास के नजरिए से भी लागू किया है.

पेंशन राशि बढ़ना
नीतीश कुमार ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि 400 से बढ़ा कर 1100 कर दिया है. इससे एक करोड़ से अधिक लोग लाभान्वित हुए हैं. उन्हें धेला भी बिजली बिल के भुगतान में खर्च नहीं करना पड़ा है. जाहिर है कि जिन्हें लाभ मिला, वे नीतीश के ही गुण गाएंगे. तेजस्वी यादव इसे भी अपनी घोषणा की नकल बता सकते हैं. लेकिन उनकी और जन सुराज के प्रशांत किशोर की इस बाबत घोषणा से नीतीश कुमार की घोषणा अलग है. नीतीश ने दे दिया और तेजस्वी सरकार बनने पर देंगे. जनता तो उसी से खुश होती है, जो उसे मिलने लगे. इस महीने नीतीश की कुछ और चौंकाने वाली घोषणाएं भी हो सकती हैं. उस बारे में अभी तक न सरकार की ओर से कोई संकेत मिला है और न तेजस्वी समेत विपक्ष के किसी और नेता को इसकी भनक है. माना जा रहा है कि चुनावी ब्रह्मास्त्र के रूप में नीतीश एक और बड़ा ऐलान कर सकते हैं.