नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद से कब इस्तीफा देंगे? वो संभावित तारीख जिसकी सियासी गलियारों में है चर्चा

पटना. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा चुनाव में जीत हासिल की है. नीतीश कुमार समेत जेडीयू और बीजेपी के सभी पांच उम्मीदवार सफल रहे. यह जीत जहां बिहार में एनडीए के मजबूत गठबंधन की ताकत दिखाती है, वहीं अब नीतीश कुमार संसद में बिहार के विकास के मुद्दे उठाएंगे. इस बीच अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे की बात भी होने लगी है. बिहार में राजनीतिक चर्चा इस बात पर केंद्रित हो गई है कि क्या नीतीश कुमार जल्दी ही मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे और सक्रिय भूमिका दिल्ली की राजनीति में निभाएंगे. ऐसे में सियासी गलियारों में यही सवाल पूछे जा रहे हैं कि सीएम नीतीश कुमार कब इस्तीफा देंगे और अगला सीएम कौन होगा. इस बीच सूत्रों के अनुसार जो जानकारी सामने आ रही है इसके मुताबिक नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा सौंपने की संभावित तारीख भी आ गई है.

इस्तीफे की तारीख को लेकर चर्चाएं
जानकार कहते हैं कि राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण करने के लिए सीएम नीतीश कुमार का इस्तीफा जरूरी है. अंदखाने की खबरों के अनुसार नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद नई सरकार का गठन होगा. नीतीश कुमार ने भी कहा है कि नई सरकार को उनका पूरा सहयोग मिलेगा. इस बीच सूत्र बताते हैं कि अप्रैल के पहले या दूसरे सप्ताह में नीतीश कुमार के इस्तीफे से लेकर नये मुख्यमंत्री के पद ग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद है. सूत्रों ने बताया कि वह 8 या 9 अप्रैल को मुख्यमंत्री पद से अपना इस्तीफा सौंपेंगे. इसके बाद राज्य में नई सरकार के गठन का रास्ता साफ हो जाएगा और इस्तीफे की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही वह दिल्ली में राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण करेंगे.

नई सरकार के गठन की तैयारी
कहा जा रहा है कि अगर नीतीश कुमार इस्तीफा देते हैं तो उसके बाद नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू होगी. माना जा रहा है कि यह बदलाव पूरी तरह योजनाबद्ध तरीके से होगा ताकि सत्ता परिवर्तन सहज तरीके से हो सके. बता दें कि एनडीए के भीतर पहले से ही इसको लेकर बातचीत चल रही है और अब राज्यसभा चुनाव में मिली सफलता के बाद गठबंधन का आत्मविश्वास भी बढ़ा है.

नीतीश कुमार लंबे समय से बिहार की राजनीति का प्रमुख चेहरा रहे हैं. अब राज्यसभा के जरिए वे राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं. उन्होंने खुद कहा है कि वे बिहार के विकास के लिए आगे भी काम करते रहेंगे और नई सरकार को मार्गदर्शन देंगे. ऐसे में यह बदलाव भूमिका का होगा, प्रभाव का नहीं.

गठबंधन की रणनीति और विभागों का बंटवारा
नई सरकार के गठन के साथ ही विभागों के बंटवारे को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है. माना जा रहा है कि भाजपा अहम विभाग अपने पास रख सकती है, जबकि जदयू विकास और सामाजिक योजनाओं पर फोकस करेगा. गृह मंत्रालय जैसे विभाग को लेकर भी राजनीतिक समीकरण महत्वपूर्ण होंगे.

बिहार की राजनीति में नया अध्याय
अगर अप्रैल में सत्ता परिवर्तन होता है तो यह बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत होगी. एक तरफ अनुभवी नेतृत्व केंद्र की ओर जाएगा, तो दूसरी तरफ राज्य में नई टीम को मौका मिलेगा. फिलहाल तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है, लेकिन इतना तय है कि आने वाले कुछ हफ्ते बिहार की राजनीति के लिए बेहद अहम साबित होने वाले हैं.